सर्वोच्च अदालत ने छात्रों के खिलाफ बलपूर्वक कार्रवाई पर लगाई रोक

सर्वोच्च अदालत ने अधिकारियों को उन छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बलपूर्वक कार्रवाई करने से रोक दिया है, जिन्होंने परीक्षा पत्रों के लीक हो जाने तथा अन्य गड़बड़ियों के चलते विरोध में प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।

सर्वोच्च अदालत ने अधिकारियों को उन छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बलपूर्वक कार्रवाई करने से रोक दिया है, जिन्होंने परीक्षा पत्रों के लीक हो जाने तथा अन्य गड़बड़ियों के चलते विरोध में प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।

अदालती आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई के आदेश में राज्य सरकारों को 18 साल से कम उम्र के उन सभी छात्र प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का भी निर्देश दिया, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर हिरासत में लिया था।

आदेश में आगे कहा गया कि उन्हें “खुद या उनके परिवार के सदस्यों द्वारा साधारण बॉन्ड भरने पर रिहा किया जा सकता है, विशेष रूप से, यदि ज़मानत के लिए ऐसी ज़रूरत पर ज़ोर दिया जाता है।” हालांकि, मुख्य न्यायाधिपति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की बेंच ने यह साफ कर दिया कि यह आदेश “आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों पर लागू नहीं होगा।”

धर्माध्यक्षीय प्रवक्ता
भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के प्रवक्ता फादर रॉबिनसन रॉडरिग्ज़्स ने कहा, “हमें खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने उन छात्र प्रदर्शनकारियों को न्याय दिलाने के लिए हस्तक्षेप किया जो शांतिपूर्ण विरोध के अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे।”

उत्तर प्रदेश में ऑल इंडिया सेक्युलर फोरम के कोऑर्डिनेटर आरिफ खान ने कहा कि कोर्ट का आदेश “यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी छात्र प्रदर्शनकारी को सरकारी एजेंसियों से और परेशानी का सामना न करना पड़े, जो प्रायः अपने राजनैतिक आकाओं के इशारे पर काम करती हैं।”

शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) आंदोलन की पहल पर शुरू हुए इन विरोध प्रदर्शनों को देश भर के छात्रों से भारी समर्थन मिला जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती पेश की। सीजेपी ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विरोध प्रदर्शन बंद कर दिया था लेकिन चेतावनी दी थी कि अगर केंद्र और राज्य सरकारें विरोध प्रदर्शनों को लेकर किसी को निशाना न बनाने का अपना वादा पूरा नहीं करती हैं, तो वे फिर से सड़कों पर उतर जायेंगे।

याचिकाएँ
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया जिसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अतिरिक्त बल इस्तेमाल करने के लिए पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।

प्राप्त समाचारों के अनुसार, 20 जुलाई को नई दिल्ली में जंतर-मंतर मैदान से भारतीय संसद तक विरोध प्रदर्शन में शामिल, लड़कियों एवं नाबालिगों सहित, लगभग 130 से अधिक छात्र घायल हो गए थे।

याचिका कर्ताओं का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ “अंधाधुंध और अत्यधिक बल प्रयोग किया गया जिसमें लाठीचार्ज, पेलेट गन, आंसू गैस और अन्य कई उपायों का इस्तेमाल किया गया था।

अदालत ने 3 अगस्त को मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय की है।

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