विदेशी फंडिंग को कड़ा करने की योजना के पुनरावलोकन की मांग

ईसाइयों का प्रतिनिधित्व करनेवाले यूनाईटेड क्रिस्टियन फोरम ने भारत सरकार से देश के विदेशी फंडिंग कानून में प्रस्तावित बदलावों को सांसदीय समिति को भेजने की अपील की है।

ईसाइयों का प्रतिनिधित्व करनेवाले  यूनाईटेड क्रिस्टियन फोरम ने भारत सरकार से देश के विदेशी फंडिंग कानून में प्रस्तावित बदलावों को सांसदीय समिति को भेजने की अपील की है। साथ ही, चेतावनी दी है कि इन बदलावों से ईसाई संगठनों के सामाजिक और लोकपकारी कार्य प्रभावित हो सकते हैं या उनपर रोक लग सकती है।

संसदीय समीक्षा की मांग  
नई दिल्ली में मौजूद यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम (यूसीएफ) ने कहा कि फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (एफसीआऱए) में प्रस्तावित संशोधन से उन संगठनों पर सरकारी नियंत्रण और कड़ा हो जाएगा जो विदेशी अनुदान पर निर्भर हैं और इससे ईसाई संस्थाएं बुरी तरह से प्रभावित होंगी।

फोरम ने 21 जुलाई को नई दिल्ली में भारत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू को एक ज्ञापन दिया, जिसमें संसद में जारी मानसून सत्र में इस पर बहस से पहले प्रस्तावित कानून की विस्तृत संसदीय समीक्षा करने की मांग की गई।

मंत्री का आश्वासन
यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम के उत्तर-पूर्वी भारत के प्रवक्ता टोको टेकी ने 23 जुलाई को ऊका समाचार से कहा, "मंत्री ने मुझे भरोसा दिलाया है कि वे हमारे समुदाय की चिंताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाएंगे।"

प्रधान मंत्री मोदी के मंत्रीमण्डल ने 18 मार्च को फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 को मंज़ूरी देते हुए कहा है कि इन बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग वाली कल्याणकारी गतिविधियों की निगरानी को मज़बूत करना तथा पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार लाना है।

इस बिल को इस साल की शुरुआत में संसद के बजट सत्र में पेश किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन नागरिक और सामाजिक समूहों के विरोध के बाद इसे टाल दिया गया। इन समूहों में ईसाई संगठन भी शामिल हैं, जो अपने सामाजिक एवं कल्याणकारी कार्यों एवं मानवतावादी योजनाओं के सम्पादन हेतु विदेशी अनुदान पर निर्भर रहते हैं।