राँची के सहायक धर्माध्यक्ष आनन्द डेविड खलखो का पावन धर्माध्यक्षीय अभिषेक सम्पन्न

राँची के सहायक धर्माध्यक्ष माननीय आनन्द डेविड खलखो का पावन धर्माध्यक्षीय अभिषेक 8 अगस्त को राँची के लोयला मैदान में बड़े ही धूमधाम से सम्पन्न हुआ। 
राँची के महाधर्माध्यक्ष माननीय विंसेंट आइंद ने मुख्य अनुष्ठाता और दिल्ली के महाधर्माध्यक्ष अनिल कूटो एवं राँची के सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो ने सह- अनुष्ठाता के रूप में अभिषेक की धर्मविधि सम्पन्न की। समारोह में वाटिकन के प्रेरितिक राजदूत के प्रतिनिधि के साथ-साथ देशभर के कई माननीय महाधर्माध्यक्ष, धर्माध्यक्ष, सुपीरियर जेनेरल, प्रोविंशल्स, पुरोहितगण, धर्मबहनों, जन प्रतिनिधियों एवं विश्वासियों ने भाग लिया।

पवित्र मिस्सा के दौरान पवित्र आत्मा के आह्वान के बाद पोप लियो 14वें के नियुक्ति व आदेश पत्र को पूरे विश्वासी समुदाय के समक्ष रखा गया। वाटिकन के प्रेरितिक राजदूत के प्रतिनिधि मोनसिन्योर अंद्रेया फ्रांचा ने उसे लैटिन भाषा में और फादर थेओदोर टोप्पो ने हिन्दी भाषा में पढ़कर सुनाया। विश्वासी समुदाय ने ताली बजाकर और “ईश्वर को धन्यवाद” कहकर पोप के इस आदेश का स्वागत किया।

कलीसिया में एक धर्माध्यक्ष का स्थान और उनकी जिम्मेदारी
तत्पचात् मुख्य अनुष्ठाता महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद ने उपस्थित सभा के सामने कलीसिया में एक धर्माध्यक्ष का स्थान और उनकी जिम्मेदारी का विश्लेषण किया।

उन्होंने कहा, “जिस तरह पिता ने प्रभु येसु को दुनिया में भेजा, उसी तरह येसु ने प्रेरितों को भेजा, वे पवित्र आत्मा से भर दिये गये ताकि ईश्वर के वचन का यथाशक्ति प्रदान कर सकें और हर जाति के लोगों को एक ही समुदाय में इकट्ठा करके, उन्हें पवित्र जीवन का पथ प्रदर्शन करें। चूँकि उक्त काम संसार के अंत तक जारी रहना था प्रेरितों ने अपने सहायक चुने और उनके माथे पर हाथ रखकर पवित्र आत्मा का वरदान दिया। जिसे उन्होंने स्वयं पाया था। अर्थात् पुरोहिताई की परिपूर्णता। पीढी दर पीढी धर्माध्यक्ष अटूट सिलसिले में अभिषेक्त होते आये हैं इस तरह जो अधिकार शुरू में दिये गये थे हमारे इस दिन तक चले आये हैं। प्रभु येसु ख्रीस्त मनुष्यों के बीच स्थायी बने रहते हैं, और मुक्ति प्रदान करते हैं।” धर्माध्यक्ष के द्वारा ख्रीस्त ही अपना वचन सुनाते हैं, और समुदाय के सामने उनका गूढ़तम रहस्य खोलते हैं। येसु कहते हैं मैं भेड़ों के लिए अपना जीवन अर्पित करता हूँ। महाधर्माध्यक्ष ने पोप फ्राँसिस की बात याद दिलायी कि चरवाहों में भेड़ की गंध होनी चाहिए। उन्होंने नवनियुक्त सहायक धर्माध्यक्ष आनन्द डेविड खलखो से कहा कि वे पिता और भाई के समान उन सभी से प्यार करें जिन्हें ईश्वर उन्हें सुपूर्द कर रहे हैं। उन्होंने उनके इस नये और विशेष कार्यभार के लिए ई्श्वर से आशीष और कृपा की याचना की।

धर्माध्यक्षीय अभिषेक की पवित्र धर्मविधि
धर्माध्यक्षीय अभिषेक की पवित्र धर्मविधि शुरू करने से पहले उम्मीदवार की जाँच हेतु कुछ सवाल किये गये। फिर संतों की स्तुति विन्ती हुई। उसके बाद सभी धर्माध्यक्षों ने एक-एक करके उम्मीदवार के माथे पर हाथ रखकर प्रार्थना की। फिर पवित्र क्रिज्मा तेल के विलेपन से उन्हें अभियंजित किया गया। उसके बाद उन्हें पवित्र बाईबिल भेंट कर औपचारिक रूप से गुरू की उपाधि दी गई। अंगुठी, किरीट और अधिकार डंडा देकर उन्हें कलीसिया का गड़ेरिया घोषित किया गया।

इसी के साथ धर्माध्यक्षीय अभिषेक की धर्मविधि पूरी हुई। पूरी सभा ने जोरदार ताली बजायी और धर्माध्यक्षों ने गले लगाकर नये सहायक धर्माध्यक्ष माननीय आनन्द डेविड खलखो का अपनी मंडली में स्वागत किया। इसके बाद चढ़ावा गान एवं नृत्य के साथ पवित्र मिस्सा की धर्मविधि को आगे बढ़ाया गया।

राँची के नव अभिषिक्त सहायक धर्माध्यक्ष का आदर्शवाक्य है “तेरी इच्छा पूरी हो।” (मती. 6:10)

उद्घोषक ने कहा, “आज हम इस अमूल्य उपहार के लिए ईश्वर को हृदय से धन्यवाद देते हैं।”

राँची के सहायक धर्माध्यक्ष की जीवनी
राँची के सहायक धर्माध्यक्ष आनंद डेविड खलखो का जन्म 20 नवंबर, 1975 को रांची महाधर्मप्रांत के मांडर में हुआ। उन्होंने कोलकाता में संत जॉन वियानी माइनर सेमिनरी, संत अल्बर्ट कॉलेज मेजर सेमिनरी और रांची में संत ज़ेवियर कॉलेज में पढ़ने के बाद, रांची के संत अल्बर्ट कॉलेज में ईशशास्त्र की पढ़ाई की। 15 मई, 2006 को रांची महाधर्मप्रांत के लिए उनका पुरोहिताभिषेक किया गया था।

नव अभिषिक्त सहायक धर्माध्यक्ष आनंद डेविड खलखो ने निम्नलिखित पद संभाले हैं और पढ़ाई पूरी की है:

पुरोहिताभिषेक के बाद वे 2006 से 2009 तक कार्डिनल तेलेस्फोर पी. टोप्पो के निजी सचिव रहे। 2009 से 2011 तक मैंगलोर के मुलर हॉस्पिटल में हॉस्पिटल प्रशासन में प्रबंधन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। फिर 2011 से 2015 तक सीबीसीआई सोसाइटी फॉर मेडिकल एजुकेशन, उत्तर भारत के सह-निदेशक और तत्कालीन बिझान रीजन के धर्मप्रांतीय पुरोहितों के परिषद के अध्यक्ष थे। 2011 से 2020 तक लिवन्स हॉस्पिटल प्रोजेक्ट, मांडर के निदेशकों की समिति के सदस्य; 2015 से 2017 तक सीबीसीआई दिल्ली के महासचिव के सचिव; 2017 से 2020 जनसंपर्क अधिकारी, 2019 से 2020 तक रांची में महाधर्माध्यक्ष निवास के प्रबंधक, 2020 से रांची में संत मरिया महागिरजाघऱ के पल्ली पुरोहित, 2021 से रांची में सामाजिक विकास केंद्र के निदेशक; 2022 से रांची में सेमिनारियों के निदेशक और 2024 से अब तक रांची के विकार जनरल के रुप में अपनी सेवा दी।

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