मीडिया और समुदायों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव
रोम स्थित परमधर्मपीठीय ऊरबानियाना विश्वविद्यालय में गुरुवार को डिजीटल टैकनॉलोजी, शिक्षा और संस्कृति जगत के विद्धानों और पत्रकारों का एक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न हुआ जिसमें मीडिया और समाज पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावों का विश्लेषण किया गया।
टेक्नोलॉजी मानव अधिकार क्षेत्र बने
“मानवीय चेहरों और आवाज़ों को संरक्षित करना” शीर्षक से आयोजित उक्त सम्मेलन में सम्प्रेषण और संचार माध्यम दिवस पर प्रकाशित सन्त पापा लियो 14 वें के सन्देश में इंगित किये गये लाभ पर नैतिक गारंटी की ज़िम्मेदारी, सहयोग और शिक्षा विषयों पर चिन्तन किया गया। इस तथ्य को रेखांकित किया गया कि इन विषयों को व्याहारिकता के साथ लागू किया जाना चाहिये ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि टेक्नोलॉजी मानव अधीनता के बजाय मानव अधिकार क्षेत्र का साधन बनी रहे।
सम्प्रेषण एवं संचार माध्यम सम्बन्धी विश्व दिवस पर सन्त पापा लियो 14 वें के सन्देश से प्रेरित इस अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन परमधर्मपीठीय सम्प्रेषण और संचार माध्यम विभाग तथा परमधर्मपीठीय शिक्षा और संस्कृति परिषद द्वारा सन्त पापा लियो के प्रथम विश्व पत्र मानिफिका ऊमानितास के प्रकाशित होने के कुछ ही दिन पूर्व किया गया था। इसका मूल उद्देश्य व्यक्तियों, समुदायों एवं राष्ट्रों पर एआई यानि कृत्रिम बुद्धिमता के प्रभावों का विशलेषण करना था।
संरक्षण का अर्थ
सम्मेलन का उदघाटन करते हुए परमधर्मपीठीय सम्प्रेषण और संचार माध्यम विभाग पाओलो रूफिनी ने संरक्षण का अर्थ समझाते हुए कहाः “संरक्षण” एक ऐसा शब्द है जो हमें चुनौती देता है, इसका अर्थ है “प्रेम और ज़िम्मेदारी के साथ किसी की देखभाल करना।”
उन्होंने कहा, "सबसे बड़ा खतरा इस बात को बिना सोचे-समझे मान लेने में है कि ज्ञान अब हमारा नहीं रहा; और जो कुछ हमने खुद बनाया है—एल्गोरिदम, प्लेटफॉर्म, या ऑटोमेटेड सिस्टम—उसे हमारे लिए सोचने, हमारी ज़िंदगी और यहाँ तक कि दूसरों से बातचीत करने के तरीके को पूरी तरह से प्रोग्राम करने का काम सौंपा जा सकता है।"
परमधर्मपीठीय शिक्षा और संस्कृति परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल होसे तोलेनतीनो दे मेनडोन्सा ने कहा। "ऐसे समय में जब वास्तविकता और अनुकरण के बीच की सीमाएं तेजी से धुंधली होती जा रही हैं, मानव व्यक्ति को कभी भी एक स्टैटिस्टिक, एक प्रोफ़ाइल या एक एल्गोरिदम तक सीमित नहीं किया जा सकता। मानव हमेशा से कुछ और है, वह एक रहस्य है, एक पुकार है।"
कार्डिनल ने इस तथ्य पर ज़ोर दिया कि "संरक्षण का अर्थ किसी चीज़ को प्रदर्शन पेटी या संदूक़ में बंद करना नहीं है बल्कि नाज़ुक चीज़ों की रक्षा करना है ताकि वे फलती-फूलती रहें, जैसे कि मानवीय आवाज़ें और चेहरे, जिन्हें एआई के द्वारा क्लोन किया जा सकता है, उनमें हेरफेर किया जा सकता है, उन्हें चुप कराया जा सकता है, लेकिन साथ ही “हर यथार्थ साक्षात्कार में उनका पुनर्जन्म भी हो सकता है।"
एआई समाज समर्थक हो
इसी बीच, न्यू पब्लिक नामक डिजीटल कम्पनी की संस्थापक एली प्राईज़र ने कहा कि एआई को परजीवी या समाज-समर्थक रूप में कार्यान्वित किया जा सकता है। उन्होंने कहाः "हमें मानवीय सामाजिकता की एक रचनात्मक दृष्टि चाहिए जो साथ मिलकर रहे और जिसे शक्तिशाली एआई जगत का समर्थन मिले।"
उन्होंने कहा कि यह विचार अलग-अलग राजनितिक वर्णक्रमों के नीति निर्माताओं के साथ-साथ धार्मिक नेताओं एवं संस्थाओं तथा अन्य लोगों को भी एक साथ ला सकता है।
वास्तविकता से नाता न तोड़ें
न्यू यॉर्क टाईम्स के रिपोर्टर कश्मीर हिल ने इस बात दुख व्यक्त किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सम्पर्क में आने के बाद से कई लोगों ने वास्तविकता से नाता तोड़ लिया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि असली या सच क्या है, यह न बता पाने का जो ख़तरा उत्पन्न हो गया है वह उन सभी पर मंडरा रहा है जो एआई और इससे संलगन निकाय का इस्तेमाल करते हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता सामाजिक असमानता और अन्याय को बढ़ावा दे रही है इस पर भी सम्मेलन में गहन विचार-विमर्श किया गया तथा इस अस्त्र के सदुपयोग पर ध्यान देने का सभी से आह्वान किया गया।