बंगाल में हिंसा पर नागरिकों की गंभीर चेतावनी

मुंबई, 4 जून, 2026: 140 से ज़्यादा एक्टिविस्ट, शिक्षाविद, पूर्व मंत्री, कलाकार और वैज्ञानिकों के एक संयुक्त बयान में पश्चिम बंगाल में विपक्षी नेताओं पर हुए हिंसक हमलों के बाद भारत में "आपसी गृह-युद्ध" (fratricide) की चेतावनी दी गई है।

"क्या भारत आपसी गृह-युद्ध की कगार पर है और क्या खामोशी ही हमारा एकमात्र जवाब होगा?" शीर्षक वाले इस बयान में सांसद अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों के बाद "कानून के शासन (Rule of Law) के पूरी तरह खत्म हो जाने" की निंदा की गई है।

बयान पर हस्ताक्षर करने वालों ने कहा, "ये हिंसक हमले — जबकि राज्य में अभी भी केंद्रीय बल तैनात हैं — न केवल पश्चिम बंगाल में कानून के शासन के पूरी तरह खत्म होने का संकेत देते हैं, बल्कि ये देश के बाकी हिस्सों के लिए भी गंभीर चेतावनी का संकेत हैं।"

इस दस्तावेज़ में केंद्रीय चुनाव आयोग के कामकाज की भी आलोचना की गई और कहा गया कि "91 लाख पुराने वोटरों को उनके वोटिंग के अधिकार से वंचित कर दिया गया।" बयान में इस हिंसा को मई 2026 के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद बेरोकटोक दमन से जोड़ा गया है।

हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़, गांधीवादी तुषार गांधी, जेसुइट नेता फादर फ्रेज़र मस्कारेनहास और सेड्रिक प्रकाश, फिल्म निर्माता अविनाश दास और फोटोग्राफर राम रहमान शामिल हैं।

बयान में सांसद फूलन देवी की 2001 में हुई हत्या का ज़िक्र किया गया, जब संसद ने उस हमले पर "संज्ञान" लिया था। इसके विपरीत, हस्ताक्षर करने वालों का कहना है कि आज की संस्थाओं ने "संस्थागत निष्क्रियता और खामोशी" के साथ प्रतिक्रिया दी है।

बयान में चेतावनी दी गई है, "हम केवल अपने ही नुकसान की कीमत पर मूक दर्शक बने रह सकते हैं," और नागरिकों से हिंसा और दमन के खिलाफ एकजुट होने और आवाज़ उठाने का आग्रह किया गया है।

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