पटना में धार्मिक समुदायों ने जेसुइट इको-कैंपस में पेड़ लगाकर 'सीज़न ऑफ़ क्रिएशन' मनाया

कॉन्फ़्रेंस ऑफ़ रिलीजियस इंडिया (CRI) पटना यूनिट के धार्मिक भाई-बहनों ने 2 अक्टूबर को पटना में जेसुइट संस्था 'तरुमित्र' में इकट्ठा होकर 'सीज़न ऑफ़ क्रिएशन' मनाया।

इस कार्यक्रम में धार्मिक समुदायों के सदस्य और पटना व उसके आस-पास के पैरिश (चर्च क्षेत्रों) के युवा शामिल हुए। साथ ही, इसमें पर्यावरण के संरक्षक संत, सेंट फ्रांसिस ऑफ़ असीसी की मृत्यु की 800वीं वर्षगांठ भी मनाई गई।

'तरुमित्र' के निदेशक फादर टोनी पेंडनाथ (SJ) ने बाइबिल की जेनेसिस और इज़ेकिएल की किताबों में सृष्टि के बारे में बताई गई बातों पर चर्चा की। उन्होंने पानी के महत्व और सृष्टि के साथ मिल-जुलकर रहने की इंसान की ज़िम्मेदारी पर ज़ोर दिया।

सेंट फ्रांसिस का उदाहरण देते हुए उन्होंने सादगी, एकजुटता और ऐसे प्यार का आह्वान किया जो "असीम हो, जिसकी कोई सीमा या बंधन न हो।" उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग, उपभोक्तावाद और संसाधनों तक असमान पहुँच जैसी चुनौतियों का भी ज़िक्र किया।

विचार-विमर्श के बाद कार्यक्रम का अगला चरण काम करने का था, जिसमें धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों और युवाओं ने 'तरुमित्र' कैंपस में पौधे लगाए।

इसके बाद यूकेरिस्टिक सेलिब्रेशन (प्रभु भोज) हुआ, जिससे प्रतिभागियों को सृष्टि के लिए धन्यवाद देने और उसकी देखभाल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराने का मौका मिला।

स्थानीय CRI यूनिट के उपाध्यक्ष फादर डैनियल राज (SJ) ने अपने प्रवचन में उदारता और एकजुटता का मतलब समझाने के लिए अपना एक निजी अनुभव साझा किया।

अपने 'रीजेंसी' (प्रशिक्षण) के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे बहुत कम संसाधनों वाले ग्रामीणों ने भारी बारिश के दौरान उन्हें आश्रय दिया था। वे एक ऐसा छाता लेकर आए थे जिसमें कई छेद थे, क्योंकि उनके पास बस वही एक छाता था।

उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें सिखाया कि उदारता का मतलब यह नहीं है कि आपके पास देने के लिए बहुत कुछ हो, बल्कि यह है कि आपके पास जो कुछ भी है, उसमें से आप दें। इस याद ने बाद में दूसरों के साथ अपना समय और संसाधन साझा करने के उनके संकल्प को प्रभावित किया।

'तरुमित्र' (जिसका अर्थ है "पेड़ों के दोस्त") की स्थापना 1988 में पटना में स्वर्गीय फादर रॉबर्ट अथिकल (SJ) की सोच से हुई थी। यह पहल पर्यावरण के प्रति जागरूकता, जैव-विविधता, इको-स्पिरिचुअलिटी (पर्यावरण-आध्यात्मिकता) और सृष्टि की ज़िम्मेदारी से देखभाल को बढ़ावा देती है।

इसका कैंपस पर्यावरण शिक्षा और पर्यावरण से जुड़े कार्यों के केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। तारुमित्र का काम भारत से बाहर भी फैला है और संगठन को 2005 में UNESCO से 'स्पेशल कंसल्टेटिव स्टेटस' (विशेष सलाहकार का दर्जा) मिला।

इस कार्यक्रम में शामिल लोगों ने फादर रॉबर्ट को याद किया, जिनका जुलाई में निधन हो गया था। उन्होंने एक ऐसी जगह बनाई थी जहाँ पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं को असल कामों और समुदाय की भागीदारी में बदला जा सके।

कार्यक्रम का समापन कैंपस में पेड़ों के नीचे साथ मिलकर खाना खाने के साथ हुआ, जिससे सादगी, समुदाय और प्रकृति से जुड़ाव पर ज़ोर दिया गया।

इसमें शामिल धार्मिक लोगों और युवाओं के लिए, 'सीज़न ऑफ़ क्रिएशन' कार्यक्रम में प्रार्थना, चिंतन और असल काम का मेल था। इससे इस बात पर ज़ोर दिया गया कि पर्यावरण की देखभाल रोज़मर्रा की ईसाई ज़िंदगी का हिस्सा बन सकती है।

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