कार्डिनल पोल्लाः मग्नीफिका ह्यूमानितास एक नौतिक दिशासूचक

कार्डिनल अंतोनी पोल्ला, भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष (सीबीसीआई) ने पोप लियो 14वें के विश्व प्रेरितिक पत्र “मग्नीफिका ह्यूमानितास” की प्रशंसा करते हुए, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की चुनौतियों का सामना करने से संदर्भ में, उसे “एक स्पष्ट नैतिक दिशासूचक” घोषित किया।

सीबीसीआई के अध्यक्ष कार्डिनल पोल्ला ने पोप लियो 14वें के प्रथम विश्व प्रेरितिक पत्र को एक स्पष्ट नैतिक दिशासूचक” कहा।

कार्डिनल पोल्ला ने पोप लियो के प्रथम विश्व प्रेरितिक पत्र “मग्नीफिका ह्यूमानितास” का स्वागत करते हुए उनके प्रति अपनी कृतज्ञता के भाव प्रकट किया और एक विज्ञप्ति में कहा कि यह “एक नैतिक दिशानिर्देशिका है” जिसके माध्यम प्रभावकारी ढ़ंग से विकसित हो रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का सामना करने में सहायता मिलेगी।

चुनौतियों से निपटना
कार्डिनल पोल्ला ने अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कहा कि बेरोज़गारी, असमानता, निगरानी और किसी एक के हाथों में शक्ति का होना भारत के लोगों के लिए बड़ी चुनौतियाँ हैं। संत पापा का नया विश्व प्रेरितिक पत्र इन मुद्दों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करते हुए हममें जागरूकता उत्पन्न करता है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मैग्नीफिका ह्यूमानितास एआई से उत्पन्न होने वाली समस्याओं से निपटने हेतु हमें एक नया दृष्टिकोण प्रदान करता है, जिससे ईश्वर के रुप में सृजित मानवीय जीवन के सम्मान को बरकरार रखा जा सके। उन्होंने कहा, “ताकनीकी विकास को चाहिए की वह नौतिक सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करें जिससे मानवीय सम्मान, न्याय और जनसामान्य की भलाई बनी रहे।”

कलीसिया की सामाजिक धर्मशिक्षा
कार्डिनल ने मैग्नीफिका ह्यूमानितास के पदों को “कलीसिया की सामाजिक धर्मशिक्षा की एक अगली कड़ी कहा जो संत पापा लियो 13वें के विश्व प्रेरित पत्र को आगे ले चलती है।”

वाटिकन सामाचार के संवाद समाचार पत्रिका फिदेस के अनुसार भारत की कलीसिया में ख्रीस्तीय विश्वासियों की संख्या 20 मिलियन है जिन्हें पल्लियों और शिक्षण संस्थानों के माध्यम से कृत्रिम बुदधिमत्ता के बारे में जानकारी और जागरूकता में बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते विस्तार और कार्य क्षेत्र,  शिक्षा और समाज पर इसके उपयोग के कारण होने वाले बदलाव को देखते हुए, सीबीसीआई ने इस बात अनुभव किया है कि इस विश्व पत्र का उपयोग पुरोहितों, शिक्षण कार्य में संलग्न लोगों और नीति-निर्धारण करने वालों के लिए एक मूल्यवान दिशा-निर्देशिका की भांति हो।

भारतीय धर्माध्यक्षों के सम्मेलन ने संत पापा के विश्व प्रेरितिक पत्र के प्रति अपनी निष्ठा के भाव व्यक्त करते हुए इस बात की अभिव्यक्ति की कि हमें इसके मूल्यों को विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, ख्रीस्तीय शिक्षण संस्थानों, सामाजिक प्रेरिताई के जरिए समाज में फैलाने की जरुरत है।

नौतिक दिशासूचक
सीबीसीआई के अध्यक्ष कार्डिनल अंतोनी पोल्ला ने दास्तवेज के संबंध में अपने खुले विचारों को प्रकट करते हुए कहा, “यह तीव्रता से तकनीकी परिवर्तन के समय में हमारे लिए एक स्पष्ट नैतिक दिशासूचक है”। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हमें सबसे कमज़ोर लोगों को अनियंत्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बुरे असर से बचाने की ज़रूरत है।

कार्डिनल पोल्ला ने कहा कि भारत के काथलिक धर्माध्यक्ष “सभी काथलिकों और नेक विचार वालों से आग्रह करते हैं कि वे संत पापा के इस विश्व पत्र का अध्ययन प्रार्थना के मनोभाव से करते हुए एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा सहायता करें जिसमें तकनीकी, इंसान के सामग्र विकास हेतु मदद करती हो।”

फिदेस समाचार ने कहा कि भारत में कलीसिया दलितों पर एआई के प्रभाव को लेकर भी चिंतित है। जबकि धर्माध्यक्ष पुराने भेदभाव के बढ़ने का खतरा देखते हैं, वहीं  वे यह भी मानते हैं कि अगर एआई  का उपयोग  नैतिक सिद्धांतों के अनुसार किया जाए, तो यह सहभागिता के क्षेत्र में परिवर्तन लाने हेतु मददगार सिद्ध होगा। फिदेस समाचार इस बात को सुदृढ़ प्रदान करता है कि मैग्नीफ़िका ह्यूमानितास ऐसे समय में प्रकाशित किया गया है जब एआई नैतिक मूल्यों और समाज को प्रभावित कर रहे हैं विशेषकर शिक्षा, रोज़गार और संवेदनशील लोगों को।