कांजाबैडा माता मरियम के वार्षिक महोत्सव में 10,000 से ज़्यादा तीर्थयात्री शामिल हुए
22 फरवरी 2026, रविवार: खंडवा धर्मप्रांत के मरियम तीर्थस्थल पर कांजाबैड़ा माता मरियम का वार्षिक महोत्सव 22 फरवरी 2026, रविवार को आस्था और भक्ति के साथ मनाया गया। इस वार्षिक महोत्सव में 4 बिशप, 70 पुरोहित, करीब 200 सिस्टर तथा मध्यप्रदेश, और आसपास के राज्यों से 10 हजार से अधिक विश्वासियों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ भाग लिया।
इस पावन अवसर पर 13 से 21 फरवरी तक प्रतिदिन रोजरी माला विनती, नोवेना प्रार्थना और पवित्र मिस्सा अर्पित की गई। साथ ही विशेष चंगाई हेतु 19 से 21 फरवरी तक तीन दिवसीय आध्यात्मिक साधना का आयोजन गया। जिसमे भी बड़ी संख्या में विश्वासियों ने चंगाई प्रार्थना में भाग लेकर विशेष चंगाई और आशीष प्राप्त की।
महोत्सव की शुरुआत रविवार सुबह 10 बजे अतिथियों से स्वागत एवं रोजरी माला जुलुस के साथ हुई, जिसमे विश्वासी रोजरी माला का जाप करते हुए मरियम श्राइन तक पहुंचे। इसके पश्चात् कैथोलिक कलीसिया के 500 संतों के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन मानंतवाडी धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष मार जोस पोरुन्नेडोम और जीवन रक्षा प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रभु प्रकाश प्रोविंस नागपुर के प्रोविंशियल फादर अन्थोनी रोसवान SAC के द्वारा किया गया।
पर्व की पवित्र मिस्सा की अध्यक्षता झाबुआ धर्मप्रांत के बिशप पीटर रूमल खराडी ने तीन अन्य बिशप अमरावती धर्मप्रांत के बिशप मालकम सिक्केयरा, खंडवा धर्मप्रांत के बिशप अगस्टीन मडत्तीकुन्नेल, मानंतवाडी धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष मार जोस पोरुन्नेडोम, तथा अन्य 70 पुरोहितों की सहभागिता में की।
अपने प्रवचन में अमरावती धर्मप्रांत के बिशप मालकम सिक्केयरा ने कहा कि माँ हर एक के लिए विशेष होती है। हम अपनी माँ से प्रेम करते है, और यही जानकर ईश्वर ने हमें एक नहीं बल्कि दो माताएँ दी है। एक पृथ्वी पर, जो हमें जन्म देती और हमारी देखभाल करती है, और दूसरी स्वर्ग में, हमारी आध्यात्मिक माता मरियम, जो हमारा मार्गदर्शन करती है, हमारे लिए प्रार्थना करती है, हमारी मध्यस्थ बनती है। इसी माँ के प्रेम के कारण इस पवित्र तीर्थ स्थल पर हम इतनी बड़ी संख्या में हमारी माँ मरियम को सम्मान देने और उसकी मध्यस्थता मांगने के लिए एकत्रित होते है।
अपने उपदेश में आगे उन्होंने कहा- इस पवित्र पहाड़ी पर वर्षों पहले जब भयंकर महामारी फैली थी और लोग मर रहे थे। तब मिशनरियों और विश्वासियों ने प्रतिज्ञा की कि यदि लोग इस महामारी से बच जाए तो वे यहाँ मरियम का तीर्थ बनाएंगे। और फिर महामारी थम गई, प्रतिज्ञा पूरी हुई, और यह माता मरियम का स्थान बन गया। और तब से यह स्थान चंगाई, शांति और आशा का स्तोत्र बन गया है। इतिहास में कई बार यह स्थान उजाड़ा गया, खाली हुआ, विरोध सहा, यहाँ तक की माता मरियम की प्रतिमा तक को तोड़ दिया गया परन्तु हर बार मरियम ने इसे जीवित किया। क्योंकि जहाँ माँ होती है वहाँ घर फिर से बनता है।
पवित्र मिस्सा के पश्चात् परम पवित्र यूख्रिस्त की आराधना एवं चंगाई प्रार्थना की गई। जिसकी अगुवाई बरेली धर्मप्रांत के आदरणीय फादर अशोक अलेक्सजेंडर और उनकी टीम ने की। जिसमे भी विश्वासियों ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया, और शारीरिक और मानसिक चंगाई प्राप्त की। दोपहर में प्रीतिभोज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कांजाबैड़ा माता मरियम श्राइन में वर्ष भर विश्वासी अपनी मन्नतें, उदेश्य और प्रार्थना लेकर आते रहते है। कांजाबैड़ा माता मरियम श्राइन में वर्ष भर विभिन्न प्रकार की चंगाई प्रार्थना, विशेष प्रार्थना, रोजरी माला विनती, नोवेना प्रार्थना, परम पवित्र युख्रीस्त की आराधना, मध्यस्थ प्रार्थना एवं क्रूस रास्ता होता रहता है। देश के विभिन्नक्षेत्रों से विश्वासी अपनी मन्नतें लेकर यहाँ आते है एवं माँ मरियम के चरणों में अपने निवेदन रखते है।