ईसाई परिवारों पर हमले के लिए कट्टरपंथी हिंदुओं के खिलाफ मामला दर्ज
पश्चिम बंगाल पुलिस ने कट्टरपंथी हिंदू भीड़ के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की है। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने पश्चिम बंगाल में तीन ईसाई परिवारों पर हमला किया, क्योंकि इन परिवारों ने अपना धर्म छोड़ने और हिंदू धर्म में वापस आने से इनकार कर दिया था।
वेबसाइट 'स्क्रॉल' की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम मेदिनीपुर जिले के पटलापुर गांव में इन परिवारों पर हमला किया गया। आरोप है कि बजरंग दल के सदस्यों ने 18 और 19 अक्टूबर को इन परिवारों को हिंदू रीति-रिवाज निभाने के लिए मजबूर किया।
चर्च के नेताओं ने इस हमले की निंदा की है। उन्होंने राज्य में ईसाइयों पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई है। गौरतलब है कि मई में हिंदू समर्थक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद से ही राज्य में ईसाइयों पर हमले हो रहे हैं।
'बंगाल क्रिश्चियन काउंसिल' (विभिन्न ईसाई संप्रदायों का एक संगठन) के संस्थापक सचिव हेरोड मल्लिक ने बताया, "हम ईसाई परिवारों पर हुए इस क्रूर हमले की निंदा करते हैं और दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग करते हैं।"
उन्होंने कहा कि ईसाई समुदाय, खासकर ग्रामीण इलाकों में, खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
मल्लिक ने कहा, "हमारी कई अपीलों के बावजूद सरकार न तो निष्पक्ष जांच का आदेश देती है और न ही उन उपद्रवियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करती है जो कानून को अपने हाथ में लेते हैं, हमले करते हैं और तोड़फोड़ मचाते हैं।"
उन्होंने बताया कि 'अलायंस फॉर कॉन्स्टिट्यूशनल फ्रीडम' (ACF) नाम का एक कानूनी संगठन पीड़ितों को कानूनी मदद दे रहा है।
पश्चिम मेदिनीपुर की पुलिस अधीक्षक पापिया सुल्ताना ने बताया कि 21 अक्टूबर को इस मामले में FIR (प्राथमिकी) दर्ज की गई है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुलिस इन परिवारों को सुरक्षा देगी और घटना की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, 10 लोगों के एक समूह ने 18 और 19 अक्टूबर को लक्ष्मी मंडल (40 वर्ष) और उनकी भाभियों — बोनोश्री मंडल और सरस्वती मंडल — के घरों पर हमला किया। हमलावरों ने इन ईसाइयों को उनके घरों से बाहर खींचा, उनके कपड़े फाड़ दिए और उन्हें हिंदू धर्म के 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान करने के लिए मजबूर किया। इसमें उन्हें स्नान करना और हिंदू देवी दुर्गा की फूलों के साथ पूजा करना पड़ा। 20 अक्टूबर को ईसाइयों के घरों पर पुलिस तैनात की गई थी।
ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन के प्रवक्ता जॉन दयाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदू चरमपंथी संगठनों और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों द्वारा ईसाइयों के खिलाफ अपराधों की लहर ने सारी हदें पार कर दी हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी इतने कम समय में इतने बर्बर हमले नहीं देखे गए हैं।
उन्होंने कहा, "यह स्पष्ट नहीं है कि भाजपा और उसके वैचारिक मूल संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को एक छोटे ईसाई समुदाय की हत्या या उनके साथ बलात्कार करने की कोशिशों से क्या हासिल होगा। शायद इसका मकसद अपने कट्टर समर्थकों को खुश करके अपने वोट बैंक को मजबूत करना हो।"
दयाल ने बताया कि मई में सत्ता में आए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, राज्यपाल आर. एन. रवि और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ईसाइयों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन किसी ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया।
