नारी बच्चों का बचपन संवारिए, बुढ़ापा खुद संवर जाएगा पिछले कुछ सालों से समाज में एक नया चलन शुरू हुआ है, बच्चो को दूसरो की मदद से बड़ा करने का चलन, जिसके अंतर्गत मां बाप बच्चा होने के साथ ही उसको पालने वाली एक सहायिका (बच्चा संभालने वाली) को भी अपने जीवन में एक महत्वपूर्ण
दंगा प्रभावित मणिपुर में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को मार्केटिंग कौशल का प्रशिक्षण देने के लिए चर्च द्वारा आयोजित सेमिनार