गोवा में रहने वाले लेनोय गोमेंडेस के लिए संगीत की शुरुआत उनके पिता से मिले एक कीबोर्ड से हुई। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि यह साधारण सा तोहफ़ा उन्हें कॉलेज के कार्यक्रमों और टेलीविज़न से होते हुए कोंकणी संगीत, 'तियात्र' (गोवा का पारंपरिक नाटक), कलीसिया की सेवा और धार्मिक नाटकों तक ले जाएगा, जो चर्च में सुने गए संदेशों को मंच पर जीवंत करते हैं।