नारी बच्चों का बचपन संवारिए, बुढ़ापा खुद संवर जाएगा पिछले कुछ सालों से समाज में एक नया चलन शुरू हुआ है, बच्चो को दूसरो की मदद से बड़ा करने का चलन, जिसके अंतर्गत मां बाप बच्चा होने के साथ ही उसको पालने वाली एक सहायिका (बच्चा संभालने वाली) को भी अपने जीवन में एक महत्वपूर्ण
वियतनाम में धर्मसंघ की प्रशिक्षणार्थी धर्मबहनों ने 'सिनोडल लिसनिंग' को ज़रूरतमंदों के लिए 100 मुफ़्त भोजन में बदल दिया