पोप लियोः शांति स्थापना हेतु मददगार हों

पोप लियो ने वाटिकन अप्रवासीय नये राजदूतों का प्रत्यय पत्र स्वीकारने के अवसर पर उन्हें संबोधित कर अपना संदेश में कहा कि उनकी प्रेरिताई “वार्ता को मज़बूत बनाये, आपसी समझ को गहरा करें और दुनिया में ज़रूरी शांति स्थापना में मदद करें।”

पोप लियो ने सिएरा लियोन, बांग्लादेश, यमन, रवांडा, नामीबिया, मॉरिशस, चाड और श्रीलंका के अप्रवासीय नये राजदूतों  का प्रत्यय पत्र स्वीकारते हुए उनका स्वागत किया और उन्हें उनके कार्यों के लिए शुभकामानाएं अर्पित कीं।

पोप ने अपने संबोधन में कहा, “कोई भी देश, समाज, और कोई भी अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन अपने को न्यायपूर्ण और मानवीय तक तक घोषित नहीं कर सकता है अगर वह अपनी कामयाबी को सिर्फ़ अपनी ताकत या खुशहाली के तर्ज पर हिसाब करते हुए, हशिये पर रहने वालों को नज़रअंदाज़ करता हो। वास्तव में, सबसे कमज़ोर और भुला दिए गए लोगों के लिए ख्रीस्त का प्रेम हमें हर तरह के स्वार्थ का परित्याग करते हुए गरीबों और कमज़ोरों के लिए कार्य करने का आहृवान देता है।”

राजनीतिक एकता का परिदृश्य
पोप ने नये राजदूतों का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें उनका स्वागत करके खास तौर पर खुशी हुई क्योंकि कलीसिया पेन्तेकोस्त महापर्व के करीब है, जो हमें शिष्यों के ऊपर पवित्र आत्मा के उतरने की याद दिलाती है, जो उन्हें भय की स्थिति में निडर बनाते हुए, विभाजन को एकता में बदलकर विभिन्न भाषाओं में बोलने के योग्य बनाते हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि एकता की एक ऐसी ही राजनीति दुनिया को प्रेरित करेगी, जहाँ देशों के बीच अच्छे रिश्ते और सच्चे खुलेपन का विकास होगा, जिससे सम्मान को बढ़ावा और ज़िम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।”

भरोसा स्थापित करने का समय
पोप लियो ने जनवरी महीन में कूटनीति को दिये गये संदेश को दुहराते हुए कहा कि “ऐसे समय में जब “दबदबा कायम करने हेतु हथियारों के ज़रिए शांति की चाह की जाती है”, “सभी स्तरों में- द्विपक्षीय, राष्ट्रीय और बहु-राष्ट्रीय” “एक ऐसी राजनीति की अति आवश्यकता है जो वार्ता को बढ़ावा दे और देशों में एक आम सहमति को स्थापित करने का एक माध्यम बनें।”

उन्होंने कहा, “ऐसी वार्ता, जो हमें शांति की खोज हेतु सच्चे मार्ग में ले चलती हो, यह हमें सच्चाई को तोड़-मोड़ किये बिना उन शब्दों में अभिव्यक्ति की मांग करती है जो सत्य को प्रकट करते हैं।” संत पापा ने कहा कि केवल इस तरह से गलतफहमियों को दूर किया जा सकता है और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों के मामले में भरोसा फिर से स्थापित किया जा सकता है।

वार्ता परिवर्तन की मांग
पोप लियो ने कहा कि अच्छी और स्पष्ट वार्ता हमें से हृदय परिवर्तन की भी मांग करती है, “यह हमसे इस बात की मांग करती है कि हम जनसामान्य की भलाई हेतु खास हितों को अपने से अलग रखें।” उन्होंने कहा कि अगर सफलता को सिर्फ़ ताकत और खुशहाली से मापी जाती और हाशिए पर रहने वालों को नज़रअंदाज़ किया जाता है, तो कोई भी देश, समाज या अंतरराष्ट्रीय संगठन सही मायने में न्यायसंगत और मानवीय नहीं कह जा सकता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ख्रीस्त का प्रेम हमें भूले-बिसरे लोगों के लिए कार्य करने का निमंत्रण देता है, यह हमें अपने स्वार्थ से ऊपर उठने का आहृवान करता है जहाँ हम कमज़ोर और गरीब लोगों का परित्याग नहीं करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मजबूती
पोप ने कहा कि यह स्वार्थ का परित्याग करना है जो हममें एकजुटता की भावना लाती है जिसके माध्यम हम राजनीति में सेवा को बढ़ावा देते हुए अंतरराष्ट्रीय संगठनों में मजबूती लाते हैं, जो हमारे लिए वार्ता और आपसी मिलन हेतु एक स्थल तैयार करता है।

उन्होंने आगे कहा,“संस्थाएं झगड़ों को सुलझाने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी साधन बनी हुई हैं। ऐसे समय में जब परिस्थितिकी तनाव हमारी दुनिया को विभाजित कर रहे हैं, हमें चाहिए कि हम उन्हें अधिक प्रतिनिधित्व के स्वरुप, प्रभावकारी और मानवीय एकता को स्थापित करने वाले एक साधन का रुप बनायें।

भरोसे और सहयोग के सेतु
पोप ने राजदूतों की सेवा हेतु कृतज्ञता के भाव प्रकट करते हुए उन्हें देशों और वाटिकन के बीच “भरोसे और सहयोग का एक मूल्यवान सेतु निर्माण करने का आग्रह किया।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि सेवा के उनके कार्य “द्विपक्षीय और बहुराष्ट्रीय मेल-मिलाप के लिए एक नई प्रतिबद्धता उत्पन्न करेगी जिससे हाशिये में रहने वालों को स्थापित करने में मदद मिल सके, “जिससे “एक न्यायपूर्ण, भाईचारे और शांतिपूर्ण दुनिया की नींव हेतु मिलकर कार्य किया जा सके।”

शांति में योगदान
पोप ने नये राजदूतों को वाटिकन सचिवालय और रोमन क्यूरिया, परमधर्मपीठों की ओर से सहयोग दिये जाने का आश्वासन दिया जिससे उन्हें नई ज़िम्मेदारियों के निर्वाहन में मदद मिल सके। उन्होंने कहा, “आपकी प्रेरिताई वार्ता में मज़बूत लाये, आपसी समझ को सुदृढ़ बनाये और हमारी दुनिया में ज़रूरी शांति स्थापना हेतु योगदान दे।”