पोप ने मानसिक रूप से पीड़ित लोगों के लिए प्रार्थना करने का आह्वान किया

अक्टूबर माह की प्रार्थना की प्रेरिताई में पोप लियो 14वें ने विश्वासियों का आह्वान किया है कि वे मानसिक रूप से पीड़ित लोगों के लिए प्रार्थना करें।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में हर सात में से एक व्यक्ति मानसिक रोग से पीड़ित है और कलंक एवं एकाकीपन से जूझ रहा है।

यही कारण है कि पोप लियो 14वें ने अक्टूबर की अपनी प्रार्थना की प्रेरिताई में मानसिक रूप से पीड़ित लोगों की सेवा की प्रेरिताई को समर्पित किया है। पोप अपनी प्रार्थना की प्रेरिताई नेटवर्क के द्वारा विश्वासियों और सद् इच्छा रखनेवाले लोगों को प्रार्थना करने हेतु आमंत्रित करते हैं ताकि कलीसिया एक खुला घर बन सके, जो उन लोगों को बिना न्याय किए और बिना नजरअंदाज किए साथ दे सके जिन्हें अपनी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतें हैं।

संत डिम्फना का कार्ड लिए – जो मानसिक रोगियों, चिंता और अवसाद से जूझ रहे लोगों और मानसिक स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों की भी संरक्षिका हैं – पोप लियो 14वें इस महीने के वीडियो में अपनी प्रार्थना “जीवन के ईश्वर” को संबोधित करके शुरू करते हैं, जो मानव के दिल की गहराइयों और उन “खामोश घावों” को जानते हैं जिन्हें अक्सर कोई नहीं देख पाता। पोप ईश्वर के सामने हमारे उन भाइयों और बहनों को पेश करते हैं जो चिंता, अवसाद या दूसरी मानसिक बीमारियों से अकेले जूझ रहे हैं, यह याद दिलाते हुए कि ईश्वर उन्हें “प्यार से” नाम लेकर बुलाते हैं।

वे उन अवसरों के लिए माफी मांगते हैं जब समुदाय ने “दूसरी तरफ देखा”, जिससे कलंक और भेदभाव को बढ़ावा मिला, और प्रार्थना करते हैं कि कलीसिया एक “खुला घर” बने, एक सुरक्षित जगह जो बिना न्याय किए सुनती है और बिना डरे निकट आती है। यह प्रार्थना उन लोगों के लिए भी है जो उनकी देखभाल करते हैं - डॉक्टर, नर्स, परिवार के सदस्य और स्वयंसेवक – उनके लिए शक्ति और दया की याचना करते हुए, और पवित्र आत्मा का आह्वान करके खत्म होती है ताकि ख्रीस्तीय समुदाय मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल को कलीसिया के जीवन और मिशन में शामिल करना सीख सके, इस तरह ईश्वर की दया के "जीते-जागते संकेत" बन सके।

एक अरब से अधिक लोग प्रभावित
पोप की प्रार्थना का मनोरथ एक ऐसी सच्चाई पर आधारित है जिसे अंतरराष्ट्रीय आंकड़ा से पुष्ट किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार के मेंटल हेल्थ एटलस 2024 के अनुसार, जिसे सितंबर 2025 में पेश किया गया था, दुनियाभर में एक अरब से ज़्यादा लोग मानसिक विकार की बीमारी के साथ जी रहे हैं। इसके बावजूद, मानसिक स्वास्थ्य पर ग्लोबल पब्लिक खर्च, स्वास्थ्य बजट का मुश्किल से 2% है, जो आंकड़ा 2017 से नहीं बदला है। मानसिक स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मचारियों का वैश्विक प्रतिशत हर 100,000 लोगों पर सिर्फ 13 है, और देशों के बीच बहुत ज़्यादा असमानता है: अधिक आय वाले देश इस क्षेत्र में हर व्यक्ति पर सालाना 65 डॉलर खर्च करते हैं, जबकि कम आयवाले देशों में यह सिर्फ कुछ पैसा है।

धर्मप्रांत में स्वास्थ्य देखभाल की प्रेरिताई
पोप के विश्वव्यापी प्रार्थना नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय निदेशक, फादर क्रिस्टोबल फोन्स, एस.जे., इस मनोरथ के अर्थ पर चिंतन करते हैं: “हमारे आस-पास बहुत से लोग मानसिक बीमारी से परेशान रहे या रहते हैं: ऐसे लोग जो कई अवसरों पर इसे बता नहीं पाए, जिन्होंने आलोचना किये गये, गलत समझे गये और आशाहीन महसूस किये। इसीलिए, एक कलीसिया के रूप में, हम इस सच्चाई के लिए अपने दिल खोलने और इस पूरे महीने, उन सभी के लिए और उनके साथ रहनेवालों के लिए भी, प्रार्थना करने हेतु एक साथ आते हैं।”

पोप का विश्वव्यापी प्रार्थना नेटवर्क याद दिलाता है कि कई कलीसियाई संस्थाएँ पहले से ही इस सच्चाई के साथ हैं: मानसिक स्वास्थ्य प्रेरिताई—जैसे कि इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ काथलिक मेंटल हेल्थ मिनिस्टर्स—काथलिक यूनिवर्सिटीज, सपोर्ट और रिकवरी ग्रुप्स, पैरिश और सपोर्ट कम्युनिटीज। एरिज़ोना (अमरीका) में फीनिक्स धर्मप्रांत के बिशप जॉन डोलन ने कहा, “एक ऐसी दुनिया में जहाँ लोग आसानी से भुलाए हुए और नजरअंदाज किए हुए महसूस कर सकते हैं, हमारे पास एक ईश्वर हैं जो सच में हमें देखते और जानते हैं।” दिसंबर 2022 में उन्होंने देश में पहला मानसिक स्वास्थ्य देखभाल प्रेरिताई का अग्रणी धर्मप्रांतीय कार्यालय शुरू किया। जिसने वाटिकन सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा है। उन्होंने समझाया, “काथलिक मानसिक स्वास्थ्य प्रेरिताई का मतलब बीमारी की जाँच या इलाज करना नहीं है। हम मुश्किल रास्ते पर चलनेवालों के साथ चलते हैं और उन्हें ईश्वर की दी हुई गरिमा पाने में मदद करते हैं”। “यह प्रेरिताई का मतलब प्यार करना और साथ देना है।”

“हम यह अकेले नहीं कर सकते”
पोप लियो 14वें ने हाल ही में इस टॉपिक पर सीधे बात की है। 9 जून, 2026 को बार्सिलोना में युवाओं के साथ जागरण प्रार्थना के दौरान, एक युवा महिला ने अवसाद के अपने अनुभव साझा किए थे, जिसके जवाब में पोप ने कहा कि यह जानना जरूरी है कि जो समाज खुद को उत्कृष्ट मानते हैं, उनमें मानसिक स्वास्थ्य का खतरा कैसे बढ़ रहा है, और चेतावनी दी कि यह इस बात का संकेत है कि तरक्की का वह विचार गलत है जो लोगों पर दबाव, उम्मीदें और तनाव डालता है जिससे “बुनियादी संतुलन” बिगड़ जाता है। बाद में, दर्द और बहुत अधिक अकेलेपन पर गौर करते हुए, पोप ने कहा: “हम यह अकेले नहीं कर सकते”।

hindi Survey Popup Image