कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य पर सम्मेलन के प्रतिभागियों से
वाटिकन में शुक्रवार को पोप लियो 14 वें ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य पर आयोजित अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों को सम्बोधित कर आरटीफिशल इन्टेलिज़ेन्स की जटिलताओं को हमारे युग की महान चुनौतियों में गिनाया।
“इन्टेलिजेंट टेक्नोलॉजी के विकास और अनुप्रयोगों पर वाटिकन और वैज्ञानिक जगत के बीच एक संवाद” सम्मेलन, जीवन सम्बन्धी परमधर्मपीठीय अकादमी तथा जीवन का भविष्य नामक अन्तरराष्ट्रीय संस्था द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया है।
चुनौतियाँ
पोप लियो ने आरटीफिशल इन्टेलिज़ेन्स की जटिलताओं और द्रुत गति से इसके विकास पर वैज्ञानिक जगत की चिन्ता को स्वाभाविक निरूपित किया कहा कि इस बैठक का आयोजन करने वाली जीवन सम्बन्धी परमधर्मपीठीय अकादमी उन चुनौतियों से भलीभाँति परिचित है, जो मानवीय गरिमा पर ख़तरा मंडराने से उत्पन्न होती हैं।
उन्होंने स्मरण दिलाया कि इस सन्दर्भ में 2024 में विश्व के सात औद्योगिक राष्ट्र "जी सेवन" के नेताओं को सम्बोधित कर पूर्व पोप फ्राँसिस ने आर्टीफिशल इन्टेलिज़ेन्स को "एक ही समय में रोमांचक और भयावह उपकरण" बताकर इस बात पर ज़ोर दिया था कि "किसी भी मशीन को कभी भी मानव जीवन को छीनने का फैसला नहीं सौंपा जाना चाहिए।" ये कहते हुए कि सन्त पापा फ्राँसिस के वे शब्द आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, सन्त पापा लियो ने याद दिलाया कि 'मानिफिका ह्यूमानितास' (Magnifica Humanitas) नामक विश्व पत्र में उन्होंने स्वयं इन सवालों पर अधिक गहराई से चर्चा का प्रयास किया है।
ज़िम्मेदारी
इस सन्दर्भ में पोप लियो ने पाँच तथ्यों पर विचार करना आवश्यक बताया, सर्वप्रथम उन्होंने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य पहले से तय नहीं है। मानव द्वारा विकसित तकनीकी होने के नाते, इसका भविष्य हमारे द्वारा लिए गए फैसलों पर निर्भर करता है, अस्तु, यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम इसके उपयोग को दिशा दें, उसमें बदलाव लाएं और जरूरत पड़ने पर उसे अस्वीकार भी कर दें।"
मशीनें उपकरण नहीं
द्वितीय, "यह याद रखा जाये कि मशीनें उपकरण हैं, व्यक्ति नहीं।“ तथाकथित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) न तो अनुभव प्राप्त करती है, न ही उसका कोई शरीर होता है; वह न तो खुशी या दर्द महसूस करती है, न ही रिश्तों के माध्यम से परिपक्व होती है, और न ही वह भीतर से जानती है कि प्रेम, काम, मैत्री या जिम्मेदारी का क्या अर्थ है”।" उन्होंने कहा कि आज, कुछ लोग इन प्रणालियों को अधिकार देने या यहाँ तक कि उन्हें कानूनी व्यक्ति का दर्जा देने का प्रस्ताव रखते हैं, जो ख़तरे से खाली नहीं है।
व्यक्ति 'डेटा पॉइंट' नहीं
तृतीय, पोप लियो ने कहा, "कुछ फैसले कभी भी दूसरों को नहीं सौंपे जाने चाहिए। जब किसी व्यक्ति को 'टारगेट लिस्ट' या निशाने पर लगाया जाता या 'बॉर्डर कंट्रोल डेटाबेस' में दर्ज किया जाता है, तो इस बात का खतरा होता है कि वह व्यक्ति केवल एक 'डेटा पॉइंट' बनकर रह जाए।" उन्होंने कहा कि मानव जीवन, स्वतंत्रता और बल प्रयोग से जुड़े निर्णय सदैव मनुष्यों की प्रभावी, जानकारीपूर्ण और ज़िम्मेदार निगरानी के दायरे में ही रहने चाहिए।
जनकल्याण के लिये
चौथा तथ्य ध्यान में रखने योग्य यह कि बुद्धिमान तकनीकों का उपयोग सदैव जन-कल्याण के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि "न्याय की मांग है कि नवाचार से मिलने वाले लाभों—जैसे देखभाल, ज्ञान, साधन और अवसर तक सभी की पहुँच हो। वास्तव में, ये तकनीकें कभी भी अपने आप में साध्य नहीं बननी चाहिए, और न ही इनका उपयोग केवल कुछ विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के हितों को साधने के लिए किया जाना चाहिए।"
नैतिक सिद्धन्तों को बरकरार रखा जाये
पाँचवी बात, पोप लियो ने कहा कि चुनौतियों पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हम पहले से ही उन कई नैतिक सिद्धांतों को जानते हैं, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास का मार्गदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल हमें ऐसी संस्थाओं की आवश्यकता है जो इन सिद्धांतों को व्यवहार में ला सकें; विशेष रूप से ऐसी प्रभावी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं, जो वैश्विक भलाई की रक्षा कर सकें (देखें: संख्या 64)। इसके लिए ज़रूरत है साझा मानकों, स्वतंत्र निगरानी और जवाबदेही की ताकि AI के विकास और उपयोग से जुड़े फैसलों की जांच की जा सके, जरूरत पड़ने पर उन पर सवाल उठाए जा सकें, और यदि कोई नुकसान होता है, तो उसके लिए उचित उपाय किए जा सकें (देखें: संख्या 105, 107)।
अन्त में पोप लियो ने वैज्ञानिकों को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया तथा उन्हें अपने प्रयासों को जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि वे सर्व जनकल्याण हेतु आपसी बातचीत और साझा ज़िम्मेदारी की भावना में मिलकर काम कर सकें।
