पारंपरिक हथियारों का इस्तेमाल ख़तरनाक, महाधर्माध्यक्ष एल- कासिस

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की प्रथम समिति में पारंपरिक हथियारों पर गुरुवार, 22 अक्टूबर को विषयगत चर्चा के दौरान परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष क्रिस्टफी एल-कसीस ने पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल को ख़तरनाक बताते हुए कहा कि इससे आपसी विश्वास को क्षति पहुंचाती है।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि पारंपरिक हथियारों का प्रसार और उनका इस्तेमाल संघर्षों को प्रश्रय देने  और हिंसा को बनाए रखने का काम करता है। इससे आपसी भरोसा कम होता है, जिससे एक न्यायपूर्ण और स्थायी शांति पाने की कोशिशों को नुकसान पहुँचता है।

चिन्ता का विषय
उन्होंने कहा कि उतनी ही चिंताजनक बात वैश्विक सैन्य खर्च में लगातार हो रही भारी बढ़ोतरी है, जो 2025 में लगभग 2.9 खरब अमरिकी डॉलर तक पहुँच गई है। उन्होंने कहा कि हथियारों पर खर्च किए जा रहे ये विशाल संसाधन, मानवीय सहायता और विकास की तत्काल आवश्यकता के बिल्कुल विपरीत हैं—खासकर तब, जब लाखों लोग आज भी गरीबी में जी रहे हैं और उन्हें बुनियादी सुविधाएँ तक नहीं मिल पा रही हैं।

महाधर्माध्यक्ष एल-कसीस ने कहा कि परमधर्मपीठ बारूदी सुरंगों और गुच्छेदार बमों से संबंधित संधियों से देशों के बाहर निकलने को लेकर भी बेहद चिंतित है, क्योंकि इससे मानवीय निरस्त्रीकरण के क्षेत्र में दशकों से हुई प्रगति खतरे में पड़ गई है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत आवश्यक है कि इन दोनों संधियों की अखंडता बनी रहे और वैश्विक स्तर पर इन्हें बढ़ावा दिया जाए।

इस संदर्भ में, महाधर्माध्यक्ष एल-कसीस ने कहा कि यह दोहराना बहुत महत्वपूर्ण है कि पीड़ितों, उनके परिवारों और प्रभावित समुदायों को हर तरह की सहायता दी जाये ताकि उनकी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक जरूरतों को पूरा किया जा सके। इस बात पर उन्होंने बल दिया कि युद्ध की स्थितियों में सभी प्रणालियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्णय लेने की प्रक्रियाओं का पुनरावलोकन किया जाये ताकि उन्हें फिर से तैयार किया जा सके।

विनाशकारी परिणाम
महाधर्माध्यक्ष ने इस बात की ओर भी ध्यान आकर्षित कराया कि आबादी वाले इलाकों में विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल से होने वाले विनाशकारी मानवीय परिणाम परमधर्मपीठ और वाटिकन के लिये बेहद चिन्ता का विषय हैं। आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे की व्यापक तबाही और प्रभावित समुदायों द्वारा लंबे समय तक झेली जानेवाली पीड़ा इस बात को रेखांकित करती है कि 'आबादी वाले इलाकों में विस्फोटक हथियारों' पर बनी राजनीतिक घोषणा को सार्वभौमिक बनाया जाए और इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

महाधर्माध्यक्ष एल-कसीसी ने कहा कि छोटे हथियारों और हल्के हथियारों का अवैध व्यापार हिंसा को बढ़ावा देता है और विकास में बाधा डालता है। विगत जून माह में आयोजित देशों की नौवीं द्विवार्षिक बैठक में हुए कार्यों के बाद, अब इस बात की आवश्यकता है कि 'छोटे और हल्के हथियारों के अवैध व्यापार को रोकने, उससे निपटने और उसे पूरी तरह खत्म करने हेतु निर्धारित  कार्यक्रम' तथा अंतर्राष्ट्रीय अनुरेखण उपकरण के कार्यान्वयन को और अधिक मज़बूत किया जाए।

संसाधनों का सही उपयोग
महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि हथियारों पर खर्च किए जाने वाले संसाधनों का इस्तेमाल गरीबी में जीवन यापन कर रहे लोगों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने तथा सर्वांगीण मानवीय विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है। इन संसाधनों को ऐसी प्राथमिकताओं की ओर लगाने से एक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण तथा स्थायी शांति कायम करने में सार्थक योगदान मिलेगा।

hindi Survey Popup Image