कार्डिनल ने कलीसिया की पहली राष्ट्रीय बैठक में ज़्यादा एकता और सहयोग का आह्वान किया
देश भर के ईसाई नेता 18 सितंबर को बेंगलुरु में 'नेशनल फेडरेशन ऑफ़ चर्चेज़ इन इंडिया' (NFCI) की पहली बैठक के लिए इकट्ठा हुए। इस दौरान कार्डिनल एंथनी पूला ने बढ़ती चुनौतियों के बीच देश के चर्चों के बीच ज़्यादा एकता और सहयोग की अपील की।
बेंगलुरु में सेंट जॉन्स नेशनल एकेडमी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज में हुई इस बैठक में लगभग 45 आर्कबिशप, बिशप, कलीसिया प्रमुख और अलग-अलग ईसाई समुदायों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यह बैठक पांचवीं 'नेशनल इकोमेनिकल बिशप्स फेलोशिप' (NEBF) बैठक के साथ-साथ आयोजित की गई थी।
इस सभा की शुरुआत ईसाइयों की एकता के लिए एक साझा प्रार्थना सभा के साथ हुई। हैदराबाद के आर्कबिशप, 'कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ़ इंडिया' के अध्यक्ष और NFCI के चेयरमैन कार्डिनल पूला ने स्वागत और उद्घाटन भाषण दिया।
उन्होंने कहा कि भारत में चर्चों के सामने आ रही मुश्किलों के कारण उनके लिए एकजुट होकर जवाब देना और भी ज़रूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि NFCI बिशप और चर्चों व ईसाई समुदायों के प्रमुखों को एक साथ लाता है, जिसमें दूसरे काउंसिल और सिनॉड से जुड़े लोग भी शामिल हैं।
इस फेडरेशन की शुरुआत पिछली NEBF बैठक के दौरान 8 मई को बेंगलुरु में की गई थी, ताकि भारत में ईसाई चर्चों के बीच बेहतर सहयोग के लिए एक मंच मिल सके।
'गुड शेफर्ड चर्च इन इंडिया' और 'ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल' के अध्यक्ष और NFCI के संयोजक आर्कबिशप जोसेफ डिसूज़ा ने भारत के 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट' (FCRA) में प्रस्तावित बदलावों पर संभावित प्रतिक्रियाओं के बारे में बताया।
उन्होंने सुझाव दिया कि चर्च अपनी चिंताओं को लेकर एक ज्ञापन सौंपें और प्रस्तावित कानून की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति से बैठक करने की मांग करें।
इस खुली चर्चा में भारत में ईसाइयों पर असर डालने वाले दूसरे मुद्दों पर भी बात हुई। 'ऑल कर्नाटक यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम फॉर ह्यूमन राइट्स' के चेयरमैन आर्कबिशप पीटर मचाडो ने कर्नाटक के धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून को लेकर राजनीतिक नेताओं से बातचीत की कोशिशों के बारे में बताया। साथ ही, उन्होंने ईसाइयों, चर्चों और ईसाई संस्थानों के खिलाफ हिंसा से जुड़े सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के बारे में भी जानकारी दी।
'कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ़ इंडिया' के 'ऑफिस फॉर डायलॉग एंड डेस्क फॉर इकोमेनिसम' के सचिव और NEBF समन्वयक फादर एंथनीराज थुम्मा ने दलित ईसाइयों के संवैधानिक अधिकारों और समान दर्जे के लंबे समय से लंबित मुद्दे और इस मामले की जांच कर रहे जस्टिस के.जी. बालकृष्णन आयोग के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी। ब्रदर डॉ. पॉल दिनाकरन ने अपने संदेश में युवाओं की भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने मौजूदा समय को "युवाओं का दिन" बताया और सामाजिक बदलाव में उनके योगदान के लिए ज़्यादा मौके देने की बात कही।
बैठक में NFCI के लिए मंज़ूर किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार एक कोर ग्रुप भी बनाया गया। यह ग्रुप मौजूदा मुद्दों पर प्रतिक्रिया देने के लिए नियमित रूप से बैठक करेगा और इसे अतिरिक्त सदस्यों को शामिल करने तथा कोऑर्डिनेटर और एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी नियुक्त करने का अधिकार दिया गया।
CBCI के 'डायलॉग और इकोमेनिज्म डेस्क' के चेयरमैन और NFCI के कन्वीनर मार जोसेफ कलारंगट ने कहा कि यह फ़ेडरेशन पूरी तरह से ईसाई एकता (कम्युनियन) के लक्ष्य की दिशा में एक कदम है।
बैठक का समापन कार्डिनल पूला की प्रार्थना और आशीर्वाद के साथ हुआ, जिसके बाद एक ग्रुप फ़ोटो ली गई।
