एशिया के धर्माध्यक्षों ने सिनॉडल मन-परिवर्तन के माध्यम से पुल निर्माण हेतु आमंत्रित किया

एशिया के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संघ (एफएबीसी) ने अपनी 12वीं महासभा को एशिया के लोगों के लिए अपने अंतिम संदेश जारी करते हुए समाप्त किया। संघ ने पूरे महादेश की कलीसिया से कहा कि वह विभाजन, भेदभाव और तेजी से बदलते समाज में "पुल और पुल निर्माता" बनकर अपनी सिनॉडल यात्रा को और सशक्त करें। 

जकार्ता के माता मरियम के स्वर्गारोहन महागिरजाघर में महासभा समापन के लिए अर्पित मिस्सा बलिदान में “तुम इससे भी महान चीज देखोगे" (यो. 1:50) विषयवस्तु पर एक संदेश सुनाया गया। संदेश को महाधर्माध्यक्ष  गिल्बर्ट आर्मेया गार्सेरा ने पढ़ा, जिसपर महासभा में हिस्सा लेनेवालों की ओर से गोवा और दमन के महाधर्माध्यक्ष और एफएबीसी के अध्यक्ष कार्डिनल फिलिप नेरी फेराओ ने हस्ताक्षर किये हैं।

"एशिया के सभी भले लोगों" को संबोधित यह संदेश, "सिनॉडल एकता और एशिया में पुल और पुल निर्माता बनने के मिशन" विषयवस्तु के तहत हुई एक हफ्ते तक चलनेवाली महासभा के आध्यात्मिक फलों को दर्शाता है। पूरे एशिया के धर्माध्यक्ष, प्रतिनिधि और साझेदार तेजी से बदलती दुनिया में कलीसिया के मिशन को समझने के लिए एकत्रित हुए थे।

येसु के नथानएल से कहे शब्दों, "तुम और भी महान चीज़ें देखोगे" (यो. 1:50) से प्रेरित होकर, धर्माध्यक्ष ने कहा कि महासभा ने हिस्सा लेनेवालों को डर और सीमाओं से आगे बढ़कर ईश्वर के राज के एक नए नजरिए की ओर बढ़ने के लिए आमंत्रित किया।

संदेश में इस बात पर जोर दिया गया कि सिनॉडालिटी सिर्फ राज करने का एक तरीका नहीं है, बल्कि "मिशन की ओर ले जाने वाला बदलाव का रास्ता है।" यह इस बात पर जोर देता है कि असली बदलाव, कलीसिया की संरचना और संस्थान में दिखने से पहले, परिवर्तित दिलों, गहरे रिश्तों और ध्यान से सुनने से शुरू होता है।

प्रार्थना, शांति, सुनने और आत्मा में बातचीत के दिनों पर चिंतन करते हुए, धर्माध्यक्षों ने यह पक्का यकीन जताया कि एशिया में कलीसिया को लगातार सिनोडल बदलाव के ज़रिए महाद्वीप की समृद्ध सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक विविधता को अपनाकर पुल बनाने के लिए बुलाया गया है।

महासभा ने एशिया के सामने मौजूद कई चुनौतियों को भी स्वीकार किया, जिनमें ध्रवीकरण, पलायन, पारिस्थितिक पतन, बढ़ती आर्थिक असमानता, कमजोर होते लोकतंत्र और तकनीकी का तेजी से विकास शामिल हैं। इसके जवाब में, धर्माध्यक्षों ने कलीसिया से उम्मीद, बातचीत, मेल-मिलाप और एकजुटता की निशानी बनने की अपील की, और पूरे महादेश में एकता को बढ़ावा देकर और सबकी भलाई के लिए काम करके मसीह की गवाही देने का प्रोत्साहन दिया।

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