हिंसा को पीछे छोड़ने की अपील के साथ दक्षिणी सूडान में कार्डिनल चरणी की यात्रा समाप्त

दक्षिण सूडान की सप्ताहभर की यात्रा के आखिरी दिन, कार्डिनल माईकेल चरणी ने मानव तस्करी पीड़ितों की संरक्षिका संत जोसेफिन बखिता के नाम पर एक नाव को आशीष दी।

यह सिर्फ एक नाव नहीं बल्कि एक प्रतीक है। घृणा, हिंसा, बदले और प्रतिशोध की भावना को त्यागते हुए अधिक शांत जल में एक नये जीवन का प्रतीक। दक्षिण सूडान में अपने अंतिम दिन, समग्र मानव विकास को बढ़ावा देने के लिए गठित परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल माइकेल चरणी ने एक नाव को आशीष दी जो नील नदी पार करने के लिए मजबूर आप्रवासियों की सेवा करेगी। इसका नाम दारफुर के संत के नाम पर जोसेफिन बखिता रखा गया है, जो कभी गुलाम थी और पुरानी एवं नई गुलामी के सभी पीड़ितों की संरक्षिका के रूप में पूजनीया हैं। स्थानीय कारितास दल, सूडान से शरणार्थियों को लाने-ले जाने के लिए लकड़ी और लोहे की इस नाव का प्रयोग करेगा। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, देश दस महीने के संघर्ष से तबाह हो गया है, जिससे भारी पैमाने पर मानवीय आपातकाल लग गया है, जिसमें 25 मिलियन लोगों को सहायता और सुरक्षा की आवश्यकता है।

कार्डिनल चरणी ने जुबा बंदरगाह में समारोह के दौरान कहा, “नाव देश से भाग रहे लोगों को उस विशाल नदी को पार करने में मदद करेगी जहां खतरे और बाधाएं व्याप्त हैं। यह रेंक सीमा से मलाकल तक रवाना होगी। "यह संघर्ष, हिंसा, घृणा और प्रतिशोध के तूफान को पीछे छोड़नेवाली नाव होगी, और अधिक शांत जल पर चलेगी जहाँ लोग भाइयों और बहनों के रूप में एक साथ रह सकते हैं।"

ख्रीस्तीय एकता "तीर्थयात्रा" के एक साल बाद,  जिसे पोप ने एंग्लिकन धर्माध्यक्ष जस्टिन वेल्बी और स्कॉटलैंड की कलीसिया के महासभा के मॉडरेटर इयान ग्रीनशील्ड्स के साथ मिलकर किया था। शांति के लिए पोप की अपील को दोहराने हेतु 2 फरवरी को शुरू हुई यात्रा में कार्डिनल चरणी का यह आखिरी कार्यक्रम था।

कार्डिनल ने कई जगहों पर यात्रा की। उन्होंने मलाकल में मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस के अवसर पर ख्रीस्तयाग अर्पित किया, जिसके दौरान कार्डिनल ने झूठे "देवताओं" या "मूर्तियों" की निंदा की, जैसे कि धन और शक्ति का लालच, नियंत्रण और प्रभुत्व की भूख, राष्ट्रवाद से उत्पन्न बहिष्कार, जनजातीयवाद, और सभी तरह की बुराइयाँ जो अभी भी दूसरों के जीवन को नष्ट कर रही हैं और जिसने दक्षिण सूडान को भी "बर्बाद" कर दिया है।

मलाकल में, कार्डिनल चरणी ने सीमित स्थानीय संसाधनों के बावजूद, धर्मप्रांत और स्थानीय समुदाय द्वारा किए गए स्वागत को देखा एवं उसकी प्रशांसा की। रेन्क में, कार्डिनल ने सूडानी शरणार्थियों के लिए स्वागत केंद्र का दौरा किया। राजधानी जुबा में, जहां उन्होंने पिछले रविवार को संत तेरेसा महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग का अनुष्ठान किया, पोप के पदचिन्हों पर इस तीर्थयात्रा को अपनी मूहर लगाना चाहते थे, जो आपातकाल, और त्रासदी के लिए, कलीसिया के ध्यान का संकेत है।

कार्डिनल ने कहा, जोसेफिन बखिता नामक नाव "कलीसिया का काम करेगी, यह जो अच्छा काम करेगी उसके लिए हम आभारी हैं। हम ईश्वर की आशीष के लिए भी आभारी हैं ताकि यह नाव हमेशा उस उद्देश्य को पूरा कर सके जिसके लिए यह निर्मित और पुनर्निर्मित है और वास्तव में ईश्वर के प्रेम का प्रतीक है, येसु की उपस्थिति का चिन्ह, उनकी चंगाईपूर्ण उपस्थिति, हमारे बीच येसु हैं, जो हमें परेशान करनेवाले सभी तूफानों को शांत करते हैं।"