देवदूत प्रार्थना में पोप : आपसी प्रेम एक ऋृण है जो हमें गुलाम नहीं बनाता

रविवार को देवदूत प्रार्थना के दौरान पोप लियो 14वें ने येसु के उन दो रास्तों पर चिंतन किया, जो ख्रीस्तीयों को आपसी प्रेम में जीने के लिए आमंत्रित करता है, पहला, भ्रातृत्वपूर्ण सुधार और दूसरा, एक-दूसरे को भाई और बहन की तरह प्यार करना।

वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 6 सितम्बर को पोप लियो 14वें ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने दिन के सुसमाचार पाठ पर चिंतन किया।

पोप ने कहा, “ईश वचन जिसको इस रविवार की धर्मविधि में घोषित किया गया, हमें सोचने और कार्य करने के लिए कुछ मौलिक मानदंड प्रदान करता है। रोमियों के नाम पत्र में हम पढ़ते हैं कि सभी आज्ञाओं का सार इन शब्दों में है: “अपने पड़ोसी को अपने समान प्यार करो।” (रोम. 13:9)

पोप ने कहा, “संत पौलुस एक प्रभावशाली छवि के द्वारा इस बिन्दु पर जोर देते हैं, जो प्रभु की प्रार्थना में भी दिखाई देता है। वे लिखते हैं, “भातृप्रेम का ऋण छोड़कर और किसी बात में किसी के ऋणी न बनें।” (8)

येसु ने हमें माफ मांगना और माफ देना ​​सिखाया है। फिर भी, एक ऐसा ऋण है जो हम एक-दूसरे के प्रति निभाते हैं, जो हमें गुलाम नहीं बनाता: वह है आपसी प्रेम का ऋण। हमें जो भी ध्यान, देखभाल और अच्छाई मिली है, वह हमें अधिक स्वतंत्र और जिम्मेदारी उठाने के काबिल बनाती है।

प्यार करने के दो रास्ते
इस रविवार के सुसमाचार पाठ में, येसु हर ख्रीस्तीय समुदाय को प्रेम करने के दो तरीके बताते हैं। पहला, भाईचारे के साथ सुधार करने के काबिल बनना। संत पापा ने कहा कि यह एक नाजुक कला है, जिसे अक्सर भुला दिया जाता है, जिसके लिए स्पष्टता और धीरे-धीरे आगे बढ़ने की जरूरत होती है। एक-दूसरे से ईमानदारी से बात करना होता है, पहले आमने-सामने, फिर, अगर जरूरी हो, तो दो या तीन और लोगों के साथ, तथा अगर जरूरत हो, तो अंत में पूरे समुदाय के साथ; इसका मतलब है सच्चाई का सामना करना और समस्याओं एवं झगड़ों को आगे बढ़ने के अवसर में बदलना।

पोप ने कहा, “शिकायत करना और दूसरों की बुराई करना आसान है, लेकिन उनसे कुछ हासिल नहीं होता और कई हालात बेकार हो जाते हैं। इसके बजाय, सुसमाचार हमें वह स्वतंत्रता सिखाता है जो दया से मिलती है।”

प्रेम के दूसरे रास्ते पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने कहा, "भाई-बहनों की तरह एक-दूसरे से प्यार करने का एक दूसरा तरीका भी है, जिसके कारण येसु हमारी प्रार्थना को भी बदल देते हैं: एक समझौते पर पहुँचना। यह सिर्फ तब नहीं जब कोई झगड़ा हो, बल्कि तब भी जब ईश्वर से कोई वरदान माँग रहे हों। प्रभु कहते हैं: “यदि पृथ्वी पर तुम लोगों में दो व्यक्ति एकमत हो कर कुछ भी माँगेगे, तो वह तुम्हें मेरे स्वर्गिक पिता की ओर से निश्चय ही मिलेगा।”(मती. 18:19)।

प्रार्थना की शक्ति     
यह प्रतिज्ञा हमें सुझाव देती है कि हमारी इच्छाएँ, दुःख और उम्मीदें एक जैसी हो सकती हैं, और प्रार्थना से हम एकता में बढ़ सकते हैं। विश्वास के बिना, हर कोई अकेला महसूस कर सकता है और दूसरों पर शक करने लग सकता है, उन्हें अजनबी और दुश्मन समझ सकता है। लेकिन, कृपा से, हम भाई-बहन हैं जो मिलजुलकर रह सकते हैं: एक-दूसरे से मिल सकते हैं, एक-दूसरे को माफ कर सकते हैं और प्रभु में एक-दूसरे की सुन सकते हैं।

तब माता मरियम से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए पोप ने कहा, “आइये हम माता मरियम से प्रार्थना करें, जो दूत संवाद पाकर, शीघ्रता से अपनी कुटुम्बनी एलिजाबेथ के पास चली गयी कि उन्हें गर्भ धारण करने की खुशी एवं कठिनाई साझा कर सकें, हमें भी भ्रातृ प्रेम के साथ आनन्दमय ऋण चुकाना सिखा।

इतना कहने के बाद पोप ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

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