कैथोलिक पूरोहित गिरफ्तार, लड़कों के यौन शोषण का आरोप

कर्नाटक में पुलिस ने एक कैथोलिक पूरोहित को नाबालिग लड़कों के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया है। जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर पांच पीड़ितों की पहचान की है।

'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' अखबार ने पुलिस कमिश्नर सुधीर कुमार रेड्डी के हवाले से बताया कि पुलिस ने 18 अक्टूबर को मैंगलुरु में एक रिश्तेदार के घर से फादर सिप्रियन पिंटो को गिरफ्तार किया। वे वैलेंसिया स्थित सेंट विंसेंट फेरर चर्च के पल्ली पूरोहित हैं।

19 अक्टूबर को जब मैंगलोर के बिशप पीटर पॉल सल्दान्हा से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि वे इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है।

कैथोलिक सभा मैंगलुरु के अध्यक्ष संतोष डिसूजा ने कहा कि अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, क्योंकि जांच अभी चल रही है।

उन्होंने 19 अक्टूबर को कहा, "हमें देश के कानून पर पूरा भरोसा है; आइए सच सामने आने का इंतजार करें।"

खबरों के अनुसार, पुलिस ने पिंटो के खिलाफ भारत के सख्त कानून - 'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस' (POCSO) एक्ट - और दंड संहिता (क्रिमिनल कोड) के तहत मामला दर्ज किया है।

औपचारिक शिकायत के अनुसार, प्रार्थना के लिए नियमित रूप से चर्च जाने वाले एक नाबालिग लड़के ने आरोप लगाया कि पिंटो ने उसे एक कमरे में बुलाया, चॉकलेट दी और फिर उसके साथ अनुचित शारीरिक हरकतें कीं।

ऐसी ही एक कथित घटना 14 अगस्त को हुई थी, जिसके बाद लड़के ने अपने दोस्तों को इस बारे में बताया। कुछ अन्य लड़कों ने भी दावा किया है कि उनके साथ भी पादरी ने ऐसा ही बर्ताव किया था।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि जांचकर्ताओं को पांच पीड़ितों के बारे में पता चला है और वे मामले की जांच कर रहे हैं।

यह मामला तब सामने आया जब बच्चों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले समूह 'ओडनाडी' ने शिकायतकर्ता परिवार की ओर से हस्तक्षेप किया और मैंगलुरु पुलिस कमिश्नर को इस बारे में सूचित किया।

'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, मामला दर्ज होने के बाद पिंटो छिप गए थे, लेकिन बाद में पुलिस ने उन्हें उनके एक रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने बताया कि पूछताछ और जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। अखबार ने दावा किया कि पिंटो को अगस्त के आखिर में प्रशासनिक छुट्टी (एडमिनिस्ट्रेटिव लीव) पर भेज दिया गया था और शुरू में इस मामले को कथित तौर पर आंतरिक स्तर पर ही सुलझाने की कोशिश की गई थी।

यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि चर्च के अधिकारियों को इन आरोपों के बारे में कब पता चला, क्या उन्होंने पुलिस को सूचित किया, और बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए।

इस मामले ने धार्मिक संस्थानों में सुरक्षा प्रक्रियाओं और चर्च के अधिकारियों की उस जिम्मेदारी पर फिर से ध्यान खींचा है, जिसके तहत बच्चों से जुड़े आरोपों की सूचना संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए।

भारतीय कानून के तहत, यौन हिंसा का शिकार हुए बच्चों की पहचान गुप्त रखी जानी चाहिए।

मंगलुरु के एक कैथोलिक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि ये आरोप एक पादरी से जुड़े हैं, और इन्हें पूरे कैथोलिक समुदाय की गलती का सबूत नहीं माना जाना चाहिए।

2011 की राष्ट्रीय जनगणना (जो कि उपलब्ध सबसे हालिया डेटा है) के अनुसार, कर्नाटक की आबादी 6.1 करोड़ है, जिसमें 84 प्रतिशत हिंदू, 13 प्रतिशत मुस्लिम और लगभग 2 प्रतिशत (यानी 11 लाख) ईसाई हैं।

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