कुछ नया करें, शांति निर्माता बनें: पोप 

मैडरिड में आलमुदेना की मरियम को समर्पित महागिरजाघर में पोप लियो 14 वें ने ख्रीस्तानुयायियों से विभाजनकारी दीवारों को गिराने और मेल-मिलाप, मैत्री, सद्भाव और शांति निर्माण में योगदान की अपील की।

स्पेन की अपनी प्रेरितिक यात्रा के तीसरे दिन मैडरिड में आलमुदेना की मरियम को समर्पित महागिरजाघर में सोमवार सन्ध्या एक प्रार्थना सभा के दौरान पोप लियो 14 वें ने ख्रीस्तानुयायियों से विभाजनकारी दीवारों को गिराने और मेल-मिलाप, मैत्री, सद्भाव और शांति निर्माण में योगदान की अपील की।

दीवारों को गिरायें
मैडरिड महाधर्मप्रान्त की संरक्षिका आलमुदेना की मरियम के आगे नतमस्तक होकर पोप ने  महागिरजाघर में प्रार्थना की तथा उस दीवार पर विचार किया जो ढह गई थी और जिससे पवित्र कुँवारी मरियम की प्रतिमा निकली थी। पवित्र कुँवारी की ओर दृष्टि अभिमुख करने के लिये सन्त पापा ने सबको आमंत्रित किया तथा उनसे आग्रह किया कि वे अपने विश्वास की गवाही में कभी कमज़ोर न पड़ें।

महागिरजाघर में स्थित आलमुदेना की मरियम प्रतिमा की भक्ति सदियों से चली आ रही है और स्पेन की राजधानी के इतिहास और आध्यात्मिक जीवन से गहराई से जुड़ी हुई है।

ध्वस्त दीवार से शिक्षा
महागिरजाघर में एकत्र श्रद्धालुओं से सन्त पापा ने कहा कि माँ और उनके लोगों का मिलना इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि एक दीवार गिर गई थी। इस घटना को ईश्वरीय चमत्कार माना जाता है क्योंकि यह उस रास्ते की ओर इशारा करता है जिसे प्रभु ख्रीस्त अपनी माँ के माध्यम से आज भी विश्वासियों को दिखाते हैं।  

पोप ने कहा कि यह स्वाभाविक है कि दीवार गिरने से शुरू में अस्त-व्यस्तता और गड़बड़ी उत्पन्न हो सकती है, लेकिन यह नई संभावनाएं भी खोल सकती है और नए सिरे से शुरुआत के लिए हालात बना सकती है।

वर्तमान समाज पर चिन्तन करते हुए पोप ने कहा कि यहाँ कई दीवारें अभी भी मौजूद हैं जो सुरक्षा नहीं देती, बल्कि "बांटती हैं,  अलग करती हैं और अकेला करती हैं"। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग ऐसी रुकावटों को बनाए रखना पसंद करते हैं या बस उन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं क्योंकि उन्हें उन परिस्थितियों का सामना करने से डर लगता है जिनसे वे बचना चाहते हैं।

कुछ नया बनायें
पोप ने कहा कि आलमुदेना की माँ मरियम का सन्देश है कि "कुछ नया, सुंदर और स्थायी  बनाने के लिए, हमें दीवारें तोड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए" क्योंकि ऐसा करने से मौजूदा मुश्किलों से आगे देखने और एक साथ आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी जगह बनती है। उन्होंने ख्रीस्तीयों को प्रोत्साहन दिया कि वे अपने विश्वास को सुदृढ़ करें, उदारतापूर्वक अपने विश्वास की गवाही दें तथा "शांति और पुनर्मिलन के निर्माता" बनें।