एआई ‘क्रिएटिविटी का विस्फोट, लेकिन रोकथाम की ज़रूरत
वाटिकन में गुरुवार को एक सम्मेलन सम्पन्न हुआ जिसमें यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि टेक्नोलॉजी कला, संस्कृति और मानवीय मस्तिष्क को कैसे बदल रही है।
वाटिकन में गुरुवार को एक सम्मेलन सम्पन्न हुआ जिसमें यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि टेक्नोलॉजी कला, संस्कृति और मानवीय मस्तिष्क को कैसे बदल रही है। इस बात पर चिन्तन किया गया कि एआई यानि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से मानवता को मिलने वाले रचनात्मक उठाव को बुद्धिगम्य करने के लिये समझदारी की ज़रूरत है।
भरोसेमंद ब्रेक की ज़रूरत
दार्शनिक, टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योर और इंटरनेशनल सेंटर फॉर कॉन्शसनेस स्टडीज (ICCS) के संस्थापक दिमित्री वोल्कोव कहते हैं, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक कार की तरह है: यह बहुत ज़्यादा तेज़ी से गाड़ी चलाने में मदद करती है, लेकिन जब हम एक अच्छी कार, खासकर रेसिंग कार बनाते हैं, तो “हमें उसे दीवारों से टकराने से बचाने के लिए बहुत प्रभावशाली और भरोसेमंद ब्रेक बनाने पर पूरा ध्यान देना चाहिए।"
रचनात्मकताः मस्तिष्क और मशीनें शीर्षक से ICCS का सम्मेलन मंगलवार को रोमा त्रे विश्वविद्याल में शुरु हुआ था जो बाद में वाटिकन के कसिना पियो चौथे भवन में जारी रहा तथा गुरुवार को समाप्त हो गया।
इस सम्मेलन में दार्शनिकों, न्यूरोसाइंटिस्ट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जानी-मानी अन्तरराष्ट्रीय हस्तियाँ इस बात पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए कि क्या एआई सच में क्रिएटिव हो सकता है।
एआई और रचनात्मकता
दिमित्री वोल्कोव के मुताबिक अभी के लिए एक बात सुनिश्चित है: एआई मनुष्यों को अधिक रचनात्मक बनने में मदद कर सकता है। वे कहते हैं, "मुझे लगता है कि यह मानवीय रचनात्मकता को बढ़ावा देगा।" हालांकि, इसमें कई ऐसी चीज़ें हैं जिनके बारे में हमें पता होना चाहिए, इसलिए, होश में रहने और उन "ब्रेक" को विकसित करने की ज़रूरत है जिनके बिना दुर्घटना तय है।"
सही सम्बन्ध
ICCS के सह-संस्थापक और दार्शनिक पिएत्रो परकोन्ती का मानना था कि "आर्टिफ़िशियल क्रिएटिविटी की बात करना गलत नहीं है।" उन्होंने कहा कि वाटिकन में सम्पन्न सम्मेलन में इस बात को समझने का प्रयास किया गया कि क्या मनुष्यों और कृत्रिम साथियों के बीच रिश्तों की कल्पना करना सम्भव है – मैत्री, सहायता से जुड़े सम्बन्ध और प्रेमपूर्ण रिश्ते सम्भव हैं।"
मानिफिका ऊमानितास
उन्होंने बताया कि विचार-विमर्श के दौरान सन्त पापा लियो के विश्व पत्र मानिफिका ऊमानितास के सन्देश पर ध्यान दिया गया जिसमें कहा गया है कि सबकुछ का केन्द्र लोगों को बनाया जाये, यह केवल धार्मिक आवश्यकता ही नहीं है; यह एक मानवीय आवश्यकता है।"
