उत्तरी भारत के नौ धर्मप्रांतों (dioceses) के कलीसिया के नेता 'इकुमेनिज्म' (अलग-अलग ईसाई समुदायों के बीच एकता) और बातचीत पर एक सेमिनार के लिए इकट्ठा हुए। इस सेमिनार का मकसद दूसरे धर्मों के लोगों के साथ संबंध मज़बूत करना और क्षेत्रीय व धर्मप्रांत स्तर पर ईसाई एकता को बढ़ावा देने के व्यावहारिक तरीकों पर ध्यान देना था।