स्वर्गीय धर्माध्यक्ष देवप्रसाद गनावा का अंतिम संस्कार सम्पन्न

उदयपुर के धर्माध्यक्ष, स्वर्गीय देवप्रसाद गनावा, एसवीडी का अंतिम संस्कार 7 अक्टूबर 2026 को पूर्वाहन 10.00 बजे उदयपुर के फातिमा की माता मरियम महागिरजाघर में सम्पन्न हुआ। उनका निधन रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को 74 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से हो गया था।

धर्माध्यक्ष, स्वर्गीय देवप्रसाद गनावा ने रविवार को पूर्वाहन 11.45 बजे उदयपुर के संत तेरेसा हॉस्पिटल में आखिरी सांस ली। धर्माध्यक्ष गनावा को सुबह उदयपुर के बिशप हाउस में बेचैनी और सीने में दर्द महसूस हुआ था। उन्हें तुरंत मेडिकल मदद के लिए संत तेरेसा हॉस्पिटल ले जाया गया। मेडिकल टीम की कोशिशों के बावजूद, पूर्वाहन 11.45 बजे उनका निधन हो गया।

बिशप गनावा ने 2009 से 2012 तक झाबुआ के धर्माध्यक्ष के रूप में और 2012 से 2026 में अपनी मृत्यु तक उदयपुर के बिशप के रूप में काम किया।

शुरुआती जीवन और प्रशिक्षण
धर्माध्यक्ष देवप्रसाद गनावा का जन्म 8 दिसंबर 1951 को मध्य प्रदेश के झाबुआ धर्मप्रांत के पंचकुई पल्ली में हुआ था। उन्होंने 1965 में महू के संत थॉमस सेमिनरी में प्रवेश किया और 1974 में मध्य प्रदेश के खुर्दा स्थित काथलिक आश्रम में अपना प्रथम व्रतधारण किया।

उन्होंने महाराष्ट्र के ज्ञानदीप विद्यापीठ, पुणे में दर्शनशास्त्र और ईशशास्त्र पढ़ाई की और 27 अक्टूबर 1982 को पुरोहिताभिषेक प्राप्त किया।

उन्होंने सरकारी कला और वाणिज्य कॉलेज, इंदौर से बी.ए और एम.ए की डिग्री हासिल की।

पुरोहित की प्रेरिताई
अपने पुरोहिताभिषेक के बाद, फादर देवप्रसाद ने 1982 से 1984 तक खंडवा महागिरजाघर में और 1984 से 1986 तक खरगोन में सहायक पल्ली पुरोहित के रूप में काम किया।

इसके बाद उन्होंने एक साल तक संत थॉमस सेमिनरी के सहायक रेक्टर के तौर पर काम किया। 1992 से 1995 तक, वे पालदा में काथलिक आश्रम जूनियरेट के रेक्टर रहे।

उन्होंने 1995 से 2001 तक राणापुर के पल्ली पुरोहित के रूप में और उसके बाद 2001 से 2008 तक उदयपुर के मैत्री सदन के डायरेक्टर के रूप में काम किया। इस दौरान, उन्होंने प्रोविंशियल के सलाहकार और धर्मप्रांत के सलाहकार के रूप में भी काम किया। 2008 में, उन्हें मेघनगर का पल्ली पुरोहित नियुक्त किया गया।

धर्माध्यक्षीय प्रेरिताई
पोप बेनेडिक्ट 16वें ने फादर देवप्रसाद गनावा को 11 मई 2009 को झाबुआ का धर्माध्यक्ष नियुक्त किया। उनका धर्माध्यक्षीय पावन अभिषेक 16 जून 2009 को सम्पन्न हुआ था।

झाबुआ धर्मप्रांत में तीन साल तक सेवा देने के बाद, उन्हें 21 दिसंबर 2012 को उदयपुर का धर्माध्यक्ष नियुक्त किया गया।

उदयपुर के धर्माध्यक्ष के रूप में, उन्होंने खुद को प्रेरिताई और स्थानीय कलीसिया के विकास के लिए समर्पित किया, खासकर, गरीब, आदिवासी समुदायों और पुरोहितों एवं धर्मसंघियों को तैयार करने पर ध्यान दिया।

उनका निधन भारत की कलीसिया के लिए, खासकर उदयपुर और झाबुआ धर्मप्रांतों तथा सोसाइटी ऑफ द डिवाइन वर्ड के लिए एक बड़ी क्षति है। सीसीबीआई उदयपुर धर्मप्रांत के पुरोहितों, धर्मसंघियों और उनके परिवारों एवं विश्वासी समुदाय के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है। कलीसिया उनकी आत्मा को ईश्वर की दया को सिपूर्द करती है और उनके निधन पर शोक मनाने वाले सभी लोगों की सांत्वना के लिए प्रार्थना करती है।

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