पोप लियो 14वें, “आइए, हम एकता में शांति का उपहार मांगें”
पोप ने शुक्रवार 26 जून को तीन ट्वीटकर सम्पूर्ण विश्व से रोम आये कार्डिनलों को आमंत्रित किया कि वे अपने जीवन, समुदाय, अपनी प्रेरितिक योजनाओं एवं अनुभवों और साथ ही अपनी समस्त खुशियों एवं दुखों को ईश्वर को अर्पित करें। संत पापा ने कलीसिया में पवित्र आत्मा के काम को समझने में मदद करने के लिए आमंत्रित किया।
दुनिया भर से कार्डिनल 26-27 जून तक वाटिकन के पोप पॉल षष्टम सभागार में चल रहे कार्डिनल मंडल की असाधारण सभा (कंसिस्ट्री) में भाग ले रहे हैं। कंसिस्टरी शुक्रवार, 26 जून को संत पेत्रुस महागिरजाघर में संत पापा लियो 14वें की अध्यक्षता में पवित्र मिस्सा के साथ शुरू हुई। इसके बाद कार्डिनल उद्घाटन सत्र के लिए संत पापा पॉल षष्टम सभागार में गये। पवित्र आत्मा के आह्वान के बाद कार्डिनल मंडल के डीन, कार्डिनल जोवानी बतिस्ता रे के भाषण और संत पापा के शुरुआती भाषण से सत्र शुरु किया गया। संत पापा लियो ने कार्डिनलों को अपने स्पस्ट समर्थन और सलाह के ज़रिए आज कलीसिया में पवित्र आत्मा के काम को समझने में मदद करने के लिए आमंत्रित किया।
इसी के मद्देनजर पोप ने अपने सोशल मीडिया के एक्स पर तीन संदेश लिखाः
पहला संदेश : “मैं इस #ExtraordinaryConsistry (कार्डिनल मंडल की असाधारण सभा) के दौरान हमारी समझदारी के लिए ईश्वर के वचन से कई संकेत लेना चाहूँगा। सबसे पहले, संत पेत्रुस और पौलुस का उदाहरण हमें विश्वास में सच्ची आज़ादी साझा करने के लिए प्रोत्साहित करता है। प्रभु येसु के साथ हमारा रिश्ता हमें पाप और डर से आज़ाद करता है। सुसमाचार का प्रचार प्रभु में हमारे विश्वास के अनुपात में फल देता है।”
दूसरा संदेश : “आइए, हम एकता में शांति का उपहार मांगें। हम सभी लोगों को विश्वास के लिए आमंत्रित करते हैं, जिसमें हम सच में आज़ाद हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तनाव और झगड़े इंसानी परिवार को बुरी तरह घायल कर रहे हैं। हालांकि, कलीसिया और दुनिया में, ऐसी पहलें बढ़ रही हैं जो इंसानी गरिमा, न्याय, कानून और इंसानियत के लिए सम्मान की मांग करती हैं। यह उम्मीद की एक वजह है, क्योंकि यह ईश्वर के काम की खूबसूरती को दिखाता है।”
तीसरा संदेश : “आज और हमेशा, आइए हम आज्ञाकारिता में तालमेल का आनंद लें, यानी, उस सुनने में जो वचन के तोहफ़े को पहचानता है, जो हमारे लिए शरीर बना है। इस अभ्यास के ज़रिए, पवित्र आत्मा हमें रास्ता दिखाते हैं, खुद प्रेरितिक समस्याओं और मौकों को बताते हैं, इरादों को शुद्ध करते हैं और आम रास्ते से भटकने वाली किसी भी चीज़ को ठीक करते हैं।”