पोप लियो 14वें : तकनीकी को सत्य एवं आमहित की सेवा करनी चाहिए

पोप लियो 14वें ने चिली में एक सेमिनार में संचारकों को प्रोत्साहन दिया कि वे ऐसे संचार को बढ़ावा दें, जो “तकनीकी विकास से मिले नए अवसरों के सामने, मानव की प्रतिष्ठा की रक्षा करना जानता हो।”

पोप लियो 14वें ने संचारकों को यह सुनिश्चित करने का प्रोत्साहन दिया है कि हर तकनीकी उपकरण "सच्चाई और आम भलाई की सेवा में" हो, जब कलीसिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता से मिलनेवाले मौकों और चुनौतियों पर सोच-विचार कर रही है।

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन द्वारा हस्ताक्षरित अपने इस संदेश को पोप लियो 14वें ने 27-28 जुलाई को संतियागो में चिली की परमधर्मपीठीय काथलिक यूनिवर्सिटी में होनेवाले कलीसिया के संचार पर सातवें अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के प्रतिभागियों को भेजा।

'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चुनौतियाँ' नाम के इस सेमिनार में पोप लियो 14वें के विश्व प्रेरितिक पत्र मनिफिका हूमानितास के आलोक में कृत्रिम बुद्धिमता के नैतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक असर पर चिंतन करने के लिए पूरे लैटिन अमेरिका और कैरिबियन से संचारक, पुरोहित, शिक्षाविद और कलीसिया के प्रतिनिधि एक साथ जमा हुए है।

एआई के जमाने में प्रज्ञा और जिम्मेदारी
चिली के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष, महाधर्माध्यक्ष रेने ओस्वाल्डो रेबोलेडो सालिनास को संबोधित करते हुए, पोप ने उम्मीद जताई कि प्रतिभागी "एक ऐसे संचार को बढ़ावा देंगे, जो तकनीकी के विकास से मिले नए अवसरों के सामने, इंसान की प्रतिष्ठा की रक्षा करे और हर उपकरण सच्चाई और सबकी भलाई के लिए इस्तेमाल किया जाए।"

पोप लियो ने सेमिनार को पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन पर भी सौंपा है, और प्रार्थना की है कि इसके हिस्सा लेने वाले लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से उत्पन्न चुनौतियों का "प्रज्ञा और जिम्मेदारी के साथ सामना करें, ताकि कलीसिया का संचार लोगों के बीच मेल-मिलाप को बढ़ावा दे और सुसमाचार के प्रचार में योगदान दे।"

सोशल मीडिया मानव के स्थान पर
सेमिनार की शुरुआत करते हुए, संतियागो दी चिली के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल फेर्नांदो नतालियो कोमाली गरीब ने सोशल मीडिया के असर पर बात की। उन्होंने इसे "सचमुच मानवीय" जगह बताया क्योंकि यह भावनाओं, रिश्तों और झगड़ों को दिखाता है।

उन्होंने कहा, "जो कुछ भी हमारे साथ होता है, वह वहीं होता है," और बातचीत के लिए चार जरूरी शर्तें बताईं: सच्चाई, अच्छाई, सुंदरता और काम की चीजें।

कार्डिनल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जमाने में मानव की सुरक्षा के लिए समर्पित मनिफिका हूमानितास को सिर्फ तकनीकी के नजरिए से नहीं पढ़ा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में बहुत चर्चा हो रही है, लेकिन यह विश्व प्रेरितिक पत्र सबसे बढ़कर मानव प्रतिष्ठा और सच्चाई के बारे में बोलता है।"

येरुसालेम बनाना, बाबेल नहीं
कार्डिनल कोमाली ने कहा कि इन सिद्धांतों पर आधारित संचार, तेजी से अलग-अलग सोचवाले समाज में सामुदायिक जीवन को मजबूत कर सकता है।

उन्होंने कहा, "हम बातचीत को बढ़ावा देंगे, हम भाईचारे को बढ़ावा देंगे; अंततः  हम येरुसालेम बनाएंगे, बाबेल नहीं।"

इसके बाद यूखरिस्त समारोह के दौरान प्रवचन में भी यही बातें दोहराई। मनिफिका हूमानितास को एक "क्रिस्टोलॉजिकल" विश्व प्रेरितिक पत्र बताते हुए, उन्होंने समझदारी से बातचीत करने की अपील की और उम्मीद जताई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमेशा मानव प्रतिष्ठा की सेवा में रहेगी।

कलीसिया के लिए एक साझा सफर
पहले दिन के दूसरे वक्ता में चिली की पोंटिफिकल काथलिक यूनिवर्सिटी के रेक्टर जुआन कार्लोस डे ला लेरा और महाधर्माध्यक्ष रेबोलेडो सालिनास थे, जिन्होंने इस सभा को सिनॉडालिटी और कलीसिया के साझा सफर की एक ठोस अभिव्यक्ति बताया।

उन्होंने कहा कि मनिफिका हूमानितास की प्रकाशना ने नई टेक्नोलॉजी पर कलीसिया की प्रेरिताई वाली सोच को नई गहराई दी है।

उन्होंने कहा, "मानव की अटूट प्रतिष्ठा को तकनीकी विकास और वैज्ञानिक प्रक्रिया दोनों का सिद्धांत, मापदंड और अंतिम लक्ष्य बनाना चाहिए।"

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