मणिपुर के मुख्यमंत्री ने पहाड़ी जिलों में अशांति के बीच कलीसिया और छात्रों से शांति को बढ़ावा देने की अपील की
19 अक्टूबर को इंफाल के कांचीपुर स्थित कैथोलिक स्कूल में 'कैथोलिक वैली स्कूल्स स्पोर्ट्स एंड लिटरेरी मीट' (खेल और साहित्यिक कार्यक्रम) का उद्घाटन करते हुए, मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कैथोलिक कलिसिया के नेताओं, शिक्षकों और छात्रों से राज्य के पहाड़ी जिलों में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने का आग्रह किया, जहां अभी भी अशांति बनी हुई है।
मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित करते हुए, सिंह ने कहा कि छात्र जीवन चरित्र, आकांक्षाओं और जीवन के लक्ष्यों को आकार देकर भविष्य की नींव रखता है। उन्होंने इस कार्यक्रम की थीम, "एक शांतिपूर्ण मणिपुर के लिए एकजुट" (टुगेदर फॉर ए पीसफुल मणिपुर) को राज्य की वर्तमान स्थिति के संदर्भ में सार्थक और प्रासंगिक बताया।
कुछ पहाड़ी इलाकों में जारी अशांति का जिक्र करते हुए, मुख्यमंत्री ने चर्च के नेताओं, शिक्षकों और छात्रों से शांति और सद्भाव का संदेश फैलाने की अपील की, खासकर उन समुदायों के बीच जो इस संघर्ष से प्रभावित हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांति बहाल करने और विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
सिंह ने कहा कि इस संघर्ष से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वालों में छात्र भी शामिल हैं, जिनकी पढ़ाई-लिखाई बंद और नाकेबंदी (ब्लॉकेड) के कारण बाधित हुई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की रुकावटों से दिहाड़ी मजदूरों और उन लोगों को भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है, जो अपनी रोजमर्रा की कमाई पर निर्भर हैं।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि मणिपुर को बाकी भारत के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये रुकावटें जारी रहीं, तो इसका युवा पीढ़ी के भविष्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
उन्होंने समुदायों से अपील की कि वे पुरानी घटनाओं को पीछे छोड़ दें और क्षमा, सुलह और आपसी समझ को अपनाएं। उन्होंने सभी से एक शांतिपूर्ण, एकजुट और समृद्ध मणिपुर के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।
इस खेल और साहित्यिक कार्यक्रम में 'कैथोलिक वैली' के 13 स्कूल हिस्सा ले रहे हैं। यह आयोजन छात्रों की गतिविधियों और विभिन्न स्कूलों के बीच आपसी जुड़ाव के जरिए शांति को बढ़ावा देता है।
इस कार्यक्रम में विधायक करम श्याम सिंह, कैथोलिक पादरी, भाग लेने वाले स्कूलों के शिक्षक, छात्र और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
