गोवा के पुरोहित की पर्यावरण से जुड़ी विरासत पर नई किताब

गोवा के पोंडा में सेंट ऐनी चर्च में एक नई किताब जारी की गई। यह किताब दिवंगत फादर बोलमैक्स परेरा के जीवन और काम के बारे में है, जो आस्था, विज्ञान, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ लाने के लिए जाने जाते थे।

'द सीड्स ही सोउड' (The Seeds He Sowed) नाम की यह किताब डॉ. कैनेडी डी'सिल्वा ने लिखी है। वे सेंट ऐनी चर्च के सदस्य हैं और उन्होंने 2011 से फादर परेरा के साथ 50 से ज़्यादा प्रोजेक्ट्स पर काम किया था।

गोवा और दमन के आर्चबिशप फिलिप नेरी कार्डिनल फेराओ, जो 'फेडरेशन ऑफ़ एशियन बिशप्स कॉन्फ़्रेंस' (FABC) के अध्यक्ष भी हैं, ने सेंट फ्रांसिस ऑफ़ असीसी की 'ट्रांसिटस' (यानी मृत्यु) की 800वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित यूख्रिस्टिक समारोह के आखिर में यह किताब जारी की।

गोवा और दमन के आर्चडायोसिस के पुरोहित फादर परेरा का मई 2026 में 50 साल की उम्र में निधन हो गया था। वे पर्यावरण के लिए आवाज़ उठाने और समुदायों को प्राकृतिक दुनिया की ज़िम्मेदारी लेने के लिए प्रोत्साहित करने के अपने प्रयासों के लिए जाने जाते थे।

डी'सिल्वा ने बताया कि पादरी की विरासत को दर्ज करने का फ़ैसला सेंट ऐनी पैरिश में फ्रांसिस्कन वर्षगांठ और 'सीज़न ऑफ़ क्रिएशन' की तैयारियों के दौरान लिया गया था। इस पैरिश को आर्चडायोसिस में 2026 के लिए 'सीज़न ऑफ़ क्रिएशन पैरिश' के तौर पर मान्यता मिली थी।

डी'सिल्वा ने यह प्रोजेक्ट क्यों शुरू किया, इस बारे में बताते हुए कहा, "उनका नाम और पर्यावरण को लेकर उनकी सोच बार-बार हमारे सामने आ रही थी।"

यह किताब बताती है कि कैसे फादर परेरा ने अपनी पुरोहित की सेवा, वैज्ञानिक रुचियों, शैक्षिक कार्यों, युवाओं की भागीदारी और सामाजिक न्याय व पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनी वकालत को एक साथ जोड़ा।

डी'सिल्वा के अनुसार, पुरोहित इन क्षेत्रों को अलग-अलग ज़िम्मेदारियों के तौर पर नहीं, बल्कि अपने काम (वोकेशन) के आपस में जुड़े हुए रूपों के तौर पर देखते थे। किसानों के प्रति उनकी चिंता ज़मीन और स्थानीय पहचान के लिए उनके सम्मान को दिखाती थी, जबकि युवाओं के साथ उनका जुड़ाव सामाजिक ज़िम्मेदारी और न्याय को बढ़ावा देने की कोशिश थी।

फादर परेरा ने छात्रों, किसानों, वैज्ञानिकों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं, सरकारी अधिकारियों और स्थानीय समुदायों के साथ काम किया। एक खास पहल 2 अक्टूबर, 2020 को मोलेम से वास्को तक निकाली गई शांति पदयात्रा थी, जो गोवा के 16 गांवों से गुज़री। डी'सिल्वा और फादर परेरा ने पर्यावरण से जुड़े मुद्दों में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए यह पहल शुरू की थी।

डी'सिल्वा ने फादर परेरा के पर्यावरण-संबंधी नज़रिए को लोगों पर केंद्रित और आस्था से जुड़ा हुआ बताया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जंगलों, नदियों, आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स), खेती और उन पर निर्भर समुदायों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता।

सेंट ऐनी पैरिश में कई पहलें इस काम को आगे बढ़ा रही हैं। 'आवर कॉमन होम' (हमारा साझा घर) हैंडबुक और शैक्षिक वीडियो गोवा के 200 से ज़्यादा स्कूलों तक पहुँच चुके हैं। एक मेमोरियल इकोलॉजी क्विज़ छात्रों के बीच पर्यावरण की समझ को बढ़ावा देता है, जबकि तटीय इलाकों की सफाई के अभियानों में बच्चे, युवा और पैरिश के सदस्य शामिल होते हैं।

फ्रांसिस्कन ग्रीन होम्स और कैनोपी पहल भी परिवारों को पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।

डी'सिल्वा ने कहा कि ये प्रोजेक्ट फादर परेरा की विरासत के व्यावहारिक पहलू को दर्शाते हैं, खासकर इस बात को कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता से असल काम या पहल होनी चाहिए।

यह किताब फादर परेरा के इस विश्वास को भी उजागर करती है कि वैज्ञानिक ज्ञान और ईसाई आस्था समाज की सेवा में मिलकर काम कर सकते हैं। उनके काम ने दिखाया कि धार्मिक सेवा (पास्टोरल मिनिस्ट्री) के ज़रिए सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना किया जा सकता है और साथ ही आम लोगों को समाज के भले के लिए योगदान देने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

डी'सिल्वा को उम्मीद है कि यह किताब पाठकों को बड़े पैमाने पर बदलाव का इंतज़ार करने के बजाय अपने समुदायों में व्यावहारिक कदम उठाने के लिए प्रेरित करेगी।

उन्होंने कहा कि फादर परेरा की विरासत शैक्षिक पहलों, पर्यावरण-संबंधी गतिविधियों और किसानों के सम्मान की रक्षा व प्रकृति की देखभाल को बढ़ावा देने के प्रयासों के ज़रिए आगे बढ़ रही है।

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