इंडियन कैथोलिक फोरम ने युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में मतदाता सूची के बड़े पैमाने पर संशोधन के दौरान कथित गड़बड़ियों का विरोध कर रहे युवाओं के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की, देश के सबसे बड़े कैथोलिक संगठन ने निंदा की है।

यह विरोध प्रदर्शन 2 अक्टूबर को शुरू हुआ। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि भारत के चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें। यह मांग मतदाता सूची में किए गए उस संशोधन को लेकर उठाई गई है, जिसके कारण लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।

13 अक्टूबर को जारी एक बयान में 'ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन' (AICU) ने कहा, "युवा भारतीयों द्वारा शुरू किया गया यह विरोध प्रदर्शन एक वैध लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति थी, जिसे विपक्षी दलों, नागरिक समाज, वकीलों और पत्रकारों का समर्थन प्राप्त था। लेकिन इसके जवाब में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए, बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया और पुलिस ने ऐसी कार्रवाई की, जिसका मकसद सुरक्षा देना नहीं, बल्कि लोगों को डराना-धमकाना लगता है।"

एशिया के सबसे पुराने कैथोलिक संगठन, AICU ने हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करने की मांग की है। साथ ही, संगठन ने कथित ज्यादतियों — खासकर महिला प्रदर्शनकारियों, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और वकीलों के खिलाफ हुई कार्रवाई — की एक स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है।

संगठन ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर लगाई गई पाबंदियों पर भी सवाल उठाए हैं। साथ ही, राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए तय जगह का दर्जा वापस लिए जाने की खबरों को "शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के लिए एक बड़ा झटका" बताया है।

कैथोलिक सामाजिक शिक्षाओं का हवाला देते हुए, संगठन ने जोर देकर कहा कि मानवीय गरिमा, जनहित और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।

संगठन ने शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग कर रहे नागरिकों के प्रति अपना समर्थन दोहराया। साथ ही, कैथोलिक समुदाय और अन्य नेक इरादे वाले लोगों से अपील की कि वे सत्य, न्याय और संवैधानिक शासन का समर्थन करें।

AICU के पूर्व अध्यक्ष एलियास वास ने 14 अक्टूबर को बताया कि प्रदर्शनों पर पाबंदियां लगाना और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में यह बेहद चिंता का विषय है।

नई दिल्ली स्थित 'यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम' के राष्ट्रीय समन्वयक ए.सी. माइकल ने पुलिस की इस कार्रवाई की तुलना ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों के साथ किए गए बर्ताव से की है।

माइकल ने विपक्षी दलों से आग्रह किया कि वे सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ एकजुट हों। उन्होंने तर्क दिया कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बल प्रयोग के जरिए कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। वामपंथी छात्र संगठन 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) के महासचिव त्रिलोकी नाथ ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा इंतजामों ने राष्ट्रीय राजधानी में आम जनजीवन को बाधित कर दिया है।

प्रदर्शनों में शामिल रहे नाथ ने कहा कि प्रदर्शनकारी लोकतांत्रिक जवाबदेही की मांग कर रहे थे।

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