इस प्रकाश से ˸ होंडुरस की मदर तेरेसा की कहानी

"इस प्रकाश से" शीर्षक पर निर्मित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म, सिस्टर मरिया रोसा लेगोल की धरोहर एवं जीवन को प्रस्तुत करती है, जिन्होंने होंडुरस के करीब 90,000 गरीब एवं शोषित बच्चों की मदद की। फिल्म को व्यक्तिगत रूप से वाटिकन अधिकारियों एवं परमधर्मपीठ के लिए होंडुरस के राजदूतों को सोमवार को दिखलाया गया।
डोक्यूमेंटरी फिल्म "होंडुरस की मदर तेरेसा" सिस्टर मरिया रोसा लेगोल की जीवनी को प्रस्तुत करता है जिन्होंने होंडुरस के गरीबी एवं शोषण के शिकार करीब 90,000 बच्चों की मदद की।  
उनकी विरासत आज होंडुरस में जीवित है। सिस्टर मरिया रोसा ने 1964 में एक अनाथालय खोला था तथा सन् 1966 में गैरसरकारी संस्था सोचिएदाद अमीगोस दी लोस निनोस की स्थापना की। समय बीतने के साथ उन्होंने पूरे लातीनी अमरीका में करीब 500 से अधिक केंद्रों की स्थापना की।
सिस्टर लेगोल ने इन बच्चों उनके रिश्तेदारों के जीवन को प्रभावित करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया, और समुदायों के लिए विभिन्न दूरदर्शी उद्यमशीलता और शैक्षिक कार्यक्रमों के साथ-साथ क्लीनिक एवं मेडिकल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा प्रदान की।
नौकरशाही, सैन्य तखतापलट और न ही प्राकृतिक आपदाएँ, उनकी योजना में बाधा नहीं पहुँचा सकीं। सिस्टर लेगोल का निधन 93 साल की उम्र में अकटूबर 2020 में कोविड-19 संक्रमण के बाद हुआ।
डोक्यूमेंटरी फिल्म की व्यक्तिगत स्क्रीनिंग का आयोजन होंडुरस के राजदूत एवं ओस्सेलवातोरे रोमानो के स्पानी सम्पादक के द्वारा किया गया था।
होंडुरस के तेगूचिपालपा के कार्डिनल ऑस्कर अंद्रेस रोडरिगेज़ माराडियागो ने वाटिकन में फिल्म के दर्शकों को सम्बोधित करते हुए बतलाया कि महाधर्मप्रांत आशा के साथ गवाहों को जुटा रहा है ताकि वे सिस्टर मरिया रोसा लेगोल की धन्य घोषणा की प्रक्रिया को आगे बढ़ायें। उन्होंने सभी गवाहों के साथ आगे आने का प्रोत्साहन दिया।  
फिल्म में, कार्डिनल ने सिस्टर लेगोल के अंतिम संस्कार के ख्रीस्तयाग में उनके सभी कार्यों को याद किया है तथा सभी शोकित लोगों का आह्वान किया है कि वे अपने आप से पूछें कि मैं किस तरह सहयोग दूँ जिससे कि उनके द्वारा किये गये कार्य समाप्त न हों?
सिस्टर मरिया रोसा लेगोल एक फ्रांसिसकन धर्मबहन थीं जिन्होंने अपने जीवनकाल में अनगिनत कार्यक्रम चलाये, जिनसे मध्य अमरीका के करीब 87,000 बच्चों को गरीबी से ऊपर उठने में मदद मिली।
उन्होंने बच्चों के लिए अनाथालयों की स्थापना की। वे खुद छः साल की उम्र में अनाथ हो गई थीं अतः वे अपने समान असहाय बच्चों को आश्रय प्रदान करना चाहती थीं। उन्होंने न केवल बच्चों की देखभाल कीं बल्कि उनकी प्रतिष्ठा पर भी ध्यान दिया। उन्होंने उनकी नौकरी के कार्यक्रमों की शुरू की।   
उन्होंने मेडिकल टीम के साथ कार्य किया और उस क्षेत्र में करीब 150 क्लिनिक खोले। एक समय में, उसके पास एड्स से पीड़ित बच्चों के लिए एक धर्मशाला थी। उन्होंने 2001 में बालिकाओं के लिए एक स्कूल खोला जो होंडुरास की कुछ सबसे गरीब बालिकाओं के लिए एक नया स्कूल था, जिसने लिंग अध्ययन, महिलाओं की समानता के साथ-साथ स्वास्थ्य और शिक्षाविदों के बारे में भी शिक्षा दी। 2019 में जब वे 91 साल की थीं तब भी वे नौकरी का सृजन कर रही थीं। वे लगातार सोचती रहती थीं कि लोगों की क्या आवश्यकता है और उनकी आवश्यकताओं को प्रदान करने की कोशिश कीं।
छः साल की उम्र में मरिया रोसा ने अपनी बुलाहट को किस तरह पहचाना? वे एक तटीय शहर में रहती थीं और उन्होंने कुछ जर्मन धर्मबहनों को अपने काले लम्बे लबादों के साथ तट पर आते देखा। मरिया के पल्ली पुरोहित ने बतलाया कि वे अनाथ बच्चों की मदद करते हैं तब मरिया ने सोचा कि मैं भी एक अनाथ बच्ची हूँ। इसलिए वे मेरी और मेरे समान बच्चों की मदद करने आयी हैं। ईश्वर चाहते हैं कि मैं भी एक धर्मबहन बनूँ। वास्तव में, उसके बाद उसने धर्मबहनों को बतलाया कि वे भी सिस्टर बनना चाहती हैं। इसपर धर्मबहनों ने कहा कि यह बहुत अच्छा है। उन्होंने कहा कि यदि वह सचमुच सिस्टर बनना चाहती है तो वह रविवार को उनके पास आये और देखे। धर्मबहनों को लगा कि वह नहीं आयेगी किन्तु वह गई। वह ट्रेन पर चढ़ी और काफी लम्बी यात्रा तय करने के बाद धर्मबहनों के पास पहुँची। यह उनकी बुलाहट की यात्रा की शुरूआत के समान थी। विश्वास के द्वारा कुछ भी किया जा सकता है।

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