आँख शरीर का दीपक

किसी ने कहा है, "आँखें छोटी तो होती हैं पर इसमें पूरी दुनिया देखने का हुनर होता है।" कितनी सच बात है! एक नजर में हम आकाश का विस्तार देख लेते हैं। पहाड़ों की ऊँचाई नाप लेते हैं। प्रकृति का संपूर्ण सौंदर्य निहार लेते हैं। इसीलिए तो कहा जाता है कि शरीर के बाकी अंगों की तुलना में आँख की अहमियत ज्यादा ही है। किसी- किसी के लिए यह बात अतिशयोक्ति हो सकती है। पर, इसे एक सिरे से खारिज भी नहीं किया जा सकता है। आँख की इसी महत्ता के कारण प्रभु भी यह कहने को मजबूर है कि आँख अगर बीमार हो तो सारा शरीर अंधकारमय होगा। और अगर आँख अच्छी हो तो सारा शरीर प्रकाशमान होगा। आँखों के बिना जीवन सचमुच कितना दुःश्वार होता है। कदम- कदम पर ठोकर खानी पड़ती है। जिंदगी का सफर कठिन हो जाता है। बेवजह चुनौतियों एवं संघर्षों का सामना करना पड़ता है। सचमुच जिंदगी में अंधकार ही अंधकार हो जाता है। जिस तरह आँख शरीर का दीपक है उसी तरह प्रभु येसु ख्रीस्त की शिक्षा हमारे अंधकारमय जीवन के लिए प्रकाश है। जो इसके आलोक में जीवन जीता है उसका जीवन हमेशा प्रकाशमान रहेगा। हमें इस ज्योति को अपने जीवन में हमेशा प्रज्वलित रखने की जरूरत है। यह हर परिस्थिति में हमारा पथ- प्रदर्शन करेगा। इसके उजाले में मार्ग से भटकने की कोई गुंजाईश नहीं है। प्रभु येसु की शिक्षा में इतना हुनर है तो फिर सोचने की क्या बात!

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