रोशनी की किरण माँ मदर तेरेसा!

मदर तेरेसा को सारी दुनियाँ दैविक आत्मा व मसीहा मानती है और शायद मानती रहेगी क्योंकि, उन्होंने विदेशी मिशनरी होने के बावजूद हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई को अपनी सेविकाई से भाई- भाई होने का मतलब सिखाया और उनके बीच में कभी कोई अंतर- भेद नहीं दिखाया। बल्कि, हमारे देश में रहकर साधारण लोगों के बीच उन्होंने सेवा का काम किया। 
धर्म के आधार पर नहीं, अपितु इंसानियत के ख़ातिर उन्होंने मानवता की सेवा में अपना सारा जीवन खुशी- खुशी समर्पित कर दिया, ताकि बेसहारों और गरीबों का उद्धार हो सके एवं समाज में एकता बनी रहे। मदर तेरेसा का एक ही धर्म था और वो था “समाज सेवा"। उन्होंने भूखे- प्यासों, दरिद्रों, अनाथों, गरीबों और बेसहारा लोगों में येसु मसीह के क्रूस के दर्द का अनुभव किया था। उन्हें इन लोगों में येसु दिखते थे। 
एक बार कोलकाता की गलियों में एक भिखारी के घावों को साफ करते वक्त, उसे मुस्कुराता देख, मदर तेरेसा ने जानना चाहा कि उसकी मुस्कुराहट के पीछे क्या राज़ है? वो बोला, “आप सचमुच में देवी हैं अन्यथा लोग तो दूसरों को ज़ख्मी, भूखे, प्यासे, नंगे और तड़पते देखकर भी मद्द नहीं करते"। उसके इतना कहने मात्र से ही मदर की आंखों से अश्रुओं की धारा बह निकली। 
मदर तेरेसा ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी की धर्म- बहनों को एक बार एक घटना के बारे में बताया। उनके अनुसार, वे एक बार आस्ट्रेलिया के मेलबोर्न शहर में एक गरीब आदमी के घर गई, जिसके बारे में किसी को भी ख़बर नहीं थी। वह तलघर में रहता था और उसकी हालत बहुत खराब थी। घर में बिजली नहीं थी तथा रोशनी के नाम पर अंधेरा ही अंधेरा था। दुनिया में उसका कोई दोस्त नहीं था। मदर तेरेसा ने गंदें कमरे की साफ- सफाई करना शुरू कर दिया। शुरू- शुरू में उसने उनके इस बर्ताव का विरोध किया। मगर बाद में वह बोला, “उसे वैसा ही छोड़ दें, जैसा भी है, वैसा ही ठीक है"। परन्तु मदर ने फिर भी अपना कार्य जारी रखा। सफाई करते- करते वह उस मनुष्य से बातें भी करती रहीं। कचरे के ढेर के नीचे उन्हें एक लेम्प दिखाई दिया जो पूरा धूल से भरा हुआ था। साफ करने पर उन्होंने देखा कि वह लेम्प बहुत सुन्दर था। उन्होंने उससे कहा, “तुम्हारे पास एक सुन्दर लेम्प है फिर भी तुम इसे क्यों नहीं जलाते? "उसने उत्तर दिया, "कोई भी मुझे देखने नहीं आता है, तो भला मैं इसे क्यों जलाऊँ? "मदर ने पूछा, “अगर मेरी एक सिस्टर तुमसे रोज़ मिलने आये, तो क्या तुम इसे जलाने का वादा करते हो?" अगर मुझे किसी मानव की आवाज़ सुनाई देगी तो 'हाँ', मैं लेम्प जलाऊँगा, उसने कहा। 
मदर तेरेसा की दो सिस्टर्स लगातार उसके यहां जाने लगी। धीरे- धीरे स्थिति बदलने लगी। हर बार जब सिस्टर्स उससे मिलने आती तो वह लेम्प जलाता। एक दिन उसने उन सिस्टर्स से कहा, “सिस्टर्स, अब से मैं स्वयं ही लेम्प जला लूंगा। कृपया, मुझ पर एक उपकार करें- “जो पहली सिस्टर मुझे देखने आई थी, उनसे कहना कि जो रोशनी उन्होंने मेरे जीवन में प्रज्वलित की थी, वह अब भी जल रही है।" यह लेम्प की बात नहीं थी, लेकिन पहले मदर तेरेसा ने और बाद में उनकी सिस्टर्स ने जो दया, प्यार और भलाई दर्शाई, उसने उस गरीब व्यक्ति को बचा लिया व उसका जीवन रोशन कर बदल दिया। इसी कारणवश, करूणामय माँ के प्रेम से सराबोर होकर समाज का हर वर्ग उन्हें अंधकार में रोशनी की किरण मानता है। 
डॉ. फा. डॉमिनिक इम्मानुएल को एक बार मदर के व्याख्यानों का अनुवाद करने का सौभाग्य इंदौर शहर में प्राप्त हुआ और इस दौरान एक दिल दहलाने वाली घटना का ज़िक्र हुआ, वो इस प्रकार है। “एक रात को किसी ने हमारे दरवाजे पर दस्तक देकर हमें बताया कि पास ही में एक आठ बच्चों वाले हिन्दू परिवार ने कुछ दिनों से बिल्कुल खाना नहीं खाया है। मैं थाली में थोड़ा चावल लेकर एकदम उस घर की ओर निकल पड़ी। जैसे ही मैंने उस घर में कदम रखा, उस औरत ने, थाली ग्रहण करने के बाद उस चावल को दो बराबर हिस्सों में बांटा और बाहर जाकर एकदम वापस लौट आयी। जब मैंने उसकी ओर प्रश्नभरी नजरों से देखा, तो उसने जवाब दिया, “मदर पड़ोसी मुस्लिम घर के बच्चे भी भूख से हमारे समान तिलमिला रहे हैं"। मदर ये सुनकर स्तब्ध रह गई व कुछ क्षणों तक कुछ नहीं बोली। मदर का मानना था कि उस स्त्री ने थाली में उस थोड़े से चावल के माध्यम से ईश्वर का असीम प्रेम दूसरों के साथ बांटा। आज विभिन्नता और अनेकता में एकता का बोलबाला है। धर्म को उसके व्यापक विविध आयामों में समझने की कोशिश करने का समय है। धर्म आदमी- आदमी में भेदभाव नहीं करता है बल्कि वह लोगों को आपस में जोड़ता है। वह निश्छल प्रेम का पाठ पढ़ाता है। सही अर्थों में वह हमें अपने आपसे से आगे देखना सिखाता है। मदर तेरेसा सारी जिन्दगी भर अपने आपसे आगे देखती रही। भारत को, ईसाईयत को और सारी दुनिया को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि उनके बीच सालों- साल तक एक ऐसी महिला रही, जिसके लिए कमजोर वर्गों की सहायता करना सबसे बड़ा धर्म रहा। मदर तेरेसा विशुद्ध धार्मिक महिला थी। वो किसी विशेष धर्म की प्रचारक नहीं बल्कि मानवता की उपासक थी।

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