भारतीय काथलिक धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखने के लिये कृत संकल्प

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की लोकधर्मियों को समर्पित समिति ने आतंकवाद विषय पर राष्ट्रव्यापी जागरूकता कार्यक्रम की योजना बनाई है। भारतीय स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगाँठ की पृष्ठभूमि में समिति ने राष्ट्र की धर्मनिरपेक्षता को बरकरार रखने पर बल दिया है।
लोकधर्मियों को समर्पित समिति के उपाध्यक्ष वी. सी. सेबास्टियन ने कहा, "धर्मनिरपेक्षता की महानता को हर कीमत पर बरकरार रखा जाना चाहिए, और किसी को भी धर्मनिरपेक्षता के ऊँचे सिद्धांतों को तोड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। वैश्विक आतंकवाद से लड़ने के लिए आंतरिक आतंकवाद से तालमेल आत्मघाती है।"
06 जून को नाइजीरिया में आतंकवादियों द्वारा ख्रीस्तीयों के नरसंहार के मद्देनजर केरल काथलिक धर्माध्यक्षीय समिति (केसीबीसी) के एक बयान के बाद वी. सी. सेबास्टियन का उक्त बयान प्रकाश में आया।
बयान में कहा गया, "दुनिया भर में इस्लामी आतंकवादी हमलों की बढ़ती संख्या राष्ट्रों द्वारा बहुत गंभीरता से लिया जाने वाला मामला है। हमारे देश में हुई कुछ हालिया घटनाओं से पता चलता है कि हम भी ऐसे खतरों से अछूते नहीं रहे हैं। आतंकवाद की ऐसी हरकतें देश के शांतिप्रिय नागरिकों के लिए चिंता का विषय हैं।"
8 जून को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में, सेबस्टियन ने कहा कि यह काफी चिंताजनक है कि भारत में वैश्विक आतंकवादी आंदोलनों के विभिन्न रूप मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "पश्चिम एशियाई देशों में ईसाइयों के नरसंहार और श्रीलंका में ईस्टर के दिन आतंकवादी हमलों की जड़ें केरल में गहरी होती जा रही हैं, यह काफी चौंका देनेवाला तथ्य है।"
राष्ट्र में बने आतंकवाद ख़तरों के प्रति सचेत कराते हुए सेबेस्टियन ने कहा कि जिस नेतृत्व को लोगों की शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, वह आतंकवाद के खिलाफ साहसिक कदम उठाने में बुरी तरह विफल रहा है।" कहा गया, "वर्तमान घटनाएं और रिपोर्टें इस बात की पुष्टि करती हैं कि कश्मीर के बाद, केरल राष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र बन रहा है।"
उपाध्यक्ष सेबास्टियन ने बताया कि भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की लोकधर्मी समिति 15 अगस्त को आतंकवाद के बारे में राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगी जिसमें शामिल होने के लिये सभी आंदोलनों और संगठनों से अनुरोध किया जा रहा है। यह अभियान पूरे देश में शांति और अहिंसा का संकल्प लेगा।
उन्होंने कहा कि ख्रीस्तीय लोकधर्मी समिति का मानना है कि भारत के सभी धार्मिक और ग़ैरधार्मिक समूहों का यह कर्तव्य है कि वे पूरे देश में धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें। कि यह सभी लोगों की संवैधानिक अनिवार्यता है।
उन्होंने बताया कि उक्त राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम में ईसाई संगठनों और संस्थाओं के अलावा कई अन्य धर्मों के आंदोलन भी भाग लेंगे।

Add new comment

1 + 1 =