हृदयों का असैन्यीकरण ज़रूरी, सन्त पिता फ्राँसिस। 

रोम के ऐतिहासिक स्मारक कोलोस्सेयुम में  विभिन्न धर्मों के विश्व प्रतिनिधियों के साथ सम्पन्न शांति हेतु 35 वें अन्तरराष्ट्रीय प्रार्थना सम्मेलन में गुरुवार को सन्त पापा फ्राँसिस ने सभी से आग्रह किया कि वे हृदयों के शुद्धिकरण का प्रयास करें ताकि सम्पूर्ण विश्व में शांति स्थापित हो सके।
शांति हेतु दो दिवसीय 35 वें अन्तरराष्ट्रीय प्रार्थना सम्मेलन का आयोजन रोम के मानवतावादी लोकोपकारी संगठन सन्त इजिदियो समुदाय द्वारा किया गया था जिसमें विश्व के लगभग 40 राष्ट्रों के धार्मिक नेताओं तथा सैकड़ों श्रद्धालुओं ने  भाग लेकर शांति हेतु प्रार्थना की। "भाइयों के रूप में लोग, पृथ्वी का भविष्य", शीर्षक से सम्पन्न उक्त प्रार्थना सम्मेलन में ख्रीस्तीय धर्म के अतिरिक्त इस्लाम, यहूदी, बौद्ध, तेनरिक्यो, हिन्दू तथा सिक्ख धर्मों के नेताओं ने मैत्री एवं सम्वाद की भावना में भाग लिया।   
प्रार्थना सम्मेलन के अवसर पर सन्त इजिदियो समुदाय के अध्यक्ष मार्को पालियात्सो ने एक विडियो सन्देश में प्रत्येक से आग्रह किया कि वे कोविद महामारी द्वारा प्रस्तुत अवसर को न खोयें। उन्होंने कहा,  "यह हमें एक दूसरे से अलग करनेवाला केवल गिरावट का एक क्षण ही नहीं अपितु एक नई शुरुआत हो।"
प्रार्थना सम्मेलन का समापन करते हुए सन्त पापा फ्राँसिस ने प्रभु ईश्वर से प्रार्थना की कि मानवता के समक्ष प्रस्तुत चुनौतियों का समाना करने के लिये सभी लोग एकात्मता के कार्यों में लगें। उन्होंने कहा कि विश्व में शांति की स्थापना के लिये  हृदयों का असैन्यीकरण नितान्त आवश्यक है। 
विश्व के विभिन्न राष्ट्रों और साथ ही युद्ध एवं हिंसा के  क्षेत्रों से  शांति के स्थल रोम आने के लिये सन्त पापा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह प्रार्थना सम्मेलन दर्शाता है कि प्रार्थना "शक्ति का एक शांत स्रोत है जो शांति लाता है और घृणा से भरे दिलों को निशस्त्र करता है।"
सन्त पिता फ्राँसिसने कहा कि रोम के ऐतिहासिक स्मारक कोलोस्सेयुम में इस सम्मेलन का आयोजन अर्थपूर्ण है, क्योंकि  किसी युग में  यह स्थल बड़े पैमाने पर मनोरंजन के लिए लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ लड़ने तथा मौत के घाट उतारने के लिये कुख्यात था। उन्होंने कहा कि यदि हम भी हिंसा को रोकने का कोई प्रयास नहीं करते हैं तो हम भी हिंसा, युद्ध तथा भ्रातृ हत्या के खेल के दर्शक मात्र बन जाते हैं।
सन्त पिता फ्राँसिसने स्मरण दिलाया कि लोगों एवं बच्चों का जीवन कोई खेल की वस्तु या खिलौना नहीं है, इसलिये, "हमें उदासीन दर्शक नहीं होना चाहिए, इसके विपरीत, हमें उन लोगों के साथ सहानुभूति रखनी चाहिये जो हमारी मानवता, इसकी आकांक्षाओं, इसके संघर्षों और इसकी कमजोरियों को साझा करते हैं।" उन्होंने कहा कि हमारे भाइयों और बहनों के साथ जो कुछ भी होता है वह हमें प्रभावित करता है, हालांकि उन्होंने कहा कि इस सच्चाई को पहचानने के लिए बहुत साहस चाहिए।
सन्त पिता फ्राँसिसने कहा कि युद्ध "मानव जीवन के साथ खिलवाड़ करता है" और यह "राजनीति और मानवता" की पराजय है। उन्होंने अल अज़हर के ग्रैन्ड ईमाम के साथ सन् 2019 में मानवीय भाईचारे पर प्रकाशित दस्तावेज़ को लागू किये जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि "इस संवेदनशील ऐतिहासिक स्थिति में धर्मों का तत्काल कार्य: मानव हृदय का विसैन्यीकरण होना चाहिये।" उन्होंने कहा, "धर्मों के अनुयायी होने के नाते यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम मानव हृदय से घृणा को मिटाने में मदद करें और हर प्रकार की हिंसा की निंदा करें।"
शांति हेतु अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन भाग लेनेवाले प्रतिभागियों से साहस की अपील कर सन्त पिता फ्राँसिसने अपने  सम्बोधन का समापन करते हुए कहा कि प्रार्थना और कार्य इतिहास के क्रम को बदल सकते हैं। उन्होंने कहा, "आइए हम धर्मों को बहनों के रूप में और लोगों को भाइयों के रूप में देखने का सपना संजोये!" उन्होंने कहा कि "बहनों के रूप में सभी एकसाथ मिलकर धर्म लोगों को शांति से रहने वाले भाई-बहन बनने, सृष्टि के साथ सामंज्य बनाये रखने तथा हमारे सामान्य धाम की रक्षा हेतु प्रेरणा देते रहें।"

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