स्वर्ग की रानी प्रार्थना में पोप : जी उठे येसु हमारे भय एवं अविश्वास को दूर करते हैं

दिव्य करूणा रविवार को स्वर्ग की रानी प्रार्थना के पूर्व पोप फ्रांसिस ने कहा कि पुनर्जीवित येसु हमारे पास आना और हमारे साथ रहना चाहते हैं। वे हमारा इंतजार करते हैं कि हम उन्हें खोजें, चूँकि वे हमें डर और अविश्वास से बाहर निकलने में मदद करने के लिए सदा तैयार रहते हैं।
वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में दिव्य करुणा रविवार के अवसर पर पोप फ्रांसिस ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया। स्वर्ग की रानी प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।
आज पास्का अठवारे का अंतिम दिन, सुसमचार पाठ शिष्यों को पुनर्जीवित प्रभु के प्रथम और द्वितीय दर्शन के बारे बतलाता है। येसु पास्का में आते हैं, जबकि शिष्य डर से उपरी कमरे में बंद हैं, लेकिन बारहों में से एक थोमस वहाँ उपस्थित नहीं था, वह आठ दिन बाद लौटा। (यो. 20,19-29) आइये हम दो पात्रों थोमस एवं येसु पर चिंतन करें। ये दोनों एक सुन्दर वार्ता करते हैं।
पोप ने प्रेरित थोमस की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, "वह हम सभी का प्रतिनिधित्व करता है जो उपरी कमरे में उपस्थित नहीं थे जब प्रभु दर्शन दिए और जिन्हें उनसे कोई भौतिक चिन्ह प्राप्त नहीं हुए हैं। हम भी उस शिष्य की तरह कभी -कभी संघर्ष करते हैं : आप कैसे विश्वास कर सकते हैं कि वे जी उठे हैं, हमें साथ देते हैं और हमारे जीवन के मालिक हैं? उन्हें बिना देखे और बिना स्पर्श किये? आप इसे कैसे विश्वास कर सकते हैं? प्रभु हमें क्यों अपनी उपस्थिति एवं प्रेम का कुछ और प्रमाण नहीं देते? मैं यहाँ कुछ चिन्ह देखता हूँ कि हम भी थोमस के समान हैं, उन्हीं के समान संदेह करते हैं, उन्हीं की तरह तर्क करते हैं।
पर हमें इसके लिए लज्जित नहीं होना चाहिए। वास्तव में, थोमस की कहानी बतलाते हुए, सुसमाचार हमें बतलाता है कि प्रभु पूर्ण ख्रीस्तीय की खोज नहीं करते। पोप ने कहा, "मैं बतलाना चाहता हूँ कि मैं डरता हूँ जब मैं कुछ ख्रीस्तियों, कुछ ख्रीस्तीय संघों को देखता हूँ जो खुद को पूर्ण समझते हैं। प्रभु पूर्ण ख्रीस्तीयों की खोज नहीं करते,  वे ऐसे ख्रीस्तीय की चाह नहीं रखते जो कभी संदेह नहीं करते और हमेशा पक्के विश्वास के लिए गर्व करते हैं। जब कोई खीस्तीय इस तरह होता है तब कुछ ठीक नहीं है। थोमस के समान विश्वास में प्रकाश और अंधकार दोनों होता है। यदि ऐसा नहीं है तो विश्वास को कैसा होना चाहिए? विश्वास सांत्वना, गति और उत्साह के क्षण को जानता है किन्तु थकान, घबराहट, संदेह और अंधेरा से भी परिचित है। सुसमाचार हमें थोमस के संकट को दिखलाता है यह बतलाने के लिए कि हमें जीवन और विश्वास के संकट से नहीं घबराना चाहिए। संकट पाप नहीं है, वह एक यात्रा है, हमें उससे नहीं डरना चाहिए। कई बार वे हमें विनम्र बनाते हैं क्योंकि वे हमें ठीक होने, दूसरों से बेहतर होने के विचार से दूर कर देते हैं। संकट हमें जरूरत में अपने आपको पहचानने में मदद देता है। वे ईश्वर की आवश्यकता को फिर से जगाता और इस तरह प्रभु की ओर लौट आने में मदद देता है, उनके घावों का स्पर्श करने, उनके प्रेम का अनुभव कराता है।
पोप ने कहा, "प्यारे भाइयो एवं बहनो, अभिमानपूर्ण विश्वास जो हमें घमंडी और उदंडी बनाता है उसकी अपेक्षा अपूर्ण किन्तु विनम्र विश्वास का होना अच्छा है, जो हमेशा ईश्वर की ओर लौटता है।"
थोमस की अनुपस्थिति और यात्रा के सामने जो बहुधा हमारा भी है, येसु की क्या प्रतिक्रिया होती है? सुसमाचार दो बार कहता है कि वे आये (19,26) पहली बार और फिर दूसरी बार आठ दिन बाद। येसु नहीं छोड़ते, वे हमसे नहीं थकते। वे हमारे संकट, हमारी कमजोरी से नहीं डरते। वे हमेशा वापस लौटते। जब द्वार बंद होता, वे पुनः लौटते हैं, जब हमें संदेह होता है वे पुनः लौटते हैं। थोमस के समान हमें उनसे मुलाकात करना है और अधिक नजदीक से उनका स्पर्श करना है। येसु हमेशा वापस आते हैं। वे हमेशा द्वार पर दस्तक देते हैं और प्रभावशाली चिन्हों के साथ नहीं आते कि हम छोटा और अयोग्य महसूस करें, अथवा लज्जित हों किन्तु वे अपने घावों को दिखाने के लिए लौटते हैं जो उनके प्रेम का चिन्ह है जिन्होंने हमारी दुर्बलता को अपनाया है। खासकर, जब हम चिंता और परेशानी के क्षण का अनुभव करते हैं, पुनर्जीवित येसु हमारे पास लौटना चाहते हैं। वे हमारा इंतजार करते हैं कि हम उन्हें खोजें, उन्हें पुकारें, ऐसे समय में जब हम थोमस के समान धारणा करते हैं, हमारी आवश्यकताओं एवं अविश्वास को उनके पास लाते हैं। वे हमेशा वापस आते हैं क्यों? क्योंकि वे धैर्यशील एवं दयालु हैं। वे भय एवं अविश्वास के हमारे बंद कमरे को खोलने आते हैं क्योंकि वे हमेशा हमें दूसरा अवसर देना चाहते हैं। येसु दूसरे अवसर के प्रभु हैं : वे हमेशा दूसरा अवसर प्रदान करते हैं।
अतः आइये हम बीते दिनों की याद करें, जब हम कठिनाई अथवा संकट के समय अपने आपमें बंद हो गये थे, अपनी कठिनाई से घिर गये थे और येसु को अपने घर से बाहर कर दिया था। आइये हम प्रतिज्ञा करें कि आनेवाले समय में येसु को खोजने का प्रयास करेंगे, उनकी ओर लौटेंगे जिन्होंने हमें चंगा किया है। इस तरह हम भी दूसरों पर दया कर पायेंगे, बिना कठोरता एवं पूर्वाग्रह के दूसरों के घावों तक पहुँच पायेंगे।     
पोप ने कहा, "करूणा की माता मरियम को मैं करुणा को समर्पित रविवार के बाद सोमवार को करुणा की माता के रूप में याद करना चाहता हूँ – वे हमें विश्वास एवं प्रेम के रास्ते पर साथ दें।" 

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