शरणार्थियों के प्रति प्रेम कलीसिया का मिशन

पोप फ्रांसिस ने कहा है कि विश्व में व्याप्त शरणार्थियों एवं आप्रवासियों के प्रति प्रेम एवं एकात्मता सम्बन्धी कलीसियाई मिशन की कोई सीमा नहीं है।
वाटिकन स्थित परमधर्मपीठीय प्रेस कार्यालय में गुरुवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में 108 वें विश्व आप्रवासी एवं शरणार्थी दिवस हेतु पोप फ्राँसिस के सन्देश की प्रस्तावना की गई। विश्व आप्रवासी एवं शरणार्थी दिवस 25 सितम्बर को मनाया जायेगा, जिसका शीर्षक हैः "आप्रवासियों और शरणार्थियों के साथ भविष्य का निर्माण।"
संवाददाता सम्मेलन में 108 वें विश्व आप्रवासी एवं शरणार्थी दिवस की तैयारी हेतु पोप फ्राँसिस का एक विडियो दर्शाया गया जिसमें  आप्रवासियों और शरणार्थियों के स्वागत एवं उनके प्रति प्रेम तथा समाज के लिए उनके संवर्धन को महत्व देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।  
सम्मेलन की प्रस्तावना परमधर्मपीठीय कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों सहित इटली स्थित आग्रीजेन्तो के पूर्व महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल फ्राँचेस्को मोन्तोनेग्रो पत्रकारों के समक्ष प्रस्तुत की। उन्होंने लाम्पेदूसा द्वीप पर पोप फ्राँसिस की 2013 की यात्रा का स्मरण किया और कहा कि सन्त पापा आप्रवासियों एवं शरणार्थियों की दयनीय दशा के प्रति हमेशा से उत्कंठित रहे हैं।   
कार्डिनल मोन्तेनेग्रो नें "अनन्त जीवन के आयाम की ओर मानव की यात्रा"  तथा "वर्तमानकालीन," युद्ध, असमानताएँ  एवं हाशिये पर जीवन यापन करनेवाले लाखों लोगों की स्थिति के बीच व्याप्त सम्बन्ध पर विचार हेतु पोप फ्राँसिस के निमंत्रण का स्वागत किया।
कार्डिनल महोदय ने कहा कि "जिस भविष्य के बारे में पोप अपने सन्देश में बोलते हैं, वह कोई सामान्य 'कल' नहीं है, बल्कि वह ऐसी निश्चितता है जो उस विश्वासी से संबंधित है जिसे यह ज्ञान है कि वह अनंत काल की ओर आगे बढ़ रहा है, क्योंकि वर्तमान को तथ्यों के भ्रमित संग्रहों में समेटा नहीं जा सकता, जिसका ईश्वर की योजना से कोई लेन देन न हो।" पोप के शब्दों को उद्धृत कर उन्होंने कहा, "ख्रीस्तीय समुदाय की ज़िम्मेदारी है कि वह प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा के लिए, न्याय, शांति और सम्मान के माध्यम से, ईश्वर की योजना को साकार करने की कोशिश करते हुए जीवन यापन करे। इस तरह, जब वह ईश इच्छानुसार ईश आज्ञा का अनुपालन कर समय के साथ चलता है, तब वह भविष्य को तैयार करता और अनंत काल की आशा करता है। मुक्ति इतिहास की यह दृष्टि एक समावेशी तर्क को लागू करती है।"
कार्डिनल मोन्तेनेग्रो ने कहा कि पोप इस तथ्य को स्पष्ट करते हैं कि ऐसा कुछ नहीं है जिसमें आप्रवासी एवं शरणार्थी एक ओर हैं और दूसरी ओर उनकी मेज़बानी करनेवाले लोग हैं अपितु सब आपस में भाई बहन हैं जिनके बीच परस्पर प्रेम एवं सम्मान होना चाहिये तथा सांस्कृतिक, धार्मिक या सामाजिक विविधता को सभी के लिए विकास का एक बड़ा अवसर बनाना सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आग्रीजेन्तो के धर्माध्यक्ष के रूप में मेरा अनुभव मुझे इन सिद्धान्तों की पुष्टि करने की अनुमति देता है जिनके प्रति पोप फ्रांसिस ने अपने सन्देश में सचेत कराया है।
आप्रवासियों एवं शरणार्थियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की पूर्वधारणा से बचने की कार्डिनल मोन्तेनेग्रो ने चेतावनी दी। उन्होंने कहा, "यदि आप उस पुरुष, उस महिला या उस बच्चे की आंखों में देखें तो आप समझ सकते हैं कि वह आपके जैसा ही है, कि वह आपका भाई है। उस क्षण सभी भेद, राजनीतिक विवाद, संख्याओं का तर्क या नियम,  इस या उस देश का पतन हो जाता है क्योंकि वे आंखें आपको उस व्यक्ति के देश या धर्म से अधिक उसकी गरिमा का दर्शन कराते हैं। भविष्य के निर्माण के लिए सभी पूर्वाग्रहों और विशेषाधिकारों से मुक्त दूसरे पर इस नज़र की आवश्यकता होती है। संत पापा इस बात पर बहुत ज़ोर देते हैं कि यह दृष्टिकोण सभी के लिए विकास का अवसर हो सकता है।"
कार्डिनल मोंटेनेग्रो ने पोप के सन्देश में प्रकाशित प्रार्थना के एक मध्य भाग को उद्धृत करते हुए कहा: "हे ईश्वर, हमें आप्रवासियों और शरणार्थियों और अपने आस-पास रहने वाले सभी लोगों के साथ मिलकर जीवन यापन करने के द्वारा अपने राज्य का निर्माता बनाएं।"

Add new comment

10 + 1 =