विश्वविद्यालय में मुलाकात की संस्कृति को बढ़ावा दें, छात्रों से पोप 

बेलफास्ट के क्वीन्स यूनिवर्सिटी के काथलिक युवाओं को दिए संदेश में पोप फ्राँसिस ने विश्वास के सार और एक ख्रीस्तीय होने के नाते सत्य की खोज और दूसरों के लिए खुद के उपहार पर ध्यान केंद्रित किया। पोप फ्राँसिस ने सोमवार, 25 अप्रैल को वाटिकन में आयरलैंड बेलफ़ास्ट के क्वीन्स यूनिवर्सिटी से आये तीर्थयात्री काथलिक युवाओं का अभिवादन किया। संत पापा फ्राँसिस ने रोम की तीर्थयात्रा के अवसर सभी को पुनर्जीवित प्रभु में स्नेह और आनंद के साथ बधाई दी, जो क्वीन्स यूनिवर्सिटी में काथलिक पुरोहिताई की पचासवीं वर्षगांठ मना रहे हैं।
पोप ने कहा “जैसा कि आप इस मील के पत्थर को चिह्नित करते हैं, मैं आपको न केवल हमारी काथलिक परंपरा की बौद्धिक और आध्यात्मिक समृद्धि की अपनी समझ और प्रशंसा को गहरा करने के लिए प्रोत्साहित करता हूं, बल्कि वास्तव में सुसमाचार भावना में, आपस में और विश्वविद्यालय समुदाय में मुलाकात की संस्कृति को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता हूं।” आगे उन्होंने कहा कि ख्रीस्तीय धर्म मूल रूप से येसु मसीह के साथ मुलाकात के बारे में है। यदि हम वास्तव में येसु में विश्वास करते हैं, तो हमें वही करना चाहिए जो येसु ने किया : दूसरों से मिलें, अपने पड़ोसियों से मिलें, ताकि उनके साथ सुसमाचार के मुक्तिदायी सत्य को साझा कर सकें।
पोप ने कहा कि ईश्वर के राज्य की सेवा में मुलाकात की संस्कृति का निर्माण व्यक्तिगत रूप से हमसे मांग करता है कि हम दूसरों के पास जायें उनसे बातें करें उनकी बातें सुनें। उनकी जीवन यात्रा की कठिनाइयों में उनका सहारा दें और उनसे जुड़े रहें। (सीएफ फिलि 1:10) जब हम दूसरों के साथ अपनी यात्रा साझा करते हैं, सत्य की खोज में एक-दूसरे का समर्थन करते हैं और रिश्तों का एक ऐसा जाल बुनने का प्रयास करते हैं, जो हमारे जीवन को “भाईचारे का एक वास्तविक अनुभव, एकजुटता का एक कारवां, एक पवित्र तीर्थयात्रा" बनाता है।(इवांजेली गौडियम, 87)। पोप ने कहा कि वे अपने तरीके से विश्वविद्यालय में मुलाकात की इस संस्कृति के प्रवर्तक बन सकते हैं और इस प्रकार आतिथ्य, मेल-मिलाप, सुसमाचार के प्रति निष्ठा और पवित्रता की खोज में दृढ़ता की आयरलैंड की महान परंपराओं के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
इन्हीं भावों के साथ पोप ने उन्हें धन्य कुँवारी मरियम के मातृत्व में समर्पित करते हुए विश्वविद्यालय परिसर के केंद्र में आस्था और मित्रता का समुदाय बनाने हेतु प्रेरित किया और अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

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