येसु का अनुसरण करते हुए अपना काम जारी रखें, पोप फ्रांसिस।

संत  पापा फ्राँसिस ने सोमवार 1 मार्च को वाटिकन के संत क्लेमेंटीन सभागार में फ्लोरेंस से आये फ्रांसिस्कन सोलिडारिटी सेंटर के प्रतिभागियों का स्वागत किया। संत पापा ने सेंटर की निदेशिका, मारिया यूजेनिया राल्लेटो को उनके परिचय भाषण के लिए धन्यवाद दिया।

संत पिता फ्राँसिस ने कहा, ʺकई वर्षों से, फ्लोरेंस शहर में, आप ऐसे लोगों की सुनने और उनके साथ रहने की एक अनमोल सेवा कर रहे हैं, जो खुद को कठिन आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में पाते हैं: जिन परिवारों को विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, बुजुर्ग या अक्षम लोग जिन्हें सहायता और साहचर्य चाहिए। सबसे पहले, मैं आपको इसके लिए "धन्यवाद" कहना चाहूंगा। एक ऐसी दुनिया में, जो दो गति से चलती है, जो एक ओर धन का उत्पादन करती है, लेकिन दूसरी ओर, असमानता को उत्पन्न करती है, आप स्वैच्छिक कार्य के आधार पर सहायता के एक प्रभावी कार्य हैं और विश्वास की नजर में, आप उन लोगों में से हैं जो ईश्वर के राज्य का बीज बोते हैं।ʺ

संत पिता फ्राँसिस ने कहा कि दरअसल, अपने पिता के राज्य की घोषणा करने के लिए येसु इस दुनिया में मनुष्य बनकर आये। उन्होंने खुद को गरीबों के करीब रखा, जो हाशिए पर थे और समाज से त्याग दिए गए थे, उन्हें निराशा में और शोषितों के लिए छोड़ दिया गया था। संत पिता फ्राँसिस, संत मत्ती के सुसमाचार के उन वचनों की याद दिलाते हैं जहाँ येसु कहते हैं : "मैं भूखा था और आपने मुझे खाना दिया, मैं प्यासा था और आपने मुझे पिलाया,... मैं नंगा था और आपने मुझे कपड़े पहनाए" (मत्ती 25:35-36)। इस प्रकार, मसीह ने हमारे लिए परमेश्वर के हृदय को प्रकट किया है: वह एक पिता है जो अपने प्रत्येक पुत्र और पुत्रियों की गरिमा की रक्षा और संवर्धन करना चाहते हैं । वे हमें मानवीय, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का निर्माण करने के लिए कहते है ताकि किसी के मौलिक अधिकारों का हनन न हो या उसे रौंदा न जाए। किसी को भी भौतिक रोटी की कमी या अकेलेपन से पीड़ित नहीं होना चाहिए।

संत पिता फ्राँसिस ने कहा कि असीसी के संत फ्रांसिस के वैश्विक बंधुत्व की गवाही उनके कार्यों में झलकती है। संत फांसिस ने  "हर जगह शांति का बीजारोपण किया और गरीबों, परित्यक्तों, बीमारों, परित्यक्तों" के साथ-साथ चले। (फ्रातेल्ली तुत्ती 2)  उनके उदाहरण का अनुसरण करने की कोशिश करते हुए, आप लगभग चालीस वर्षों से अपनी सेवा दे रहे हैं, जो आशा का एक ठोस संकेत है और शहर के व्यस्त जीवन में विरोधाभास का संकेत भी है, जहाँ कई लोग अपनी गरीबी और पीड़ा में खुद को अकेला पाते हैं। एक संकेत जो निष्क्रिय विवेक पैदा करता है और हमें अपनी उदासीनता से बाहर आने के लिए आमंत्रित करता है, साथ ही जो पीड़ा में हैं, उनके प्रति दया दिखाने और जो जीवन के भार से दबे हुए हैं उन्हें कोमलता के साथ उपर उठाने की प्रेरणा देता है।

संत पिता फ्राँसिस ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए साहस के साथ जारी रखने हेतु प्रेरित किया। संत पापा ने उनके लिए ईश्वर के सामर्थ्य के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा, ʺहम जानते हैं कि हमारा अच्छा दिल और हमारी मानवीय ताकत पर्याप्त नहीं है। इन चीजों को करने से पहले और उससे परे, जब हम एक गरीब व्यक्ति का सामना करते हैं तो हम उस गरीब को अपने भाई या बहन के रुप में देख पाते है और यह संभव है क्योंकि मसीह उस व्यक्ति में उपस्थित है। संत पिता फ्राँसिस ने संत फ्रांसिस असीसी की मध्यस्ता द्वारा उनके लिए प्रार्थना करने का आश्वासन दिया।

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