यूक्रेन में युद्ध के पीड़ितों के लिए ईश्वर रोते हैं, पोप 

पोप फ्राँसिस ने इटली के बेरगमो त्रेविलियो से आये "आँसुओं की माता मरियम" प्रेरितिक समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की। पोप ने याद किया कि मॉस्को और कीव के बीच संघर्ष "विजयी लोगों" और "पराजित लोगों" के रूप में सबको नष्ट कर रहा है।
पोप फ्राँसिस ने शनिवार 23 अप्रैल को वाटिकन के संत पापा पौल षष्टम सभागार में इटली के बेरगमों त्रेविलियो से आये "आँसुओं की माता मरियम" प्रेरितिक समुदाय के करीब 2800 सदस्यों से मुलाकात की। पोप ने इतना बड़ी संख्या में उपस्थिति देखकर खुशी व्यक्त करते हुए वाटिकन में उनका स्वागत किया। पोप ने परिचय भाषण के लिए पल्ली पुरोहित फादर नोर्बेर्तो को धन्यवाद दिया।
पोप ने कहा कि त्रेविलियो की "आँसुओं की माता मरियम", इस उपाधि वाला एकमात्र तीर्थालय नहीं है। उन्होंने सिसिली स्थित सिराकुसा की आँसुओं की माता मरियम और ला सालेट्टे की आँसुओं की माता मरियम को याद किया। लेकिन त्रेविलियो के "आँसुओं की माता मरियम" का तीर्थालय पांच सौ साल पुराना है।
पोप ने कहा कि माता मरियम के आँसू येसु के आँसुओं के प्रतिबिंब हैं। येसु के रोने की घटना हम सुसमाचार में दो बार पाते हैं।  येसु अपने मित्र लाजरुस की कब्र के सामने रोये थे (सीएफ योहन 11:35) और दूसरी बार येसु ने येरुसालेम को देखा और रो पड़े (सीएफ लूकस,19:41)। दोनों ही मामलों में वे दर्द के आंसू थे। लेकिन हम कल्पना कर सकते हैं कि येसु ने भी खुशी से रोया, उदाहरण के लिए जब उसने छोटे बच्चों को देखा और उन दीन लोगों को जो उत्साह के साथ सुसमाचार का स्वागत करते थे।
मरियम, माता, पहली शिष्या हैं। उसने हर चीज में पुत्र का अनुसरण किया, यहां तक ​​कि भावनाओं, की पवित्रता में, हंसी और आंसुओं में भी। निश्चय ही उसकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े, जब उसने येसु को बेतलेहेम के गौशाले में जन्म दिया और जब उसने चरवाहों और ज्ञानियों को बालक के सामने झुकते और दंडवत करते देखा और अंत में मरिया ने कड़वे आँसू बहाये, जब वो क्रूस के मार्ग पर येसु के पीछे चल रही थी और जब वह क्रूस के नीचे खड़ी थी।
पोप ने कहा कि माता मरिया के आँसू मसीह की कृपा से बदल गए थे, क्योंकि उनका पूरा जीवन, उनका पूरा अस्तित्व, उद्धार के रहस्य में पुत्र के साथ पूर्ण मिलन में बदल गया है। इसलिए जब माता मरियम रोती है, तो उसके आंसू परमेश्वर की करुणा का, हमारे पापों के लिए मसीह के दर्द का संकेत हैं, जो मानवता को विशेष रूप से छोटों और  निर्दोषों को पीड़ित करती है।
पोप ने फादर नोर्बेर्तो की बातों से सहमत होते हुए कहा कि माता मरियम के आंसू भी यूक्रेन को नष्ट करने वाले युद्ध के पीड़ितों के लिए ईश्वर के आंसू के संकेत हैं। हमने अपनी निवेदन प्रार्थना माता मरियम के निष्कलंक हृदय को अर्पित किया है और हमें यकीन है कि माता ने उन्हें स्वीकार किया है और शांति के लिए प्रार्थना की है, वे शांति की महारानी हैं।
पोप ने कहा कि उनकी भूमि माता मरियम के आंसुओं से पांच शताब्दियों से सींची जा रही है और  पीढ़ी-दर-पीढ़ी वे माता मरियम की ममतामयी कोमलता का अनुभव करते आ रहे हैं। पोप ने कहा कि हमें रोने में शर्म नहीं करनी चाहिए, माता मरिया के आँसू हमें सिखाती है कि हमें रोने में शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। आँसू एक उपहार हैं, अनुग्रह, पश्चाताप, दिल की मुक्ति के आँसू। रोने का अर्थ है खुद को खोलना, अपने अंदर बंद अहंकार को तोड़ना और उस प्रेम को खोलना जो हमें गले लगाता है, जो हमेशा हमें क्षमा करने की प्रतीक्षा करता है। पिता ईश्वर के लिए और भाइयों के लिए भी खुद को खोलें। रास्ते में मिलने वाले लोगों के घावों से खुद को प्रभावित होने दें, आनन्दित लोगों के साथ आनन्द मनायें और रोनेवालों के साथ रोयें।
पोप ने उनके समुदाय के नाम "आँसुओं की माता मरियम" की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस नाम में एक संपूर्ण प्रेरितिक देखभाल नीहित है: कोमलता, करुणा, निकटता की प्रेरितिक देखभाल। एक ऐसी प्रेरितिक शैली, जिसमें सभी उम्र के पुरोहित, डीकन, समर्पित और लोकधर्मी सम्मिलित हैं। हम सभी को हमेशा माता मरियम से येसु का अनुसरण करना सीखना चाहिए। हमारी भावनाओं, हमारी इच्छाओं, हमारी योजनाओं और हमारे कार्यों को ईश्वर के हृदय के अनुसार ढालने देना चाहिए।

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