यूक्रेनी सैनिकों की पत्नियों ने पोप से मदद की अपील की

दो यूक्रेनी महिलाएँ, जिनके पति रूसी आक्रमण से अपनी मातृभूमि की रक्षा करने में संघर्ष कर रहे हैं, पोप फ्राँसिस से मिले और पत्रकारों को मारियुपोल के स्टील प्लांट में अपने पतियों की दुर्दशा के बारे बतलाया।
कथेरिना प्रोकोपेंको और युलया फेडोसियुक ने वाटिकन में बुधवार को आमदर्शन समारोह के दौरान पोप से मुलाकात की।  
उनके सैनिक पतियों को अज़ोवस्टल स्टील प्लांट में छुपाया गया है, जो मारियुपोल में यूक्रेनी सेना का आखिरी ठिकाना है और जो भारी रूसी गोलाबारी का केंद्र बन गया है। दोनों महिलाओं ने पोप से मुलाकात कर उनसे मदद की अपील की।
कथेरिना और युलिया कीव और लवीव की हैं जो शरणार्थी के रूप में जर्मनी जा रही हैं। उन्होंने स्टील प्लांट में लड़ रहे यूक्रेनी सैनिकों की 500 पत्नियों के प्रतिनिधियों के रूप में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि उनका दिल चिंता से भारी है।
पोप से मुलाकात के बारे यूलिया ने कहा, "मैं कह नहीं सकती कि मैंने क्या महसूस किया। मैं थोड़ा घबराई हुई थी क्योंकि यह ऐतिहासिक पल था और हम सब आशा कर रहे हैं कि यह हमारे पतियों एवं अजोवस्ताल के सैनिकों के जीवन की रक्षा करने में मदद देगा। हमें उम्मीद है कि यह मुलाकात हमें उनके जीवन को बचाने का अवसर देगा।"
उन्होंने अपनी उम्मीद जतायी कि यूक्रेन के सैनिकों को मारियुपोल से दूसरे देश में निकाला जा सकेगा। सैनिकों का कहना है कि यदि पर्याप्त गारांटी दी जाती है तो वे अपने हथियार रखने के लिए तैयार हैं।     
युलिया ने कहा, "मैं आशा करती हूँ कि हम सभी उनकी मदद करने के लिए तैयार हैं, हम उन्हें बचाने के लिए सब कुछ करेंगे।"
यूक्रेनी महिलाओं ने कहा कि उन्होंने पोप से अंग्रेजी में बात की और उन्हें अजोवस्टाल में स्थिति के बारे विस्तार से बतलाया, जहाँ करीब 700 सैनिक घायल हैं।  
उन्होंने बतलाया कि कई लोगों की मौत हो गई है किन्तु उन्हें ख्रीस्तीय तरीके से नहीं दफनाया जा सका है। उनके शरीर इस्पात संयंत्र के सुरंग में विघटित हो रहे हैं।
महिलाओं ने कहा कि कई नागरिक वहां फंसे हुए हैं, जिनमें ज्यादातर सैनिकों के परिवार हैं, जिन्हें निकाला जाना है। उन्हें डर है कि उनके पतियों को प्रताड़ित किया जाएगा और उन्हें मार दिया जाएगा।
सैनिकों को कम भोजन, पानी और चिकित्सा आदि के साथ आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ रहा है। बंदरगाह शहर पर रूस के व्यापक गोलाबारी अभियान के कारण मारियुपोल में कोई सक्रिय अस्पताल नहीं है।
एक सैनिक ने मंगलवार को अपनी पत्नी को फोन किया। उसने कहा कि वह उसकी जान बचाने के लिए कुछ भी करेगी।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "बहुत घबराहट होने के लिए मैं माफी मांगती हूँ। मेरे पति ने एक लेख पढ़ने को कहा कि पानी के बिना लम्बे समय तक किस तरह रहा जा सकता है। यही उनकी स्थिति है।
कथेरिना और युलया ने पोप से मदद की मांग की ताकि मारियुपोल में फंसे लोगों को बाहर निकाले जाने के लिए मानवीय गालियारा बनाया जा सके।  
पोप ने उन्हें अपनी प्रार्थनाओं का आश्वासन दिया तथा उनके साथ हाथ मिलाया। उन्होंने पोप को यूक्रेन की प्रेरितिक यात्रा करने का निमंत्रण दिया अथवा "क्रूर" युद्ध के अंत के लिए मध्यस्थता करने हेतु रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करने का आग्रह किया।
दो यूक्रेनी महिलाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि "एक मजबूत गठबंधन" का निर्माण करें जो मारियुपोल सैनिकों और नागरिकों को तीसरे देश तक पहुंचने में मदद दे।
किस देश में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "यह निर्भर करेगा कि कौन उन्हें लेने का साहस करेगा। यह तुर्की, स्वीजरलैंड या कोई दूसरा देश हो सकता है जो पहले उन्हें निकालना, मदद करना और बचाना चाहे। हम उसके लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि हमारे पति कहीं जा सकेंगे, तो हम भी उनके साथ जायेंगे। उसके बाद यूक्रेन और कीव जायेंगे जिसे हम प्यार करते हैं। यह हमारे लिए महत्वपूर्ण है, हम शरणार्थी बनकर रहना नहीं चाहते।"

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