मिशन सोसाईटी से पोप ˸ निष्ठावान, साहसी और रचनात्मक बनें

पोप फ्राँसिस ने परमधर्मपीठीय मिशन सोसाईटी को प्रेषित एक संदेश में सदस्यों से कहा है कि अपने मिशन की निरंतरता और पूर्णता के लिए पौलीन जारिकोट द्वारा बताए गए मार्ग पर आगे बढ़ें।
फ्राँसीसी शहर लेयोन में परमधर्मपीठीय मिशन सोसाईटी की स्थापना की 200वीं जयन्ती मनाने हेतु एकत्रित सदस्यों को प्रेषित अपने संदेश में पोप ने कहा, "इस विशेष वर्ष में आप लेयोन शहर में एकत्रित हैं, जहाँ परमधर्मपीठीय मिशनरी सोसाईटी की स्थापना हुई थी और जहाँ पौलिन जारिकोट की धन्य घोषणा की जायेगी।"
पौलीन जारिकोट एक फ्राँसिसी लोकधर्मी महिला थीं जिन्होंने मिशनरी जीवन के लिए बुलाहट को पहचाना तथा "विश्वास के प्रचार" हेतु एक संघ की स्थापना की। इस संघ को सन् 1823 में संत पापा पीयुस 7वें ने अनुमोदन दिया।
अपने संदेश में पोप फ्राँसिस ने विश्वास के प्रचार हेतु गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ की 400वीं वर्षगाँठ पर प्रकाश डाला, जिससे मिशनरी कार्य नजदीकी से जुड़ा है और जिसका वे कलीसिया का समर्थन करते हुए सहयोग करते हैं।
विश्वास का प्रचार (प्रोपागंडा फिदे), अब तक अज्ञात स्थानों में सुसमाचार के प्रचार को समर्थन एवं सहयोग देने के लिए स्थापित किया गया था, किन्तु कलीसिया में सुसमाचार प्रचार का जोर कभी कम नहीं हुआ है और इसकी मौलिक गतिशीलता हमेशा बनी हुई है।  
पोप ने कहा, "मेरी इच्छा है कि नवीकृत रोमी परमाध्यक्षीय कार्यालय में (रोमन कूरिया) सुसमाचार प्रचार विभाग, कलीसिया के मिशनरी बदलाव को बढ़ावा देने हेतु एक विशेष भूमिका अदा करे, जो धर्मांतरण नहीं बल्कि साक्ष्य है, हमारे लिए ईश्वर के मुफ्त एवं मुक्तिदायी प्रेम की घोषणा अपने जीवन से हमारे भाइयों एवं बहनों के बीच करने हेतु अपने आप से बाहर निकलना है।"
पोप ने गौर किया कि सभा लेयोन में चल रही है क्योंकि यही वह स्थान है जहाँ 200 वर्षों पहले एक 23 साल की युवती पौलीन मरिया जारिकोट ने एक संघ की स्थापना करने का साहस किया था ताकि कलीसिया के मिशनरी कार्यों को मदद दी जा सके।
उन्होंने याद किया कि "कुछ सालों बाद उन्होंने एक जीवित रोजरी की शुरूआत की जिसको प्रार्थना एवं दान देने करने के लिए समर्पित किया गया है।"  
पोप ने कहा कि वह एक धनी परिवार की थी किन्तु गरीबी में मरी। उसकी धन्य घोषणा द्वारा कलीसिया बतलाना चाहती है कि वह "स्वर्ग में किस तरह पूँजी जमा करना है उसे जानती थी।" (मती. 6:19), पूँजी देने के साहस से जमा होता है तथा जीवन के रहस्य को खोलता है, उसे सिर्फ देने के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है, खोने के द्वारा ही उसे पाया जा सकता है। (मार.8,35)
पोप ने संदेश में लिखा, "पौलिन जारिकोट कहना चाहती हैं कि कलीसिया स्वभाव से मिशनरी है अतः हर बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति का एक मिशन है।"
पोप के साथ और पोप के नाम पर परमधर्मपीठीय मिशन सोसाईटी का कार्य धर्माध्यक्षों, कलीसियाओं एवं ईश्वर की सारी प्रजा की सेवा है।
उन्होंने कहा, "साथ ही, समिति के अनुसार, आपका कार्य धर्माध्यक्षों को, प्रत्येक स्थानीय कलीसिया को, विश्वव्यापी कलीसिया के क्षितिज तक खोलने में मदद करता है।"
पोप ने कहा कि जुबिली मनाया जाना एवं पौलीन जारिकोट की धन्य घोषणा उन्हें तीन चीजों पर प्रकाश डालने के लिए अवसर प्रदान कर रहा है। पवित्र आत्मा ने परमधर्मपीठीय मिशन सोसाइटी के इतिहास में सुसमाचार प्रचार हेतु बहुत बड़ा योगदान दिया है।

पहला ˸ मिशनरी बदलाव। मिशन की अच्छाई, अपने आपसे बाहर निकलने की यात्रा पर निर्भर करती है, अपने आप पर आत्मकेंद्रित नहीं बल्कि येसु पर केंद्रित होने की चाह के द्वारा जो सेवा कराने नहीं बल्कि करने आये। इस अर्थ में उन्होंने पौलीन जारिकोट का उदाहरण दिया, जिन्होंने अपने अस्तित्व को, दुनिया की राहों पर ईश्वर की करुणा एवं कोमलता प्रकट करने के माध्यम के रूप में देखा।  

दूसरा ˸ प्रार्थना। पोप ने कहा कि यह सिर्फ प्रार्थना के द्वारा संभव है क्योंकि प्रभु का आत्मा हमें भले कार्यों को करने के लिए शक्ति प्रदान करते हैं।

अंततः परोपकार के ठोस कार्य। प्रार्थना के साथ-साथ पौलीन ने एक वृहद स्तर पर दान संग्रह पर जोर दिया, साथ ही मिशनरियों के कार्यों एवं जीवन की जानकारी प्रस्तुत की।
पोप ने अपने संदेश के अंत में अपनी इच्छा जाहिर की कि परमधर्मपीठीय मिशन सोसाईटी के सदस्यों की महासभा, इस महान मिशनरी महिला द्वारा दिखाये गये रास्ते पर चले तथा अपने आप को उनके ठोस विश्वास, साहसिक कार्य और उदार रचनात्मकता से प्रेरित होने दे।”

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