मरियम का स्वर्गोदग्रहण महापर्व ˸ मरियम हमारा हाथ पकड़कर ले चलती हैं

कुँवारी मरियम के स्वर्गोदग्रहण महापर्व के अवसर पर पोप फ्राँसिस ने कुँवारी मरियम की महानता पर चिंतन किया और कहा कि उन्हें महिमा में देखते हुए हम समझते हैं कि सच्ची शक्ति है सेवा, एवं राज करने का अर्थ है प्रेम करना, और यही स्वर्ग का चौड़ा रास्ता है। वे हम प्रत्येक को हाथ पकड़कर ले चलतीं और हमें खुश होने का निमंत्रण देती हैं।
15 अगस्त, कुँवारी मरियम के स्वर्गोदग्रहण महापर्व और भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पोप फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात, खुश पर्व।
आज, कुँवारी मरियम के स्वर्गोदग्रहण का महापर्व, सुसमाचार पाठ हमारे लिए उनके और उनकी कुटुम्बनी एलिजाबेथ के बीच वार्तालाप को प्रस्तुत करता है। जब मरियम ने घर में प्रवेश किया और एलिजाबेथ ने उनका अभिवादन किया, तब एलिजाबेथ ने कहा, "आप नारियों में धन्य हैं और धन्य है आपके गर्भ का फल।" (लूक.1,42) ये शब्द जो विश्वास, आनन्द और विस्मय से पूर्ण हैं "प्रणाम मरिया" प्रार्थना के भाग बन गये हैं। जब कभी हम इस प्रार्थना को करते हैं, जो अत्यन्त सुन्दर और प्रचलित है, हम भी एलिजाबेथ के समान मरियम का अभिवादन करते एवं उन्हें धन्य कहते हैं क्योंकि उन्होंने येसु को हमारे लिए धारण किया।
मरियम एलिजाबेथ के अभिवादन को स्वीकार करती है और एक भजन के द्वारा इसका उत्तर देती है जिसको हम "आशा का गीत" कह सकते हैं। यह उन महान कार्यों के लिए प्रशंसा और उल्लास का गीत है जिनको प्रभु ने किया है, किन्तु मरियम आगे जाती हैं ˸ वे ईश्वर के कार्यों को अपने लोगों के पूरे इतिहास में चिंतन करती हैं। वे कहती हैं, "उसने अपना बाहुबल प्रदर्शित किया है, उसने घमंडियों को तितर-बितर कर दिया है। उसने शक्तिशालियों को उनके आसनों से गिरा दिया और दीनों को महान बना दिया है। उसने दरिद्रों को सम्पन्न किया और धनियों को खाली हाथ लौटा दिया है।” (पद. 52-53)
पोप ने कहा, "जब हम ऐसे शब्दों को सुनते हैं तो हम अपने आपसे पूछ सकते हैं ˸ क्या कुँवारी मरियम अतिशयोक्ति नहीं कर रही हैं, एक ऐसी दुनिया का जिक्र करते हुए जो है ही नहीं? निश्चय ही वे जो कहती हैं वास्तविक नहीं लगता; वे कहती हैं कि शक्तिशाली अपने आसनों से गिरा दिये गये हैं ˸ जबकि उदाहरण के लिए भयांकर हेरोद अपने गद्दी पर ही थे। गरीब और भूखे भी वैसे ही हैं जबकि धनी समृद्ध होते जा रहे हैं।"
तो मरियम के भजन का क्या अर्थ है? वे समय का कालक्रम प्रस्तुत करना नहीं चाहतीं, बल्कि हमें कुछ और महत्वपूर्ण बताने का इरादा रखती हैं ˸ कि ईश्वर ने उनके द्वारा ऐतिहासिक मोड़ का उद्घाटन किया है, उन्होंने चीजों को नये रूप में स्थापित किया है। वे, जो छोटी और दीन हैं, ऊपर उठायी गई हैं – जिसको हम आज मना रहे हैं –वे स्वर्ग की महिमा तक पहुँचायी गई हैं, जबकि दुनिया के शक्तिशालियों को खाली हाथ लौटा दिया गया है। दूसरे शब्दों में माता मरियम एक क्रांतिकारी परिवर्तन की घोषणा करती है, मूल्यों को बदलने की। जब मरियम अपने गर्भ में येसु को धारण किये हुए एलिजाबेथ से बात करती है, तब वह उन बातों को कहती है जिनको उनके पुत्र कहेंगे। वे गरीबों और दीनों को धन्य घोषित करेंगे, और अमीरों तथा उन लोगों को चेतावनी देंगे जो खुद पर भरोसा करते हैं। उसके बाद कुँवारी मरियम भविष्यवाणी करती हैं कि शक्ति, सफलता और धन की नहीं बल्कि सेवा, विनम्रता और प्रेम की जीत होगी। उन्हें महिमा में देखते हुए, हम समझते हैं कि सच्ची शक्ति सेवा में है और राज करने का अर्थ है प्रेम करना। और यही स्वर्ग का रास्ता है।
पोप ने चिंतन हेतु प्रेरित करते हुए कहा, "हम अपने आप पर गौर करते हुए पूछ सकते हैं क्या मरियम की यह विपरीत घोषणा मेरे जीवन को प्रभावित करती है? क्या मैं मानता हूँ कि प्रेम करने का अर्थ है राज करना और सेवा करने का अर्थ शक्ति? क्या मेरे जीवन का उद्देश्य स्वर्ग है? अथवा क्या मैं केवल दुनियावी, भौतिक चीजों के लिए चिंतित हूँ? क्या मैं दुनिया की घटनाओं को देखकर खुद को निराशावाद के जाल में फँसने देता हूँ? या कुँवारी मरियम के समान सज्जनता एवं दीनता में ईश्वर के कार्यों की परख कर सकता हूँ?"
आज मरियम आशा का गीत गाती हैं और हमारे बीच आशा को पुनः जगाती हैं। उनमें हम अपनी यात्रा के अंतिम लक्ष्य को देखते हैं। वे पहली सृष्टि हैं जिन्होंने अपने पूरे अस्तित्व, शरीर और आत्मा के साथ, विजयी रूप में स्वर्ग की अंतिम रेखा को पार किया है। वे दिखलाती हैं कि स्वर्ग पहुँचा जा सकता है, यदि हम पाप के लिए जगह नहीं देते, यदि हम दीनता से ईश्वर की स्तुति करते और दूसरों की उदारता पूर्वक सेवा करते हैं। वे हमारी माता हैं और हमारा हाथ पकड़कर ले चलती हैं, हमें महिमा में हमारा साथ देतीं हैं, जब हम स्वर्ग के बारे सोचते हैं तो हमें आनन्दित होने का निमंत्रण देती हैं।  
पोप ने माता मरियम से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, "आइये हम माता मरियम को हमारी प्रार्थना से धन्य करें और उनसे नबी के दृष्टिकोण की याचना करें, जिसके द्वारा हम धरती पर स्वर्ग का दर्शन कर पायेंगे।"
इतना कहने के बाद पोप ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

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