पोप : रिश्तों की सुन्दरता पीढ़ियों को जोड़ती

पोप फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर धर्मग्रंथ की रूथ के जीवन की चर्चा करते हुए सास-बहू के संबंध की ओर ध्यान आकर्षित कराया।
पोप फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस के प्रांगण में जमा हुए सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को संबोधित करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।
हम बुजुर्गों, दादा-दादियों, बुढ़ापा जो सुनने में आज अच्छा नहीं लगता पर अपनी धर्मशिक्षा माला जारी रखते हैं। आज हम रूथ के अद्वितीय ग्रंथ से अपने को प्रभावित होने देंगे, जो धर्मग्रंथ बाईबल का एक श्रृंगार है। रूथ का दृष्टांत अपने में पारिवारिक संबंध की सुन्दरता को व्यक्त करता है, जो दंपतियों के संबंध में उत्पन्न होता है, लेकिन यह इस दंपत्य जीवन से परे जाता है। प्रेम का बंधन समान रूप से मजबूत होने में सक्षम है, जहां हम प्रेम के मौलिक बहुफलक को पारिवारिक जीवन में चमकता हुआ पाते हैं। प्रेम का यह व्याकरण हमारे लिए जीवन का आधार बनता और हमारे संबंधों में प्रज्ञा उत्पन्न करता है जिसके द्वारा समुदाय का निर्माण होता है। सुलेमान के सर्वश्रेष्ठ गीत से तुलना करने पर हम रूथ के ग्रंथ को वैवाहिक प्रेम की सूची में दूसरे पायदान पर पाते हैं। यह हमारे लिए उतना ही महत्वपूर्ण और उतना ही जरुरी है, वास्तव में, हम इसमें उसी शक्ति और काव्य के समावेश को पाते हैं जो पीढ़ी, रिश्तेदारी, समर्पण, निष्ठा के बंधन को अपने में पिरो कर रखती है जो पूरे परिवार का नक्षत्र है। यह दंपतियों के जीवन में प्रेम की एक अकल्पनीय शक्ति को पुनः एक नये सिरे से जोड़ने की क्षमता रखता और उन्हें भविष्य के लिए आशा से भर देता है। उसे लाने में सक्षम हो जाते हैं, जो उनकी आशा और भविष्य को फिर से शुरू करने में सक्षम हैं।
हम विवाह द्वारा गढ़े गये पारिवारिक संबंधों के बारे में, विशेष रूप से सास और बहू के बीच, इस संभावना के विपरीत बातों को पाते हैं। यही कारण है कि ईश्वर का वचन हमारे लिए अनमोल हो जाता है। विश्वास की प्रेरणा पूर्वाग्रहों के विपरीत साक्षी के एक क्षितिज को खोल सकती है, जो पूरे मानव समुदाय के लिए एक मूल्यवान दिशा होती है। संत पापा ने कहा कि मैं आपको रूथ की पुस्तक को फिर से खोजने के लिए आमंत्रित करता हूँ, विशेष रूप से, प्रेम और परिवार पर मिलनेवाली धर्मशिक्षा में चिंतन करने के लिए।
इस छोटी पुस्तिका में हम पीढ़ियों के लिए विधान की एक कीमती निधि को भी पाते हैं जहाँ युवा अपनी परिपक्व उम्र में उत्साह में बने रहने को सक्षम होते हैं, तो वहीं वृद्धावस्था घायल युवाओं के भविष्य को फिर से खोलने के योग्य होता है।  दो बेटों की मां बुजुर्ग नोएमी, हालांकि अपनी बहुओं के प्रति स्नेह से भरी हैं, लेकिन वह परदेश में उनके भविष्य को लेकर सकारात्मक नहीं है, अतः वह उन्हें अपने वतन, अपने लोगों के पास लौटने को प्रोत्साहित करती है जिससे वे अपने जीवन का निर्माण कर सकें। वह उनसे कहती है, “मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर सकती हूँ”। हम इसमें पहले ही प्रेम को सम्माहित पाते हैं, एक बुजुर्ग नारी जिसका कोई पति नहीं है और न ही संतान, अपनी बहूओं को इस बात के लिए बाध्य करती है कि वे उसे छोड़ कर लौट जायें। हलांकि यह हमारे लिए एक तरह से परित्याग को भी व्यक्त करता है, एक पति की सुरक्षा के बिना परदेशी विधवाओं का अनजान देश में कोई भविष्य नहीं था। रूथ उदारतापूर्ण इस सुझाव का इनकार करती है। उनके बीच जो संबंध स्थापित हुआ था वह ईश्वर की आशीष से पोषित किया गया था- नोएमी इसे छोड़ने का निवेदन नहीं कर सकती है। पहले दृष्टिकोण में नोएमी इस संबंध में खुशी का अनुभव करने के बदले एक तरह से इसका परित्याग के रुप में देखती है शायद यह सोचते हुए कि यह विचित्र संबंध दोनों के लिए जोखिम को बढ़ा देगा। कुछ परिस्थतियों में, बुजुर्गं के निराशावाद का सामना हम युवाओं को दबावी स्नेह से करने की जरुर है।
वास्तव में, नोएमी, रूथ के समर्पण से ओत-प्रोत, अपनी निराशा से बाहर निकलती और रूथ के एक नये भविष्य के लिए पहल करती है। वह अपने बेटे की विधवा पत्नी को दिशा-निर्देश देते हुए प्रोत्साहित करती है जिससे वह इस्रराएल में अपने लिए एक नये पति को प्राप्त करे। बोआज, अपने कार्यकर्ताओं से नोएमी की रक्षा करता और उसके प्रति अपनी सज्जनता को व्यक्त करता है, यह एक जोखिम है जो आज भी देखने को मिलती है।
रूथ एक नये वैवाहिक जीवन में प्रवेश करती है और उसकी दुनिया में अमन-चैन लौट आती है। इस्रराएल की नारियाँ नोएमी को रूथ के बारे में कहती हैं कि एक परदेशी के रुप में “वह सात पुत्रों के बराबर है” और कि उसके वैवाहिक जीवन में ईश्वर की आशीष बनी रहेगा। नाओमी अपनी बुजुर्गावस्था में अपने को नई पीढ़ी में मिलने वाली खुशी का अनुभव करती है। हम इस बात को देख सकते हैं कि उस बुजुर्ग महिला के परिवर्तन अपने में कितने “चमत्कारों” को पूरा करता है। वह एक पीढ़ी के घालय होने और परित्याग करने की जोखिम से अपने को ऊपर उठाती और विधान की ओर लौट आती है। पुनर्निर्माता वही हैं, जो सामान्य पूर्वाग्रहों द्वारा खींची गई संभावना के आधार पर, अपरिवर्तनीय सकारात्मक परिस्थितियाँ के जनक होते हैं। इसके बदले, विश्वास और प्रेम हमें उन पर विजय होने में मदद करता है। सास अपने बेटे के प्रति ईर्ष्या पर रुथ के नये जीवन को प्रेम करते हुए विजय होती है। रुथ के नये वैवाहिक जीवन को प्रेम करते हुए इस्रराएल की नारियाँ परदेशी के ऊपर अपने अविश्वास पर विजय होती हैं, यदि नारियाँ ऐसा कर पाती तो सभों के द्वारा हो सकता है। अकेली नारी की संवेदनशीलता पुरूष की शक्तिमय चेहरे के सामने प्रेम और सम्मानपूर्ण संबंध में सभी चीजों का मेल कराती है।

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