पोप फ्राँसिस ˸ 'मैं मोस्को में पुतिन से मिलने के लिए तैयार हूँ'

पोप फ्रांसिस ने इताली दैनिक समाचार पत्र कोरियेरे देल्ला सेरा के सम्पादक, लुचानो फोंताना को दिए एक साक्षात्कार में यूक्रेन में युद्ध के आलोक में कहा है कि "मुझे लगता है कि कीएव जाने से पहले मुझे मोस्को जाना चाहिए।"
पोप ने कहा, "मेरे घुटने में तकलीफ है; मुझे ऑपरेशन कराना होगा और उसके बाद देखेंगे...मैं लम्बे समय से ऐसा ही हूँ; चल नहीं पाता हूँ। एक समय था जब पोप कुर्सी पर बैठकर जाते थे। इसके लिए थोड़ी दीनता की जरूरत है।"
पोप ने यह बात इताली दैनिक समाचार पत्र कोरियेरे देल्ला सेरा के सम्पादक, लुचानो फोंताना से मुलाकात करने के लिए नहीं उठ पाने पर कही, जिनसे उन्होंने संत मर्था के प्रेरितिक आवास में एक साक्षात्कार के लिए मुलाकात की।  
साक्षात्कार यूक्रेन में युद्ध पर आधारित था जिसके लिए पोप फ्राँसिस 24 फरवरी को इसकी शुरूआत से ही अपील करते रहे हैं। उन्होंने इसके अंत हेतु कई बार मध्यस्थ बनने का प्रयास किया है। सबसे पहले उन्होंने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से फोन पर बात की, उसके बाद परमधर्मपीठ के लिए रूस के प्रेरितिक राजदूत से मुलाकात की और अब भी मोस्को जाकर राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करना चाहते हैं।
पोप ने कहा, "मैंने कार्डिनल परोलिन से युद्ध के 20 दिन बाद कहा कि वे पुतिन को एक संदेश भेजें कि मैं मोस्को जाना चाहता हूँ।"
उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति को पहले तिथि की एक खिड़की खोलनी होगी। "हमने अब तक कोई उत्तर नहीं पाया है और हम अब भी इसपर जोर दे रहे हैं, पर मुझे डर लगता है कि पुतिन इस समय ऐसी मुलाकात नहीं कर सकते और करना नहीं चाहते। पर इस क्रूरता को कैसे रोका न जाए? 25 सालों पहले रूवांडा में हमने इसी चीज का अनुभव किया था।"
पोप ने युद्ध के कारणों एवं हथियारों के व्यापार पर चिंतन करते हुए टिप्पणी की जो उनके लिए एक कलंक है जिसका थोड़े लोगों के द्वारा विरोध किया जाता है।  
उन्होंने "बढ़ते क्रोध" के बारे कहा कि शायद, "नाटो का रूस के दरवाजे पर भौंकने" से हुआ है जिसने क्रेमलिन को "बुरी तरह से प्रतिक्रिया देने और संघर्ष करने के लिए उत्तेजित किया।"
"मैं नहीं जानता किस तरह उत्तर दूँ – मैं बहुत दूर हूँ - सवाल यह है कि क्या यूक्रेन को आपूर्ति करना सही है? एक बात स्पष्ट है कि वहाँ हथियारों का परीक्षण हो रहा है। रूसी अब जानने लगे है कि टैंक ज्यादा फायदेमंद नहीं है और वे दूसरी चीजों के बारे सोच रहे हैं। इसी के लिए युद्ध छेड़ा जाता है ˸ ताकि उत्पादित हथियारों का परीक्षण किया जा सके। कुछ लोग इसके लिए लड़ रहे हैं किन्तु अधिक लोगों को इसके लिए लड़ना चाहिए।"   
पोप ने यमन में हथियार ले जानेवाले एक काफिले के जेनोआ में रोके जाने का भी हवाला दिया, जिसको बंदरगाह अधिकारियों ने "दो या तीन साल पहले" बंद कर दिया था।
पोप ने साक्षात्कार में बतलाया कि इस समय किएव की यात्रा की योजना नहीं बनी है बल्कि वे पहले मोस्को जाना चाहते हैं।  
हिंसा को रोकने के प्रयासों को देखते हुए पोप ने स्पष्ट किया कि "मैं अभी किएव नहीं जा रहा हूँ, मुझे लगता है कि मैं वहाँ न जाऊं। पहले मुझे मोस्को जाना चाहिए। पहले पुतिन से मुलाकात करनी चाहिए। लेकिन मैं भी एक पुरोहित हूँ, क्या कर सकता हूँ? मैं उतना ही करता हूँ जितना कर सकता। यह तभी संभव है जब पुतिन अपना द्वार खोलेंगे..."
पोप मोस्को को ऑर्थोडोक्स कलीसिया के प्राधिधर्माध्यक्ष के साथ काम करने की संभवना के रूप में देखते हैं।  
उन्होंने पिछले 15 मार्च को जूम के माध्यम से 40 मिनट की बातचीत और किरिल द्वारा उद्धृत युद्ध के लिए "औचित्य" का हवाला दिया, और जून में येरूसालेम में मुलाकात स्थगित होने की बात पर लौटे।
पोप ने साक्षात्कार में कहा, "मैंने सुना और उन्हें बताया। मैं इसे समझने में पूरी तरह असफल रहा। भाई हम राज पुरोहित नहीं है; हम राजनीति की भाषा का प्रयोग नहीं करते बल्कि येसु की भाषा बोलते हैं। हम एक ही परमपिता ईश्वर के धर्माध्यक्ष हैं। यही कारण है कि हम शांति की खोज करते, हथियारों को चलाने से रोकना चाहते। प्राधिधर्माध्यक्ष पुतिन के वेदी सेवक नहीं बन सकते। 14 जून को मेरी उनकी साथ येरूसालेम में एक मुलाकात होनेवाली थी। यह आमने-सामने हमारी दूसरी मुलाकात होती। इसका युद्ध से कोई संबंध नहीं है लेकिन अभी वे भी सहमत हैं ˸ कि हम प्रतीक्षा करें, यह एक अस्पष्ट संकेत हो सकता है।"
पोप की निगाह एक बार फिर युद्धग्रस्त दुनिया में लोगों के अधिकारों की बात करने के लिए चौड़ी हो गई, एक "तीसरा विश्व युद्ध" जिसका आह्वान किया गया और जिसका भय था।
पोप ने कहा कि वे चेतावनी नहीं दे रहे थे बल्कि चीजों को स्पष्ट कर रहे थे ˸ सीरिया, यमन, इराक, अफ्रीका में एक के बाद एक युद्ध। हरेक में कुछ न कुछ अंतरराष्ट्रीय फायदे हैं। आप कल्पना नहीं कर सकते कि एक स्वतंत्र देश दूसरे स्वतंत्र देश पर युद्ध कर सकता है। यूक्रेन में लगता है कि संघर्ष की शुरूआत किसी और ने की। यूक्रेन के लोगों को एक चीज के लिए दोष दिया जा सकता है कि उन्होंने डोनबास में प्रतिक्रिया दी किन्तु हम 10 साल पहले की बात कर रहे हैं। यह विवाद पुराना है। निश्चय ही, वे अभिमानी लोग हैं।  
इस संबंध में पोप पुण्य शुक्रवार के क्रूस रास्ता की ओर लौटे जो कोलोसेयुम में सम्पन्न हुआ तथा यूक्रेनी पक्ष के अनुरोधों के कारण तेरहवें स्थान के चिंतन को रद्द कर दिया गया। पोप ने बतलाया कि उन्होंने कार्डिनल क्राएस्की से बात की जो पास्का के लिए कीव में थे और संत पापा के भेजे जाने पर संघर्ष होने के समय से लेकर अब तक यह कीव में उनकी तीसरे यात्रा थी।
"मैंने क्राएस्की को फोन किया जो वहाँ थे और उन्होंने मुझे बतलाया, 'रोकिये, प्रार्थना को मत पढ़िये।' वे सही हैं यद्यपि हम पूरी तरह नहीं समझ सकते।' अतः वे मौन रहे। वे अतिसंवेदनशील हैं वे हारे हुए अथवा गुलाम महसूस करते हैं क्योंकि उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में बहुत कुछ चुकाया है। बहुत लोग मर गये हैं वे शहीद लोग हैं। किन्तु हमें भी सावधान रहना है कि ट्रांसनिस्ट्रिया में क्या होगा।
21 अप्रैल को वाटिकन में हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान के साथ अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा, हालांकि 9 मई इन सबका अंत हो सकता है। उन्होंने सुना है कि "रूसियों के पास एक योजना है।"  
"अतः कोई इन दिनों की वृद्धि की गंभीरता को भी समझेगा, क्योंकि अब यह केवल डोनबास, क्रिमिया, ओदेस्सा, यूक्रेन में काला सागर का तट मात्र नहीं है बल्कि सब कुछ ले लेना है। मैं निराशावादी हूँ किन्तु हमें युद्ध समाप्त करने की हरसंभव कोशिश करनी चाहिए।"  

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