पोप : प्रभु भले चरवाहे को सुनें और उनका अनुसरण करें

पोप फ्राँसिस ने प्रभु को सुनने का निमंत्रण दिया है जब वे हमें बुलाते हैं, उन्हें महसूस करना है कि वे हमें जानते हैं तथा उन्हें अपने भले चरवाहे के समान सुनना है। आज की धर्मविधि प्रभु और हम प्रत्येक के बीच प्रेमपूर्ण संबंध पर प्रकाश डालता है।
वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 8 मई को संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया, स्वर्ग की रानी प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।
आज की धर्मविधि का सुसमाचार पाठ, प्रभु और हम प्रत्येक के बीच के संबंध के बारे बोलता है। (यो.10,27-30)
येसु एक कोमल, एक सुन्दर छवि का प्रयोग करते हैं, चरवाहे की छवि जो अपनी भेड़ों के साथ है। उन्होंने इसकी व्याख्या तीन शब्दों में की है ˸ "मेरी भेड़ें मेरी आवाज पहचानती हैं, मैं उन्हें जानता हूँ और वे मेरा अनुसरण करती हैं।" (27) सुनना, जानना, अनुसरण करना। पोप ने कहा कहा, "आइये हम इन शब्दों पर गौर करें।"
सबसे पहले, भेड़ गड़ेरिये की आवाज पहचानती है। पहल हमेशा प्रभु की ओर से आती है; सब कुछ उनकी कृपा से शुरू होता है ˸ वे ही हैं जो हमें अपने साथ एक होने के लिए बुलाते हैं। किन्तु यह एकता तब उत्पन्न होती है जब हम सुनने के लिए अपने आपको खोलते हैं। सुनने का अर्थ है तत्परता, विनयशीलता, बातचीत के लिए समय देना। आज हम शब्दों से अभिभूत तथा हमेशा कुछ कहने एवं कुछ करने की जल्दी में रहते हैं। कई बार जब दो व्यक्ति बात करते हैं, एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के विचारों को पूरी तरह व्यक्त करने देने का इंतजार नहीं कर सकता और बीच में ही बात को काट देता है। संत पापा ने कहा कि यदि आप दूसरे व्यक्ति को बात पूरी करने नहीं देते तो नहीं सुनते हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे समय की बुराई है। आज हम शब्दों से इतने भरे हैं हमारे पास हमेशा कहने के लिए शब्द होते हैं, हम मौन से डरते हैं।
अपने आपको सुनना कितना कठिन हैं, परिवार, स्कूल, कार्य स्थल पर और गिरजाघर में भी अंत तक सुनना। किन्तु प्रभु के लिए सबसे जरूरी बात है सुनना। वे पिता के शब्द हैं और ख्रीस्तीय सुननेवाले बच्चे हैं, अपने हाथ में ईश वचन को लेकर जीने के लिए बुलाये गये हैं। पोप ने चिंतन करने हेतु प्रेरित करते हुए कहा, "हम अपने आप से पूछे कि क्या हम सुननेवाले बच्चे हैं, क्या हम ईश वचन के लिए समय पाते हैं, क्या हम भाई-बहनों के लिए समय देते हैं?" जो दूसरों को सुनता है वह ईश्वर को भी सुनता है, उसी तरह जो ईश्वर को सुनता है वह दूसरों को भी सुनता है। और वह एक अत्यन्त खूबसूरत चीज का अनुभव करता है कि प्रभु स्वयं सुनते हैं। वे हमें सुनते हैं जब हम प्रार्थना करते, उनपर विश्वास करते, उन्हें पुकारते हैं।
येसु को सुनने के द्वारा हम पाते हैं कि वे हमें जानते हैं। दूसरा शब्द भले चरवाहे से संबंधित है। वह अपनी भेड़ों को जानता है। इसका अर्थ यह नहीं होता कि वे हमें बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। बाईबिल के अनुसार जानने का अर्थ है प्यार करना। इसका मतलब है कि जब प्रभु हमें अंदर से जानते हैं तो प्यार करते हैं। यदि हम उन्हें सुनते हैं तब हम पाते हैं कि प्रभु हमें प्यार करते हैं। इस तरह उनके साथ हमारे संबंध अवैयक्तिक, ठंढ़ा या मुखौटा नहीं रहता। येसु एक उत्साही मित्रता, दृढ़ता और संयुक्ति चाहते हैं। वे हमें एक नया और अनोखा ज्ञान देना चाहते हैं – कि हम हमेशा उनके द्वारा प्रेम किये जाए और इसलिए कभी अकेले नहीं छोड़ दिये जाते हैं। भले चरवाहे के साथ होने के द्वारा, व्यक्ति स्तोत्र के उस पद को महसूस करता है जिसमें कहा गया है, "यदि मुझे अंधेरी घाटी से होकर ही जाना क्यों न पड़े, मुझे किसी चीज का डर नहीं है क्योंकि तू मेरे साथ हैं।" (स्तोत्र 23:4)
सबसे बढ़कर पीड़ा में, प्रयासों में और संकट में, वे हमारा साथ देते हैं, वे उन सबके बीच से पार होते हुए हमारा साथ देते हैं। अतः कठिन परिस्थिति में, हम पा सकते हैं कि हम प्रभु द्वारा पहचाने एवं प्रेम किये गये हैं। अतः हम अपने आपसे पूछें : क्या मैं खुद को प्रभु को जानने देता हूँ? क्या मैं अपने जीवन में उनके लिए जगह बनाता हूँ? क्या मैं अपने जीवन को उनके सामने लाता हूँ? उनके सामीप्य, करुणा और कोमलता को कई बार महसूस करने के बाद उनके प्रति क्या विचार रखता हूँ? प्रभु निकट हैं वे एक भले चरवाहे हैं।
अंततः तीसरा शब्द है कि भेड़ अपने चरवाहे का अनुसरण करता है। जो ख्रीस्त का अनुसरण करता है वह क्या करता है? वह उसी रास्ते पर चलता है जिसपर वे चलते हैं। प्रभु उन भेड़ों को खोजने जाते जो खो गये हैं। (लूक. 15:4) वे उन लोगों पर रूचि रखते हैं जो दूर भटक गये हैं, उन लोगों की परिस्थिति को अपने हृदय के करीब रखते जो पीड़ित हैं, रोनेवालों के साथ रोना जानते हैं, अपने पड़ोसियों के लिए अपना हाथ बढ़ते हैं, और उन्हें अपने कंधे पर बिठाते हैं। और क्या मैं अपने आपको येसु को प्यार करने देता हूँ या क्या मैं उन्हें प्रेम करने और उनका अनुसरण करने से अपने आपको दूर कर लेता हूँ?
निष्कलंक कुँवारी मरियम हमें ख्रीस्त को सुनने, अधिक गहराई से जानने और सेवा के रास्ते पर उनका अनुसरण करने में मदद दे।

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