पोप : 'नए संत शांति के समाधान के लिए प्रेरित करें'

पोप फ्राँसिस ने विश्व नेताओं से एकबार फिर अपील की कि वे शांति के नायक बनें न कि युद्ध के।
पोप फ्राँसिस ने फिर से विश्व नेताओं को संवाद की संस्कृति को अपनाने का आह्वान किया। उनहोंने कहा कि वे शांति के नायक बनने का प्रयास करें, न कि युद्ध का।
पोप संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में संत घोषणा मिस्सा समारोह के बाद स्वर्द की रानी प्रार्थना के संबोधन के दौरान बोल रहे थे, जिसमें दुनिया भर से 50,000 से अधिक विश्वासीगण और साथ ही सरकारी प्रतिनिधिमंडल दस नए संतों का सम्मान करने के लिए एकत्रित थे।
पोप ने कहा कि "यह देखना कितना अच्छा है कि इन संतों ने अपने सुसमाचारी जीवन साक्ष्य द्वारा अपने-अपने राष्ट्रों और पूरे मानव परिवार के आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा दिया है।" पोप ने दुनिया के कई देशों में हो रहे युद्धों की निंदा की और आह्वान किया कि देश के राज नेताओं को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
पोप ने कहा, "दुख की बात है कि दुनिया में दूरियां बढ़ रही हैं और तनाव तथा युद्ध बढ़ रहे हैं, आशा है कि नए संत "एकजुटता और संवाद द्वारा" समाधान ढूँढने हेतु प्रेरित करेंगे।"
"विशेष रूप से जो बड़ी जिम्मेदारी के पदों पर हैं और शांति के नायक बनने हेतु बुलाये जाते हैं न कि युद्ध के।"
प्रांगण में मौजूद आधिकारिक प्रतिनिधिमंडलों को धन्यवाद देने के बाद, संत पापा ने छह पुरुषों और चार महिलाओं के संत बनने के अनमोल गवाह पर प्रकाश डाला।
"यह देखना कितना अच्छा है कि इन संतों ने अपने सुसमाचारी जीवन साक्ष्य द्वारा अपने-अपने राष्ट्रों और पूरे मानव परिवार के आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा दिया है।"
स्वर्ग की रानी प्रार्थना के पाठ के बाद, पोप ने विभिन्न धर्माध्यक्षों से मुलाकात की और फिर, एक खुली सफेद जीप पर सवार होकर, उन्होंने प्रांगण के चारों ओर घूमते हुए विश्वासियों का अभिवादन किया और बच्चों को आशीर्वाद दिया। इसके बाद वे अपने निवास संत मार्था के लिए प्रस्थान किये।

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