पोप द्वारा संत अगुस्टीन धर्मबहनों से युवाओं की मदद हेतु आग्रह

पोप फ्राँसिस ने कैनोनेसेस के संत अगुस्टीन के नोट्र-डेम धर्मसंध की धर्मबहनों से मुलाकात की और उनसे आग्रह किया कि वे अपने संस्थापकों के नक्शेकदम पर चलते रहें और युवाओं को जीवन के स्वाद को बहाल करने में मदद करें।
पोप फ्राँसिस ने सोमवार 24 जनवरी के संत क्लेमेंटीन सभागार में कैनोनेसेस के संत अगुस्टीन के नोट्र-डेम धर्मसंध की धर्मबहनों की महासभा के प्रतिभागियों से मुलाकात की। संत पापा ने धर्म समाज के सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए जनरल सुपीरियर के परिचय भाषण के लिए धन्यवाद दिया।
पोप ने कहा, "आपके शैक्षिक कारिस्म के द्वारा प्रभु का आत्मा, नई पीढ़ियों और परिवारों की सेवा में, एक समग्र मानवतावाद और एक अधिक भ्रातृत्वपूर्ण दुनिया के लिए प्रकट हुआ है। आज हम व्यक्ति के प्रशिक्षण और शिक्षा में चुनौती का सामना कर रहे हैं। आपने अपने संस्थापकों संत पियरे फूरियर और धन्य एलिक्स ले क्लर्क की सुसमाचारी अंतर्दृष्टि के प्रति निष्ठा में, खुद को लोकप्रिय शिक्षा, विश्वास व न्याय के लिए शिक्षा और गरीबों के साथ निकटता के लिए प्रतिबद्ध किया है।" उन्होंने कहा कि इस उपभोगतावाद और व्यक्तिवाद संस्कृति में जब सभी अपने आरामदायक जिंदगी की खोज करते हैं दूसरों के लिए कोई जगह नहीं रह जाती है। पोप ने विभिन्न देशों में काम करने वाली धर्मबहनों को मिशनरी शिष्य, आशा और आनंद का समुदाय बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
पोप ने महासभा के विषय " नोट्र-डेम धर्मसंध का शैक्षिक समझौता" के बारे में कहा कि यह युवाओं के अभिन्न विकास में योगदान देने के नए संभावित तरीकों पर चिंतन करने का एक मजबूत निमंत्रण है। वास्तव में, "जीवन की यात्रा के लिए एकजुटता पर आधारित एक आशा की आवश्यकता होती है और प्रत्येक परिवर्तन के लिए एक शैक्षिक पथ की आवश्यकता होती है, जो समकालीन दुनिया की चुनौतियों और आपात स्थितियों का जवाब देने, नए प्रतिमानों का निर्माण करने, हर पीढ़ी की जरूरतों को समझने और समाधान खोजने में सक्षम बनाये।" संत पापा की आशा है कि वे चुनौतियों और खतरों का सामना करने वाले युवाओं में उत्साह जगाने में सक्षम होंगे।
पोप ने कहा कि कलीसिया के साथ वे भी उनपर भरोसा करते हैं। अपने शब्दों, अपने कार्यों और अपनी गवाही द्वारा, आप दुनिया को एक मजबूत संदेश भेजते हैं जो कमजोर लोगों को खारिज करता है। वे अच्छाई और सच्चाई के स्रोत ईश्वर की आराधना में और पुनर्जीवित मसीह की सहभागिता में दुनिया को सकारात्मक और आशा के नजरिये से देखने की शक्ति प्राप्त करते हैं। इस तरह से एक शिक्षक के रूप में उनका मिशन समाज की भलाई के लिए लोगों के बीच गुणवत्तापूर्ण फल लाएगा। शिक्षित करना हमेशा आशा का कार्य होता है जो उदासीनता और लकवाग्रस्त तर्क को परिवर्तन करके सह-भागीदारी और अलग तरह के तर्क में बदलने के लिए आमंत्रित करता है, जो हमारे सामान्य संबंध का स्वागत करता है।
पोप ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने विशेष रूप से शिक्षा पर और युवाओं को बुरी तरह से प्रभावित किया है। उन्होंने अलगाव, उदासी और निराशा में रहने वाले युवाओं के निकट आने हेतु आमंत्रित किया। उन्होंने कहा, "वास्तव में, निकटता की भाषा को विशेषाधिकार प्राप्त होनी चाहिए। संबंधपरक और अस्तित्वगत प्रेम की भाषा जो हृदय को छूती है, जीवन तक पहुँचती है, आशा और इच्छाओं को जगाती है।"
अंत में पोप ने उन्हें और धर्मसंघ की सभी धर्मबहनों को माता मरियम के सिपु्र्द करते हुए अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

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