पोप द्वारा म्यांमार में हिंसा समाप्त करने का आह्वान। 

पोप फ्राँसिस ने म्यांमार में तख्तापलट विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने की अपील की, और सैन्य बंदी को राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और देश को लोकतंत्र की ओर अपनी यात्रा जारी रखने की अनुमति देने का आह्वान किया।
पोप फ्राँसिस ने बुधवारीय आम दर्शन के दौरान म्यांमार में 1 फरवरी को तख्तापलट के बाद खूनी संघर्ष का सामना करने वाले लोगों को याद करते हुए अतरराष्ट्रीय समुदाय से इसके समाधान हेतु निवेदन किया। 1 फरवरी को सैन्य तख्तापलट के बाद से लोकतंत्र समर्थक मार्च में भाग लेने वाले कम से कम 30 लोग मारे गए हैं।
पोप फ्राँसिस ने कहा, ʺम्यांमार से अभी भी खूनी संघर्ष की उदास खबरें आ रही हैं, जिसमें जानमाल का नुकसान हुआ है। मैं इसमें शामिल अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा, ताकि संघर्ष पर दमन और सामंजस्य पर बातचीत हो। मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील करता हूँ कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए काम करें कि म्यांमार के लोगों की आकांक्षा हिंसा से प्रभावित न हो। उस प्यारे देश के नौजवानों को अपने भविष्य की उम्मीद दी जा सके, जहाँ नफरत और अन्याय, वार्ता और सुलह के लिए जगह छोड़ दे।
राजनीतिक कैदियों की रिहाई:- अंत में पोप फ्राँसिस ने कहा, ʺमैं एक महीने पहले व्यक्त की गई आशा को फिर से दोहराता हूँ: कि विभिन्न जेलों के राजनीतिक नेताओं की रिहाई हो। म्यांमार द्वारा हाल के वर्षों में शुरु किए गए लोकतंत्र की राह, राजनीतिक नेताओं की रिहाई के ठोस संकेत के माध्यम से फिर से शुरू की जाए।ʺ बुधवार को आम दर्शन समारोह में संत पापा की अपील के दिन ही, पुलिस ने लोकतंत्र समर्थक मार्च में भाग लेने वाले 9 लोगों की हत्या कर दी।
तख्तापलट के खिलाफ लगभग एक महीने के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद, सुरक्षा बलों ने सप्ताहांत में देश भर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गोला बारूद का उपयोग करना शुरू कर दिया। 1 फरवरी के बाद से कुल 30 लोगों की मौत हो गई है और सैंकड़ों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

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