पोप की लेबनान यात्रा विचाराधीन

लेबनान के राष्ट्रपति मिखाएल औन के एक ट्वीट के बाद, वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक का कहना है कि पोप फ्राँसिस की देवदार भूमि की प्रेरितिक यात्रा की संभावना का अध्ययन किया जा रहा है।
पोप के लेबनान की यात्रा की संभावना के संबंध में लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल औन के एक ट्वीट के जवाब में, वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक, मत्तेओ ब्रूनी ने कहा, "यह एक संभावना है जिसपर अध्ययन किया जा रहा है।" राष्ट्रपति औन ने मंगलवार दोपहर को अपने ट्विटर अकाउंट पर संत पापा फ्राँसिस की देवदार के देश की आगामी यात्रा के खबर की जानकारी दी।
"लेबनानी लोग कुछ समय से इस यात्रा की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि पोप के समर्थन के लिए उनका आभार व्यक्त किया जा सके और देश के लिए उनके द्वारा की गई पहलों और उनकी शांति एवं स्थिरता के लिए की गई प्रार्थनाओं के लिए उनका धन्यवाद किया जा सके।" राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में औन के हवाले से कहा गया है।
पोप फ्राँसिस ने 22 मार्च को वाटिकन में लेबनान के राष्ट्रपति से मुलाकात की। पोप के साथ मिलने के बाद, राष्ट्रपति औन ने राज्य सचिव, कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन से मुलाकात की, साथ में विदेश सचिव, महाधर्माध्यक्ष पॉल रिचर्ड गलाघेर भी थे।
पोप फ्राँसिस कई बार कह चुके हैं कि वे लेबनान जाना चाहते हैं। बेरूत बंदरगाह में हुए विस्फोट के एक साल बाद, 4 अगस्त को आम दर्शन समारोह के दौरान, संत  पापा ने पूरे देश और विशेष रूप से पीड़ितों, उनके परिवारों और उन लोगों को संबोधित किया, जिन्होंने अपने घरों और नौकरियों को खो दिया है। उन्होंने आगे कहा: "प्रिय लेबनानी दोस्तों, मैं आपसे मिलने की बहुत इच्छा रखता हूँ और मैं आपके लिए प्रार्थना करना जारी रखता हूँ, ताकि लेबनान एक बार फिर पूरे मध्य पूर्व के लिए शांति और बंधुत्व का संदेश बन जाए।"
इसके अलावा 1 जुलाई 2021 को, पोप फ्राँसिस ने लेबनान के लिए एक दिवसीय चिंतन और प्रार्थना के लिए देश के पूर्वी कलीसियाओं के प्रधिधर्माध्यक्षों और प्रमुखों की मेजबानी की और बीते वर्ष इराक से लौटने समय  8 मार्च को पत्रकारों के साथ विमान में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, पोप फ्राँसिस ने खुलासा किया कि उन्होंने कार्डिनल बेचारा रास को एक पत्र में लेबनान की यात्रा करने का वादा किया था।
कई परमाध्यक्ष अतीत में लेबनान की यात्रा कर चुके हैं। पोप जॉन पॉल द्वितीय ने 1997 में देवदार की भूमि का दौरा किया और उसके बाद 2012 में पोप बेनेडिक्ट सोलहवें ने किया। यह उनके परमाध्यक्षीय काल की अंतिम प्रेरितिक यात्रा थी।
लेकिन लेबनान की धरती पर पैर रखने वाले पहले परमाध्यक्ष पोप पॉल छठे  के ठहराव को याद करने योग्य है। 1964 में संत पापा पॉल छठे यूखरीस्तीय कांग्रेस में भाग लेने के लिए मुम्बई, भारत जाने के रास्ते पर बेरूत में एक घंटे के लिए रुके। वहीं गणतंत्र के राष्ट्रपति चार्ल्स हेलू और देश के प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक अधिकारियों ने संत पापा पॉल छठे का स्वागत किया था।

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